मेरठ का 'नाई' निकला पाकिस्तान का एजेंट! QR कोड से लेता था पैसे, यूपी ATS ने ऐसे फोड़ी बड़ी आतंकी साजिश

यूपी एटीएस ने भारत में सक्रिय एक खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो पाकिस्तान से संचालित हो रहा था. यह गिरोह आगजनी, रेकी और अस्थिरता फैलाने की साजिश रच रहा था. समय रहते कार्रवाई कर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी आतंकी योजना को नाकाम कर दिया.

By :  मोहम्मद रज़ा
Updated On : 3 April 2026 9:20 PM IST

भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे खतरनाक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो देश के भीतर बैठकर पाकिस्तान से संचालित हो रहा था. इस गिरोह का मकसद सिर्फ आगजनी या तोड़फोड़ नहीं, बल्कि भारत में डर और अस्थिरता फैलाना था. यूपी एटीएस की कार्रवाई ने एक बड़े आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया.

सोशल मीडिया के जरिए जुड़े इस गिरोह के सदस्य न सिर्फ संवेदनशील ठिकानों की रेकी कर रहे थे, बल्कि आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देकर उसके वीडियो पाकिस्तान भेजते थे और बदले में QR कोड के जरिए पैसे लेते थे. इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड मेरठ का रहने वाला साकिब उर्फ 'डेविल' बताया जा रहा है.

क्या था इस गिरोह का पूरा नेटवर्क और प्लान?

इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य भारत के महत्वपूर्ण संस्थानों, रेलवे सिस्टम, वाहनों और राजनीतिक हस्तियों की रेकी कर उनकी जानकारी पाकिस्तान के हैंडलर्स तक पहुंचाना था. इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से इन ठिकानों को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची जा रही थी.

कौन है इस गिरोह का सरगना ‘डेविल’?

गिरोह का मास्टरमाइंड साकिब उर्फ ‘डेविल’ मेरठ में नाई का काम करता था, लेकिन डिजिटल दुनिया में वह टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ा हुआ था.

कैसे सोशल मीडिया बना साजिश का हथियार?

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पाकिस्तान के हैंडलर्स से निर्देश लेता था. उन्हें ओसामा बिन लादेन, गजवा-ए-हिंद और कश्मीर मुजाहिदीन जैसे कट्टरपंथी नैरेटिव से प्रभावित कर उकसाया जा रहा था.

कौन-कौन थे इस साजिश में शामिल?

एटीएस ने इस मामले में कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं-

  1. साकिब उर्फ डेविल (सरगना)
  2. विकास गहलोत उर्फ रौनक (नोएडा)
  3. लोकेश उर्फ पपला पंडित उर्फ बाबू उर्फ संजू
  4. अरबाब (साकिब का गांव निवासी)

कहां-कहां की गई रेकी और क्या था टारगेट?

गिरोह ने गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ में कई संवेदनशील ठिकानों की रेकी की थी. इनमें रेलवे सिग्नल बॉक्स, प्रतिष्ठित संस्थान और राजनीतिक लोगों के वाहन शामिल थे. इन सभी की वीडियो रिकॉर्डिंग कर पाकिस्तान भेजी गई थी.

लखनऊ में क्या बड़ी साजिश रची जा रही थी?

जांच में सामने आया कि साकिब और उसके साथी लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास रेलवे सिग्नल और अन्य संपत्तियों को आगजनी और विस्फोट से उड़ाने की योजना बना रहे थे. हालांकि, इससे पहले ही एटीएस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें दबोच लिया.

पैसे कैसे मिलते थे और क्या बरामद हुआ?

आरोपी आगजनी और रेकी के वीडियो भेजने के बाद QR कोड के जरिए पैसे लेते थे.

एटीएस ने इनके पास से-

ज्वलनशील पदार्थ से भरा केन

7 स्मार्टफोन

24 पंपलेट

बरामद किए हैं.

क्या था इस साजिश का असली मकसद?

इस गिरोह का मकसद सिर्फ नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि देश में डर का माहौल बनाना और आर्थिक रूप से भारत को कमजोर करना था.

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