अश्लील बातें, छुट्टी मांगने पर गाली देकर मारना! महिला कांस्टेबल ने थाना प्रभारी पर लगाए गंभीर आरोप

बस्ती से सामने आया एक मामला पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. यहां एक महिला कांस्टेबल ने अपने ही थाना प्रभारी पर उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं.;

Basti police Female constable

(Image Source:  X/ @azizkavish )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On : 19 Feb 2026 2:56 PM IST

उत्तर प्रदेश के बस्ती से सामने आया एक मामला पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. यहां एक महिला कांस्टेबल ने अपने ही थाना प्रभारी पर उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं. इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पुलिस महकमे के भीतर भी हलचल मचा दी है.

आरोप लगाने वाली महिला कांस्टेबल मेनका चौहान ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के तहत कार्यरत पुरानी बस्ती थाने के एसओ दिनेश चंद्र चौधरी उन पर निजी तौर पर संपर्क करने और जीजा कहकर पुकारने के लिए दबाव बना रहे थे. मामला सामने आने के बाद महिला कर्मियों की सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है.

क्या हैं महिला कांस्टेबल के आरोप?

मेनका चौहान का आरोप है कि थाना प्रभारी उनसे उनके निजी नंबर पर बात करने के लिए दबाव डालते थे और उन्हें जीजा कहकर संबोधित करने को कहते थे. उन्होंने इसे अनुचित और अपमानजनक व्यवहार बताया है. कांस्टेबल के अनुसार, जब उन्होंने अपनी मां की बीमारी का हवाला देकर छुट्टी मांगी, तो एसओ ने न केवल छुट्टी देने से इनकार किया, बल्कि अभद्र भाषा का प्रयोग किया. आरोप है कि उन्होंने उन्हें मारने के लिए दौड़ाया और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया.

क्या अन्य महिला कर्मियों के साथ भी करता है हरकत?

महिला कांस्टेबल ने यह भी आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी का व्यवहार थाने की अन्य महिला कर्मियों के प्रति भी ऐसा ही रहता है उनका कहना है कि वे महिला स्टाफ से अश्लील बातचीत की इच्छा रखते हैं, जिससे थाने का माहौल प्रभावित होता है.

सोशल पर उठ रहे सवाल

सोशल मीडिया पर भी अब ये मामला गरमा गया है. एक यूजर ने कमेंट करके लिखा कि 'अगर किसी महिला कांस्टेबल के साथ छुट्टी मांगने पर गाली-गलौज, धमकी या “पर्सनल नंबर” पर अशोभनीय बातचीत का दबाव डाला गया है, तो यह सिर्फ बदसलूकी नहीं बल्कि सत्ता का दुरुपयोग है.'

दूसरे यूजर ने लिखा कि 'यह एक खबर नहीं है समाज की वास्तविकता है लगभग हर सेक्टर में ऐसे लोग हैं जो मानसिक रूप से औरतों के लिए शोषण वाला भाव रखते हैं, ऐसी घटनाएं हमें समाज का असली चेहरा दिखाती हैं, इसमें सस्पेंड से जादा कुछ नहीं होगा,और कल फिर कोई ऐसी मानसिकता का शिकार होगा, लोग सरकार के भरोसे है, शर्मनाक.'

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