Mukhtar Ansari attack case: 22 साल बाद पूर्व MLC बृजेश सिंह समेत 5 बरी, 13 जनवरी 2004 को आखिर क्या हुआ था?
मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह से जुड़ा 2004 का चर्चित कैंट फायरिंग केस 22 साल बाद आखिरकार खत्म हो गया है. लखनऊ की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.
Mukhtar Ansari Attack Case: उत्तर प्रदेश की राजनीति को कभी झकझोर देने वाला 2004 का कैंट फायरिंग मामला आखिरकार 22 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंच गया. लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट ने मुख्य आरोपी Brijesh Singh समेत उनके चार सहयोगियों को सबूतों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए शनिवार (28 मार्च) को बरी कर दिया.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस तरीके से साबित करने में असफल रहा. इसी के साथ दो दशक पुराना यह हाई-प्रोफाइल मामला, जिसने कभी प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी थी, कानूनी रूप से समाप्त हो गया.
क्या है पूरा मामला?
घटना 13 जनवरी 2004 की है, जब लखनऊ के कैंट थाना क्षेत्र में सदर रेलवे क्रॉसिंग के पास दो प्रभावशाली नेताओं के काफिले आमने-सामने आ गए. एक ओर गाजीपुर से लखनऊ आ रहे तत्कालीन विधायक Mukhtar Ansari अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे, जबकि दूसरी तरफ लखनऊ से गाजीपुर लौट रहे विधायक Krishnanand Rai अपने समर्थकों के साथ सफर कर रहे थे.
जैसे ही दोनों काफिलों का आमना-सामना हुआ, माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ ही क्षणों में यह तनाव हिंसा में बदल गया और दोनों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई. करीब पांच मिनट तक रुक-रुक कर गोलियां चलती रहीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
घटना के तुरंत बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमे दर्ज कराए. Mukhtar Ansari की ओर से Krishnanand Rai, Brijesh Singh और अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास, दंगा और शस्त्र अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई.
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और वर्षों तक अदालत में सुनवाई चलती रही. इस दौरान कई गवाह पेश हुए, लेकिन समय बीतने के साथ कई प्रत्यक्षदर्शी मुकर गए और सबूत कमजोर पड़ते चले गए. लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने Brijesh Singh के अलावा त्रिभुवन सिंह, सुनील राय, आनंद राय और अजय सिंह उर्फ गुड्डू को भी सभी आरोपों से बरी कर दिया. इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया था, जब आरोपी रहे Krishnanand Rai की कुछ सालों बाद हत्या कर दी गई, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक संवेदनशील बना दिया.
अदालत ने अपने आदेश में क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में दोहराया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका. यही वजह रही कि सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया. गौरतलब है कि 2004 के समय Mukhtar Ansari और Krishnanand Rai दोनों ही गाजीपुर क्षेत्र के प्रभावशाली नेता माने जाते थे और उनके बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी. कैंट फायरिंग की इस घटना ने उस समय न केवल लखनऊ, बल्कि पूरे पूर्वांचल में सियासी हलचल मचा दी थी.
अब 22 साल बाद आए इस फैसले ने उस दौर के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में से एक को कानूनी रूप से खत्म कर दिया है, हालांकि इसकी गूंज लंबे समय तक राजनीति और समाज में सुनाई देती रही.