दाऊद का करीबी और सबसे बड़ा ऑटो लिफ्टर! दुबई में बैठकर करता है ऑपरेट; संभल हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा की कुंडली

24 नवंबर 2024 को संभल में भड़की हिंसा के पीछे जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है शारिक साठा. पुलिस के मुताबिक शारिक साठा इस हिंसा का मास्टरमाइंड है, जो भारत में नहीं बल्कि दुबई में बैठकर पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल कर रहा था. हथियारों की सप्लाई से लेकर स्थानीय गैंग्स को भड़काने तक, हर कड़ी उसी से जुड़ी बताई जा रही है.;

Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 21 Jan 2026 12:44 PM IST

देशभर में संभल हिंसा की तस्वीरें जब देशभर में फैलीं, तो लोगों ने सड़कों पर उपद्रव, पत्थरबाज़ी और हथियार देखे. लेकिन इस पूरी हिंसा का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि इसका कथित मास्टरमाइंड शारिक साठा घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था. न कोई वीडियो, न कोई फोटो, फिर भी पुलिस की हर जांच एक ही नाम पर जाकर ठहरती रही. सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसा कौन है, जो भारत से हजारों किलोमीटर दूर बैठकर यहां आग भड़का सकता है?

आज वही नाम फिर चर्चा में है, क्योंकि पुलिस ने उसकी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की की है. अदालत से आदेश पर प्रशासन की टीमें कार्रवाई कर रही है. लेकिन जिस शख्स को इस हिंसा का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, वह भारत में नहीं, बल्कि दुबई में बैठकर कानून को खुली चुनौती दे रहा है.

कौन है शारिक साठा?

शारिक साठा संभल के दीपा सराय इलाके का रहने वाला है. शुरुआती जिंदगी में वह एक आम युवक था, लेकिन धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में उसका नाम मजबूत होने लगा. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह सिर्फ एक स्थानीय अपराधी नहीं बल्कि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है. जांच एजेंसियों का दावा है कि शारिक साठा साल 2020 में फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत छोड़कर दुबई भाग गया. वहीं से उसने अपने नेटवर्क को और मजबूत किया और भारत में बैठे सहयोगियों के जरिए वारदातों को अंजाम दिलाने लगा. संभल हिंसा के वक्त भी वह सीधे मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन हर कदम उसी के इशारे पर उठाया गया.

दुबई से लिखी गई संभल हिंसा की पटकथा

पुलिस के अनुसार, 24 नवंबर 2024 की हिंसा कोई अचानक भड़की भीड़ नहीं थी, बल्कि सुनियोजित साजिश थी. शारिक साठा पर आरोप है कि उसने दुबई में बैठकर हथियार और कारतूस की सप्लाई करवाई. उसके निर्देश पर स्थानीय गैंग्स को एक्टिव किया गया और सर्वे के दौरान माहौल को हिंसक बनाया गया. हिंसा के बाद पुलिस ने जो हथियार बरामद किए, वे इस साजिश की गंभीरता दिखाते हैं. पाकिस्तान, अमेरिका और चेकोस्लोवाकिया में बने हथियार और कारतूस मिले. यह साफ संकेत था कि मामला सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है.

शारिक साठा पर कितने मुकदमे?

शारिक साठा का आपराधिक रिकॉर्ड खुद में एक फाइल नहीं, बल्कि पूरी अलमारी है. पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ अब तक 69 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें हत्या, आर्म्स एक्ट, जालसाजी, वाहन चोरी, गैंगस्टर एक्ट और संभल हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं. इतना ही नहीं, दिल्ली पुलिस भी उसे लंबे समय से तलाश रही है. उस पर आरोप है कि उसने दिल्ली-एनसीआर से सैकड़ों गाड़ियां चोरी करवाईं और उन्हें उत्तर-पूर्वी राज्यों तक सप्लाई किया. अनुमान है कि उसके नेटवर्क के जरिए 300 से ज्यादा वाहन चोरी किए गए. इससे पहले उसकी जमीन पर कब्ज़ा करके सीओ ऑफिस बनाया गया है.

दाऊद से नजदीकी और ISI तक के तार

पुलिस जांच में शारिक साठा की क्राइम कुंडली और भी खतरनाक तस्वीर पेश करती है. एजेंसियों का दावा है कि उसके तार अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े रहे हैं. इतना ही नहीं, उसके संपर्क पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से होने की भी आशंका जताई जा रही है. वह सिर्फ वाहन चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हथियार तस्करी और सप्लाई में भी उसकी अहम भूमिका रही है. उसके गैंग के कई सदस्य पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें गुलाम और अफरोज जैसे नाम शामिल हैं.

कुर्की की कार्रवाई: कोर्ट का सख्त रुख

संभल हिंसा के बाद से शारिक साठा फरार है. कोर्ट के सामने पेश न होने और आदेशों की अवहेलना करने पर न्यायालय ने उसकी संपत्तियों की कुर्की का वारंट जारी किया. पुलिस के मुताबिक, उसकी करीब 2.31 करोड़ रुपये की संपत्तियां पहले ही जब्त की जा चुकी हैं. अब एसडीएम के नेतृत्व में गठित टीम उसके नखासा थाना क्षेत्र स्थित मकान की कुर्की की है. कोर्ट के आदेश को न मानने पर उसके खिलाफ तीन और नए मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं.

फरारी, नेटवर्क और कानून को खुली चुनौती

लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बावजूद शारिक साठा भारत नहीं लौटा. दुबई में बैठकर वह अब भी अपने नेटवर्क को संभालने की कोशिश कर रहा है. पुलिस मानती है कि उसकी गिरफ्तारी से संभल हिंसा समेत कई बड़े मामलों की परतें खुल सकती हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ कुर्की से ऐसे अपराधी रुकेंगे, या उसे भारत लाकर कानून के कटघरे में खड़ा करना जरूरी है? यह केस अब सिर्फ संभल हिंसा का नहीं, बल्कि संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय साजिश का प्रतीक बन चुका है.

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