Padma Awards 2026: कौन हैं उत्तर प्रदेश की प्रो. मंगला कपूर? 12 साल की उम्र में हुआ एसिड अटैक; संगीत को बनाई दुनिया

पद्म पुरस्कार 2026 में उत्तर प्रदेश की प्रोफेसर मंगला कपूर को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. मंगला कपूर एक एसिड अटैक सर्वाइवर हैं, जिन पर 12 साल की उम्र में जानलेवा हमला हुआ था. छह साल तक अस्पताल में रहने और 36 से ज्यादा सर्जरी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. शास्त्रीय संगीत में ग्वालियर घराने की गायिका बनीं और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं.;

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By :  रूपाली राय
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इस बार पद्म पुरस्कार 2026 में देश के कई महान व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है. सबसे ऊंचा सम्मान पद्म विभूषण उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण और विशिष्ट सेवा की है. साल 2026 के पद्म विभूषण पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में प्रमुख नाम हैं- धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) कला क्षेत्र में उनके योगदान के लिए (महाराष्ट्र) के. टी. थॉमस - सार्वजनिक मामले (केरल), एन. राजम - कला (उत्तर प्रदेश) अन्य नामों में पी. नारायणन और वी. एस. अच्युतानंदन (मरणोपरांत) जैसे लोग शामिल हैं. 

ये पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिए गए हैं जिन्होंने अपने क्षेत्र में बहुत ऊंची और प्रेरणादायक उपलब्धियां हासिल की हैं. अब बात करते हैं उत्तर प्रदेश की, जहां से कई लोगों को इस बार पद्म पुरस्कार मिले हैं. इनमें से एक बहुत खास नाम है प्रोफेसर मंगला कपूर का, जो काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं. उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है. मंगला कपूर पहले से ही कई पुरस्कार जीत चुकी हैं और अब यह नया सम्मान उनके लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है. 

कौन हैं मंगला कपूर 

मंगला कपूर जी का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था. जब वो सिर्फ 12 साल की छोटी थी तब साल 1965 में उनके साथ एक बड़ा हादसा हुआ. उन पर किसी ने एसिड अटैक कर दिया. ये हमला बहुत बुरी तरह से हुआ. उनके चेहरे और शरीर पर गंभीर जलन हुई. उन्हें 6 साल तक लगातार अस्पताल में रहना पड़ा. इस दौरान उनके शरीर पर 36 से ज्यादा ऑपरेशन (सर्जरी) हुए. चेहरा और शरीर बहुत प्रभावित हुआ, समाज में लोग ताने मारते थे, देखकर अजीब नजरों से देखते थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. 

संघर्ष के बाद संगीत की राह

इतने बड़े हादसे के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. वो शास्त्रीय संगीत (क्लासिकल म्यूजिक) की छात्रा बनी. वो ग्वालियर घराने की प्रसिद्ध गायिका हैं. ग्वालियर घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक बहुत पुरानी और सम्मानित शैली है. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में संगीत विभाग में पढ़ाया. वहां वो प्रोफेसर के पद तक पहुंचीं और रिटायर होने तक बहुत सारे छात्रों को संगीत सिखाया. उन्होंने न सिर्फ गाना सीखा और गाया, बल्कि संगीत को आगे बढ़ाने में बहुत योगदान दिया। कई लोग उन्हें एक प्रेरणा मानते हैं. 

खुद को नहीं हुआ विश्वास 

2026 के गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित करने का ऐलान किया है. ये सम्मान उनके संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए मिल रहा है. वो कहती हैं, 'मुझे विश्वास नहीं हो रहा था. फोन आने शुरू हुए तो लगा सच में हो रहा है. मैं बहुत खुश हूं, शब्दों में बयान नहीं कर सकती.' उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के शब्दों ने उन्हें बहुत हौसला दिया. वो सभी लोगों को धन्यवाद दे रही हैं जिन्होंने उनके साथ खड़े रहे. 

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