SIR के फेर में दिग्गज भी फंसे! पहचान साबित करना बना चुनौती, अरुण प्रकाश, अमर्त्य सेन और मोहम्मद शमी को क्यों भेजे गए नोटिस?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विवाद और गहरा गया है. क्रिकेटर मोहम्मद शमी और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बाद अब भारत के पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को भी चुनाव आयोग ने पहचान साबित करने का नोटिस भेजा है. फॉर्म भरने के बावजूद व्यक्तिगत सत्यापन की मांग पर सवाल उठ रहे हैं. यह मामला SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और व्यावहारिकता पर बहस को तेज कर रहा है.;
देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया जहां पूरी हो चुकी है, वहीं कई राज्यों में यह अभी जारी है. इस प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को दुरुस्त करना है, लेकिन इसके तरीकों पर अब सवाल उठने लगे हैं. आम लोगों के साथ-साथ देश की जानी-मानी हस्तियां भी पहचान सत्यापन के नोटिस पाने लगी हैं. यही वजह है कि SIR अब तकनीकी प्रक्रिया से आगे बढ़कर सियासी और सामाजिक बहस का मुद्दा बन गया है.
क्रिकेटर मोहम्मद शमी और अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के बाद अब भारत के पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को भी SIR के तहत नोटिस भेजा गया है. चुनाव आयोग ने उनसे अपनी पहचान दोबारा साबित करने को कहा है. यह नोटिस ऐसे व्यक्ति को भेजा गया है, जो न सिर्फ देश की सर्वोच्च सैन्य जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, बल्कि दशकों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं.
पूरा फॉर्म भरने के बाद भी बुलावा
एडमिरल अरुण प्रकाश ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने SIR फॉर्म में मांगी गई सारी जानकारियां पहले ही भर दी थीं. इसके बावजूद चुनाव आयोग की ओर से दोनों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पहचान साबित करने को कहा गया. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर फॉर्म में दी गई जानकारी पर्याप्त नहीं थी, तो पहले ही उसे स्पष्ट क्यों नहीं किया गया. यह स्थिति आम मतदाताओं के लिए और भी कठिन हो सकती है.
सोशल मीडिया पर उठाई प्रक्रिया पर आपत्ति
एडमिरल प्रकाश ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कभी किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं मांगी. उनका और उनकी पत्नी का नाम गोवा की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 2026 में शामिल है, फिर भी नोटिस आना हैरान करने वाला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आयोग के निर्देशों का पालन करेंगे, लेकिन प्रक्रिया में सुधार जरूरी है.
दो तारीखें, लंबी दूरी और असुविधा
पूर्व नेवी चीफ ने यह भी बताया कि उन्हें और उनकी पत्नी को अलग-अलग तारीखों पर करीब 18 किलोमीटर दूर उपस्थित होने के लिए कहा गया है. वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह व्यवस्था असुविधाजनक है. उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि SIR फॉर्म और सत्यापन की प्रक्रिया को और व्यावहारिक बनाया जाए. उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.
एक सम्मानित सैन्य करियर का संदर्भ
एडमिरल अरुण प्रकाश केवल पूर्व नेवी चीफ ही नहीं रहे हैं, बल्कि वे 1971 के युद्ध से जुड़े वीरता पुरस्कार विजेता भी हैं. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम पदों पर सेवाएं दी हैं. ऐसे व्यक्ति से भी पहचान साबित करने की मांग होने पर लोग सवाल कर रहे हैं कि फिर आम नागरिकों के साथ क्या स्थिति होगी. यही वजह है कि यह मामला प्रतीकात्मक बन गया है.
पहले भी विवादों में रहा SIR
इससे पहले अमर्त्य सेन को भेजे गए नोटिस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आपत्ति जताई थी. वहीं मोहम्मद शमी और उनके भाई के SIR फॉर्म में कथित गड़बड़ियों के बाद उन्हें भी बुलाया गया था. इन मामलों ने SIR की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पहचान सत्यापन बनाम भरोसे की परीक्षा
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना है, लेकिन जिस तरह से नामी हस्तियों को भी बार-बार नोटिस भेजे जा रहे हैं, उससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है. सवाल यह नहीं कि पहचान साबित की जाए या नहीं, बल्कि यह है कि प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और व्यावहारिक है. एडमिरल अरुण प्रकाश का मामला अब सिर्फ एक नोटिस नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की समीक्षा की मांग बन चुका है.