लंदन वाली नौकरी छोड़ बनीं IAS, महाशिवरात्रि के दिन DM दिव्या मित्तल का 'हाय ओ रब्बा' गाने पर डांस का Video Viral
देवरिया की डीएम दिव्या मित्तल, जिन्होंने लंदन में जेपी मॉर्गन की हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़कर यूपीएससी पास किया, इन दिनों फिर चर्चा में हैं. शिव जागरण कार्यक्रम में ‘हाय ओ रब्बा’ गाने पर उनके डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब चर्चा हो रही है.;
Who Is Deoria DM Divya Mittal; महाशिवरात्रि के दिन उत्तर प्रदेश के देवरिया में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. रुद्रपुर स्थित प्रसिद्ध दुग्धेश्वर नाथ मंदिर में आयोजित भव्य शिव जागरण के दौरान जिलाधिकारी दिव्या मित्तल और सलेमपुर की एसडीएम दिशा श्रीवास्तव भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं. जिनका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. जैसे ही DM साहब का वीडियो सामने आया तो यह दिव्या मित्तल के डांस वीडियो सामने आया, देखते ही देखते वह वायरल हो गया. लोग इसे ‘भक्ति में डूबी प्रशासनिक टीम’ बता रहे हैं, तो कुछ इसे जनता के साथ जुड़ाव की मिसाल मान रहे हैं.
मिलिए लंदन से पढ़ाई करने वाली DM दिव्या मित्तल से
लंदन की चकाचौंध भरी कॉर्पोरेट दुनिया से निकलकर उत्तर प्रदेश के धूल-धक्कड़ भरे गांवों तक का सफर तय करना कोई मामूली फैसला नहीं होता. लेकिन Divya Mittal ने यह साबित कर दिया कि जब दिल किसी बड़े मकसद के लिए धड़कता है, तो दुनिया की सबसे आकर्षक नौकरी और मोटी सैलरी भी छोटी लगने लगती है. उनकी कहानी सिर्फ यूपीएससी क्रैक करने की नहीं, बल्कि हिम्मत, संवेदनशील नेतृत्व और प्रशासनिक नवाचार की मिसाल है.
आज देवरिया की जिलाधिकारी के रूप में जमीनी प्रशासन का चेहरा बन चुकीं दिव्या मित्तल कभी लंदन के हाई-स्टेक ट्रेडिंग फ्लोर पर करोड़ों के सौदे किया करती थीं. लेकिन उन्होंने आरामदायक जिंदगी छोड़कर उस राह को चुना, जहां चुनौतियां ज्यादा थीं, मगर संतोष भी उतना ही गहरा था.
DM दिव्या मित्तल के Viral Video में क्या?
शनिवार देर रात देवरिया के रुद्रपुर कस्बे में शिव जागरण का भव्य आयोजन किया गया था. मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, होली गीत और धार्मिक प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया था. हजारों श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में लीन थे. इसी दौरान मंच के सामने मौजूद जिलाधिकारी दिव्या मित्तल भी खुद को रोक नहीं सकीं और भक्तों के साथ झूमकर नृत्य करने लगीं.
कैसे वायरल हुआ DM का डांस?
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जैसे ही यह दृश्य अपने मोबाइल में कैद किया, वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा. कुछ ही घंटों में यह क्लिप वायरल हो गई. वीडियो में देखा जा सकता है कि डीएम दिव्या मित्तल पूरे उत्साह के साथ भजन की धुन पर थिरक रही हैं. उनके साथ मौजूद एसडीएम दिशा श्रीवास्तव भी भक्ति के रंग में रंगी नजर आती हैं.
क्या सिर्फ औपचारिकता थी या सच्ची भक्ति?
जो लोग जिलाधिकारी दिव्या मित्तल को करीब से जानते हैं, उनका कहना है कि वह धार्मिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए जानी जाती हैं. जिले में आयोजित कई धार्मिक आयोजनों में उनकी मौजूदगी पहले भी चर्चा में रही है. इससे पहले भी बालाजी मंदिर के अन्नकूट महोत्सव और देवरही मंदिर के कार्यक्रमों में उनका नृत्य और सहभागिता सोशल मीडिया पर सराही जा चुकी है.
वायरल वीडियो पर क्या बोले यूजर्स?
सोशल मीडिया पर अधिकांश लोग इस वीडियो की तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि जब अधिकारी जनता के साथ इस तरह घुल-मिलकर कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, तो प्रशासन और समाज के बीच दूरी कम होती है. हालांकि कुछ लोग प्रशासनिक पद की गरिमा पर भी सवाल उठा रहे हैं, लेकिन समर्थकों का कहना है कि भक्ति और आस्था में शामिल होना कोई अपराध नहीं है.
क्या यह ‘छोटी काशी’ की पहचान को मिला नया रंग?
रुद्रपुर को ‘छोटी काशी’ के नाम से जाना जाता है. महाशिवरात्रि के मौके पर यहां हर साल भव्य आयोजन होते हैं. इस बार शिव जागरण में प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और खास बना दिया. भक्ति, प्रशासन और जनभावना- तीनों का संगम इस कार्यक्रम में साफ दिखाई दिया.
क्या थी दिव्या मित्तल की कॉर्पोरेट जिंदगी?
दिव्या मित्तल ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों Indian Institute of Technology Delhi और Indian Institute of Management Bangalore से पढ़ाई की. इतनी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बाद उन्हें लंदन में JP Morgan में एक्सोटिक डेरिवेटिव्स ट्रेडर की हाई-प्रोफाइल नौकरी मिली. विदेशी करियर, शानदार वेतन, ग्लोबल लाइफस्टाइल—कागज पर सब कुछ परफेक्ट था. लेकिन भीतर कहीं देश के लिए काम करने की चाह लगातार दस्तक दे रही थी.
क्यों छोड़ी करोड़ों की नौकरी और चुना प्रशासनिक सेवा का रास्ता?
दिव्या मित्तल के जीवन में यह मोड़ तब आया जब उनके पति और आईएएस अधिकारी Gagandeep Singh से उन्हें प्रेरणा मिली. उन्होंने तय कर लिया कि वे सिर्फ सफल प्रोफेशनल नहीं, बल्कि बदलाव की प्रतिनिधि बनेंगी. साल 2012 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल करते हुए आईपीएस सेवा के लिए चयनित हुईं. लेकिन उनका लक्ष्य साफ था-आईएएस. उन्होंने हार नहीं मानी. 2013 में दोबारा परीक्षा दी और भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर यह साबित कर दिया कि उनका सपना पद नहीं, बल्कि प्रभाव था.
कैसे बनीं जमीनी प्रशासन की मजबूत पहचान?
दिव्या मित्तल की असली पहचान उनकी कार्यशैली से बनी. जब वे Mirzapur की जिलाधिकारी बनीं, तो उन्होंने एक ऐसी चुनौती स्वीकार की जिसे करीब 76 वर्षों से “असंभव” माना जा रहा था. सूखे और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में उन्होंने जल संरक्षण और संसाधन प्रबंधन को प्राथमिकता दी. गांव-गांव जाकर समस्याएं सुनीं, योजनाओं को जमीन पर उतारा और प्रशासन को केवल आदेश देने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाधान देने वाली व्यवस्था में बदलने की कोशिश की. उनका नेतृत्व केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहा. वे खुद मैदान में उतरीं, लोगों से संवाद किया और सिस्टम को संवेदनशील बनाया.
क्या है दिव्या मित्तल की कहानी का असली संदेश?
दिव्या मित्तल की कहानी यह बताती है कि सफलता केवल वेतन, पद या विदेशी जीवनशैली से नहीं मापी जाती. असली संतोष उस काम में है, जहां आपके फैसले हजारों जिंदगियों को प्रभावित करते हैं. लंदन के ट्रेडिंग फ्लोर से लेकर उत्तर प्रदेश के गांवों तक की उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब उद्देश्य बड़ा हो, तो रास्ते खुद बनते जाते हैं.