Uttarakhand में UCC के एक साल: पलट दी सिविल लॉ की तस्वीर, धर्म आधारित तलाक समाप्त, संशोधित रूल में नया क्या?

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हुए एक साल पूरे हो गए हैं और सरकार ने जरूरी सुधारों के लिए संशोधन अध्यादेश लागू कर दिया है. इस दौरान 5 लाख से अधिक शादियों का रजिस्ट्रेशन हुआ और विपक्ष द्वारा फैलाया गया भ्रम कमजोर पड़ा है.;

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू हुए एक साल पूरा हो चुका है और इस एक साल में राज्य की सिविल लॉ व्यवस्था की तस्वीर काफी हद तक बदल चुकी है. 27 जनवरी को देश का पहला पूर्ण राज्य बनकर उत्तराखंड ने जब UCC लागू किया था, तब इसे लेकर सियासी शोर और आशंकाएं तेज थीं. अब एक साल बाद सरकार के आंकड़े और संशोधित नियम यह दिखा रहे हैं कि धर्म के आधार पर तलाक जैसी व्यवस्थाएं खत्म हो चुकी हैं, शादी से लेकर लिव-इन रिश्तों तक कानून ज्यादा स्पष्ट और सख्त हुआ है और नागरिकों के लिए प्रक्रिया पहले से सरल बनी है. संशोधित रूल्स के जरिए जबरदस्ती, धोखाधड़ी और गलत पहचान जैसे मामलों पर नकेल कसी गई है. वहीं रजिस्ट्रेशन और प्राइवेसी से जुड़े प्रावधानों को भी व्यावहारिक बनाया गया है.

सवाल अब यही है कि UCC के संशोधित नियमों में नया क्या है और यह बदलाव उत्तराखंड के सामाजिक-कानूनी ढांचे को किस दिशा में ले जा रहा है. पुष्कर सिंह धामी सरकार यूसीसी कानून लागू होने की वर्षगांठ मनाई जा रही है. इस एक साल में यूनिफॉर्म सिविल कोड के तहत करीब 4 लाख 70 हजार शादियां रजिस्टर्ड हुई हैं. वहीं, लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 68 जोड़ों ने रजिस्ट्रेशन कराया. दो जोड़ों ने लिव-इन रिलेशनशिप टर्मिनेट के आवेदन किए और यह सर्टिफिकेट जारी किया गया.

एक साल में 5 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो चुकी है. यह राज्य का पहला ऐसा कानून है जो धर्म, जाति या समुदाय से ऊपर उठकर सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है. UCC से जुड़ी सेवाएं अब 23 भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिसमें संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी भाषाएं शामिल हैं. AI आधारित सहायता भी दी जा रही है. ताकि नागरिक नियम आसानी से समझ सकें. उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के एक साल में 5 लाख से अधिक विवाह रजिस्ट्रेशन और 68 लिव-इन रजिस्ट्रेशन दिखाता है कि कानून का उपयोग हो रहा है और समाजिक बदलाव आ रहा है. सार्वजनिक समानता, लैंगिक समानता, क़ानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रक्रिया में सरलता, यही उत्तराखंड UCC के मूल उद्देश्य हैं.

उत्तराखंड UCC में क्या हुए प्रमुख बदलाव

  • हर विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है. शादी के लिए उम्र की सीमउ पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय. बहुविवाह (polygamy) और बाल विवाह पर पाबंदी. गलत पहचान देकर शादी करने पर विवाह अमान्य माना जाएगा.
  • तलाक के नियम अब सभी समुदायों के लिए एक जैसे. धर्म आधारित तलाक प्रावधान समाप्त. दंपत्ति कोर्ट से तलाक का आवेदन कर सकते हैं.
  • जबरदस्ती, धोखाधड़ी, बल प्रयोग से विवाह या लिव-इन में जुड़ने पर अब कानूनी दंड तय है. पहचान छिपाना या झूठी जानकारी देने पर सजा और जुर्माना शामिल.
  • संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार में लिंग या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं रहेगा. बेटे और बेटी दोनों को समान हक मिलेगा.
  • लिव-इन रिश्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य. जोड़े को नियमों का पालन करना होगा. अन्यथा जुर्माना या दंड का प्रावधान है. बच्चों को भी उत्तराधिकार का अधिकार मिलेगा.
  • केवल आधार आवश्यक पहचान नहीं नहीं. अब वैकल्पिक पहचान भी मान्य. लिव-इन जोड़ों की जानकारी अब पुलिस के साथ अनावश्यक रूप से साझा नहीं की जाएगी. प्राइवेसी बेहतर की गई है. रजिस्ट्रार की जांच-पड़ताल शक्तियों में सीमा लगाई गई है. ताकि मनमानी जांच रोकी जा सके.
  • उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू होने के एक साल पूरे हो चुके हैं. प्रदेश सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड के कई प्रावधानों में सुधार के लिए एक संशोधन अध्यादेश लागू किया.
  • शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में जबरदस्ती करने और धोखाधड़ी जैसे मामलों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन बदलाव किए गए हैं.
  • उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की मंजूरी मिल गई है. राज्यपाल की मंजूरी के बाद तुरंत प्रभाव से यह लागू हो गया है.
  • अब सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और दंड के लिए भारतीय न्याय संहिता 2023 लागू की गई है. साथ ही, सचिव की जगह पर अपर सचिव को सक्षम अधिकारी बनाया गया है. लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर रजिस्ट्रार को टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करने और विधवा शब्द को जीवनसाथी से बदलने का प्रावधान किया गया है.
  • अध्यादेश रजिस्ट्रार जनरल को शादी, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और विरासत से संबंधित रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार देता है. संशोधन अध्यादेश में प्रावधान किया गया है कि सब-रजिस्ट्रार तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने में असफल रहता है, तो मामले ऑटोमेटिक रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार जनरल को भेज दिए जाएंगे.
  • संशोधन अध्यादेश सब-रजिस्ट्रार पर लगाए गए जुर्माने के खिलाफ अपील करने का अधिकार देता है. जुर्माने की वसूली भूमि राजस्व के रूप में करने का प्रावधान भी किया गया है.
  • शादी के समय पहचान में गलत जानकारी देने पर विवाह निस्तारीकरण का भी प्रावधान किया गया है. साथ ही शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में जबरदस्ती, दबाव, धोखाधड़ी या गैर-कानूनी कार्यों के लिए सख्त दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं.
  • कई प्रावधान अब ज्यादा स्पष्ट और लागू-योग्य हैं. ताकि सरकार और नागरिकों के बीच विवाद कम हो. ऑनलाइन पोर्टल और ऐप के जरिए रजिस्ट्रेशन और अपील की प्रक्रिया आसान हुई है.

भ्रम फैलाने में विपक्ष क्यों रहा विफल?

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने यूसीसी की वर्षगांठ के मौके पर कहा कि हमने अपना चुनावी वादा निभाते हुए 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में यूसीसी लागू किया था. आज इसका एक साल पूरा हुआ है. शुरुआती दौर में यूसीसी को लेकर भ्रम फैलाने की पूरी कोशिश की गई. आज इसके एक साल पूरे होने पर सभी भ्रम खत्म हुए हैं. विपक्ष पर निशाना चाहते हुए सीएम धामी ने कहा कि यूसीसी को लेकर फैलाने की विपक्ष की सारी कोशिश फेल हो गई। वह असफल रहे हैं.

सीएम बोले - तोड़ा UCC का मिथक

सीएम धामी ने कहा कि यूसीसी की यह गंगोत्री पूरे देश में अब अपना प्रभाव दिखाएगी. अपने प्रदेशवासियों को बहुत बधाई देता हूं कि उन्होंने हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे संकल्प को पूरा करने के लिए हमको अपना आशीर्वाद दिया था. उत्तराखंड के अंदर पहली बार एक मिथक तोड़ा था.

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