कौन हैं बृजभूषण सिंह की बेटी शालिनी सिंह? सिसायत में एंट्री के चर्चे, 2027 में नोएडा सीट से लड़ सकती हैं चुनाव

नोएडा में कवि सम्मेलन से चर्चा में आईं शालिनी सिंह ने राजनीति में एंट्री के संकेत दिए हैं. 2027 यूपी चुनाव में नोएडा सीट से संभावित दावेदारी ने भाजपा के भीतर नई सियासी बहस छेड़ दी है.

क्या राजनीति में आने वाली हैं बृजभूषण की बेटी?(Image Source:  Instagram: shalinisingh124 )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 6 April 2026 1:29 PM IST

भाजपा के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का पूरा परिवार राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहा है. उनके दो बेटे प्रतीक भूषण सिंह और करण भूषण सिंह पहले से ही राजनीति में हैं. अब उनकी इकलौती बेटी शालिनी सिंह भी सुर्खियों में हैं.

हाल ही में नोएडा में एक कवि सम्मेलन में कविताएं पढ़कर उन्होंने ध्यान खींचा है. शनिवार को नोएडा सेक्टर-121 के होम्स 121 सोसाइटी में आयोजित कवि सम्मेलन में शालिनी सिंह पहली बार मंच पर आईं. उन्होंने गर्व के साथ कहा, 'मैं पहलवान की बेटी हूं और दो बाहुबली भाइयों की बहन हूं उन्होंने यह भी बताया कि आज पहली बार उन्हें मंच मिला, पहले कोई उन्हें मौका देने को तैयार नहीं होता था. 

क्या शालिनी सिंह करेंगी सियासी एंट्री?

बृजभूषण शरण सिंह के तीन बेटे और एक बेटी हैं, जिनमें से एक बेटे शक्ति सिंह का निधन हो चुका है. वर्तमान में उनके दो बेटे और एक बेटी जीवित हैं. बड़ा बेटा प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से दूसरी बार विधायक हैं, जबकि छोटे बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं. अब खबर यह है कि बेटी शालिनी सिंह भी राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रही हैं. इंडिया टुडे ग्रुप को दिए इंटरव्यू में उन्होंने राजनीति में एंट्री के मजबूत संकेत दिए हैं. शालिनी ने कहा कि अगर सही समय और सही परिस्थितियां बनीं, तो वह चुनाव लड़ने से मना नहीं करेंगी. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में उनकी सियासी एंट्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है. 

2027 में नोएडा से लड़ेंगी चुनाव?

शालिनी सिंह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नोएडा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में बताई जा रही हैं. इस पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'अभी तो यह तय नहीं हुआ है कि हमने मन बना लिया है या नहीं, लेकिन अगर परिस्थितियां अनुकूल बनीं तो हम मना भी नहीं करेंगे.' ध्यान देने वाली बात यह है कि नोएडा सीट पर पिछले दो बार से केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बड़े बेटे पंकज सिंह भाजपा के विधायक हैं. शालिनी सिंह और उनका पूरा परिवार भी भाजपा से जुड़ा हुआ है. ऐसे में अगर शालिनी नोएडा से टिकट मांगती हैं तो पार्टी के अंदर दिलचस्प स्थिति बन सकती है. 

एक परिवार से चार लोग चुनाव लड़ेंगे?

अगर शालिनी सिंह राजनीति में सक्रिय हुईं तो बृजभूषण सिंह के परिवार से चार सदस्य चुनाव लड़ते नजर आएंगे. प्रतीक भूषण विधायक हैं, करण भूषण सांसद हैं, बृजभूषण सिंह खुद 2029 के लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और अब बेटी शालिनी भी 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने को तैयार हैं. शालिनी सिंह परिवारवाद के आरोपों पर साफ कहती हैं कि 'संविधान में किसी को चुनाव लड़ने से कोई रोक नहीं है. अगर हममें चुनाव लड़ने की क्षमता है, हम शिक्षित हैं और देश चलाने की समझ रखते हैं, तो फिर क्यों नहीं लड़ सकते?.' वे कहती हैं कि वे अपनी मां से सीखकर आई हैं कि लोगों का सम्मान कैसे किया जाए और जनता से कैसे जुड़ा जाए. उनका मानना है कि परिवार से होना कोई निगेटिव बात नहीं है, जब तक व्यक्ति अपनी योग्यता साबित कर दे. 

शालिनी सिंह क्या करती हैं?

शालिनी सिंह एक मल्टी-टैलेंटेड महिला हैं। वे मुख्य रूप से आर्टिस्ट हैं.  अब तक उन्होंने 5 किताबें लिख चुकी हैं. कविता लिखना और पढ़ना उनका बहुत बड़ा शौक है. वे बेहतर स्किल्ड शूटर भी हैं. उनकी कई पेंटिंग्स की प्रदर्शनियां पहले ही लग चुकी हैं. वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं और नोएडा सिटिजन फोरम की सदस्य हैं. इसके अलावा वे वकील हैं और शिक्षा क्षेत्र में भी काम करती हैं, यानी वे एक एजुकेशनिस्ट भी हैं. 

शालिनी सिंह का परिवार

शालिनी सिंह की शादी बिहार के आरा से हुई है. उनके पति विशाल सिंह भाजपा नेता हैं. विशाल सिंह, बिहार के पूर्व सांसद स्वर्गीय अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते बेटे हैं. दोनों पति-पत्नी वर्तमान में नोएडा में रहते हैं. उनके एक 13 वर्षीय बेटा अथर्व सिंह है. 

कवि सम्मेलन में पढ़ी कविताएं

कार्यक्रम में शालिनी ने कई सुंदर और भावुक कविताएं पढ़ीं. एक कविता में उन्होंने अपने भाई करण भूषण सिंह का जिक्र करते हुए लिखा कि जब वह चुनाव जीतकर घर आते हैं और मां को गले लगाते हैं, तो सारी वेदनाएं शांत हो जाती हैं. एक अन्य कविता में उन्होंने कहा, 'हम लिख देते हैं इतिहास, किसी तलवार से नहीं मारूंगा, यह वादा है मेरा, तेरी तरह पीठ पर वार नहीं मारूंगा.' मजाकिया अंदाज में उन्होंने अपने दोनों भाइयों को 'बाहुबली' भी कहा. एक और पंक्ति थी, 'एक सल्तनत है लफ्जों की, हम दिखावा नहीं करते, हम लिख देते हैं इतिहास, हम दावा नहीं करते.' इस कवि सम्मेलन के बाद शालिनी सिंह की चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश में बढ़ गई है. वे अब केवल अपने पिता और भाइयों की बेटी के रूप में नहीं, बल्कि अपनी खुद की प्रतिभा, कला, लेखन और सामाजिक कार्यों के कारण भी अलग पहचान बना रही हैं. 2027 का चुनाव कितना दिलचस्प होने वाला है, यह देखना बाकी है. 

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