असम के बाद अब यूपी पर नजर! अब प्रियंका गांधी के हाथ में होगी कांग्रेस की कमान, डूबती नैया के बीच बनेगा गेम चेंजर?

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में प्रियंका गांधी का राजनीतिक सफर और उनका नारा ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ ने उन्हें यूपी की राजनीति में अलग पहचान दिलाई थी. इस बार फिर उनका नाम प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालने को लेकर चर्चा में है. कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो सपा के साथ सीट बंटवारे में ज्यादा तकरार नहीं होगी. यह फैसला यूपी पॉलिटिक्स में गेम चेंजर भी साबित हो सकता है.;

( Image Source:  Priyanka Gandhi Faceboook )

राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पार्टी की प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रिय राजनीति के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने हमेशा ही महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक संघर्ष के प्रतीक के रूप में खुद को स्थापित किया है. उनका मशहूर नारा ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का परिचायक है. यह नारा उन्होंने उन्नाव रेप कांड के संदर्भ में दिया था. अब 2027 की राजनीतिक लड़ाई में उनकी वापसी की संभावनाएं चर्चा में हैं. पार्टी के नेताओं का कहना है कि अगर ऐसा होता है कि प्रदेश कांग्रेस में अच्छा रहेगा.

कांग्रेस के बयान में क्या है?

प्रियंका गांधी की यूपी कांग्रेस में वापसी की चर्चा ने पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया है. इस बात की चर्चा उस  समय शुरू हुई जब यूपी कांग्रेस की ओर से एक आधिकारिक बयान जारी किया. कांग्रेस के इस बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने जा रही हैं. कांग्रेस ने 12 जनवरी 2026 को प्रियंका गांधी के जन्मदिन पर पूरे प्रदेश में एक साथ पत्रकार वार्ता करने का फैसला लिया है.

यूपी कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जनपद के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी इसे अपने 'एजेंडा-100 दिन' अभियान से जोड़कर देख रही है. राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम सामान्य औपचारिकता नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का स्पष्ट संकेत है. इसके बाद से चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सुपर प्रभारी की भूमिका एक बार फिर प्रियंका गांधी के पास हो सकती है.

संभालती हैं जिम्मेदारी तो क्या होगा?

यूपी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि प्रियंका फिर से प्रदेश चुनाव का जिम्मेदारी संभालती हैं तो यह तय है सपा के साथ सीट शेयरिंग में ज्यादा तकरार नहीं होगी. लोकसभा चुनाव के दौरान जब कुछ सीटों पर पेच फंसा तो कांग्रेस की ओर से प्रियंका ने ही कमान संभाली थी. लोकसभा चुनाव 2024 में कुछ सीटों पर कांग्रेस और सपा के बीच बात फंसी थी, जिसकी वजह से गठबंधन के स्वरूप पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका था. जिसके बाद प्रियंका ने खुद इस मामले में पहल की और राहुल से बातचीत के बाद अखिलेश यादव चर्चा की और सीट बंटवारे पर बात बन गई थी. इसी तरह जब 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा चीफ करहल सीट से चुनाव लड़ रहे थे, तब प्रियंका की अगुवाई में कांग्रेस ने इस सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारा था.

कांग्रेस नेता ने कहा कि यूपी प्रदेश की जिम्मेदारी वो संभालेंगी या नहीं, यह तो आने वाला समय बताएगा. फिलहाल, पिछले कुछ दिनों कांग्रेस हाईकमान द्वारा यूपी पर की जा रहीं बैठकों ने यह संकेत दिए हैं कि पार्टी, 2026 में पंचायत और 2027 में विधानसभा चुनाव के जरिए लोकसभा चुनाव में हुए सियासी लाभ का क्रम बरकरार रखने की कोशिश करेगी.

प्रियंका ने दिया था 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का नारा

यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि प्रियंका गांधी ने विधानसभा चुनाव में 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का कॉन्सेप्ट लॉन्च किया था. उनका यह नारा काफी लोकप्रिय हुआ था, लेकिन कांग्रेस को जीत 2016 के चुनाव से भी कम सीटों पर मिली थी. 2022 के चुनाव में यूपी में कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल करने में सफल हुई थी.

तब प्रियंका गांधी ने कहा था 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' स्लोगन चुनाव से पहले ही बन गया था. इसके पीछे सोच की शुरुआत तब हुई, जब उन्नाव की रेप पीड़िता के घर गई थी, वहां से इस स्लोगन की सोच आई. मैं उन्नाव रेप पीड़िता के घर गई थी, उनके परिवार से बात की. उनके परिवार से मिली तो मेरा नजरिया बदल गया. ऐसा कोई अत्याचार नहीं था, जो उसके (गैंगरेप पीड़ित) परिवार के साथ नहीं किया गया.

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