ईरान नेवी ने पकड़ा, 50 दिन तक जेल में रहे और अब 1800 किमी का सफर तय कर पहुंचे भारत: कहानी गाजियाबाद के केतन मेहता की
Ghaziabad के DLF इलाके में आज खुशियां लौटी हैं… इन खुशियों के पीछे छिपी है मर्चेंट नेवी इंजीनियर Ketan Mehta के 100 दिनों की एक ऐसी कहानी, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं.
गाजियाबाद के केतना मेहता की ईरान जेल से रेस्क्यू की रोमांचक कहानी
Ghaziabad के DLF Colony में आज खुशियों का माहौल है. करीब 100 दिनों के बाद मर्चेंट नेवी इंजीनियर Ketan Mehta सुरक्षित घर लौट आए हैं, लेकिन उनकी वापसी के पीछे समंदर, गिरफ्तारी, जेल और जंग जैसे हालात से गुजरने की बेहद डरावनी कहानी छुपी है.
8 दिसंबर को अरब सागर में सब कुछ सामान्य था. केतन मेहता अपने जहाज पर ड्यूटी कर रहे थे, तभी अचानक Iran Navy ने जहाज को चारों तरफ से घेर लिया... कुछ ही देर में गोलीबारी की आवाजें सुनाई देने लगीं... और जहाज पर मौजूद 18 क्रू मेंबर्स को हिरासत में ले लिया गया. इनमें ज्यादातर भारतीय थे. सभी को गन प्वाइंट पर Jask Naval Base ले जाया गया, जहां उन पर डीजल तस्करी का आरोप लगाया गया.
कितने दिन जेल में रहे केतन मेहता?
इसके बाद केतन समेत 10 लोगों को Bandar Abbas Central Jail भेज दिया गया. करीब 50 दिनों तक वे जेल में रहे. इस दौरान परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ. न ही रिहाई की कोई जानकारी दी गई. रिहाई की कोई जानकारी नहीं, हर दिन अनिश्चितता और डर... 3 फरवरी को कुछ लोगों को छोड़ा गया, लेकिन केतन की रिहाई 27 फरवरी को हुई...
केतन मेहता
जेल से निकले… लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ
जेल से रिहा होने के बाद भी केतन को आजादी नहीं मिली. उन्हें होटल में रखा गया, जहां करीब 25 दिनों तक वे फंसे रहे. इसी दौरान इलाके में तनाव बढ़ गया.
केतन ने क्या कहा?
केतन के मुताबिक, "होटल में बैठे-बैठे बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं. हर पल डर था कि हालात और बिगड़ सकते हैं. इस दौरान भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में था. आखिरकार 1800 किलोमीटर का खतरनाक रेस्क्यू मिशन शुरू हुआ." आखिरकार रेस्क्यू प्लान तैयार हुआ. केतन और अन्य लोगों को बंदर अब्बास से जोल्फा ले जाया गया. वहां से Armenia बॉर्डर पार कराया गया... फिर Dubai होते हुए भारत लाया गया.
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27 मार्च को केतन Mumbai पहुंचे और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब घर पहुंचे तो भावुक दृश्य देखने को मिला. मां ने बेटे को गले लगाया. बहन की आंखों में आंसू थे. यह सिर्फ वापसी नहीं, बल्कि एक जंग जीतने जैसा पल था.
परिवार ने भी नहीं मानी हार
इस दौरान केतन की बहन शिवानी ने Jantar Mantar पर प्रदर्शन कर सरकार तक आवाज पहुंचाई. लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार केतन की सुरक्षित वापसी संभव हो पाई. अब केतन मेहता ने भारत सरकार, भारतीय दूतावास और मीडिया का धन्यवाद किया है. केतन मेहता की यह कहानी याद दिलाती है कि समंदर से लेकर जेल तक… जिंदगी कभी भी करवट ले सकती है.