अजमेर जेल 'ब्रेक' नहीं, दीवारों के पीछे इंसाफ के लिए 'फेविक्विक मर्डर' का बदला, किलर चीखा: मासूम को क्यों तड़पाया?

राजस्थान के अजमेर सेंट्रल जेल में कोई जेलब्रेक नहीं हुआ, लेकिन कानून और इंसाफ की दीवारें जरूर दरक गईं. मामला यह है कि एक अपराधी ने दूसरे क्रिमिनल द्वारा एक मासूम का फेविक्विक से मुंह चिपकाकर मर्डर करने के आरोपी पर जान लेवा हमला बोलना है. इस वारदात ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. किलर का सवाल 'फेविक्विक किलर' से पूछा मासूम को तड़पाकर क्यों मारा?;

( Image Source:  ajmer jail facebook )
By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 20 Jan 2026 5:29 PM IST

राजस्थान के जिस अजमेर जेल को सुधारगृह कहा जाता है, वही अगर इंसाफ की कब्रगाह बन जाए तो सवाल सिर्फ एक हत्या का नहीं रह जाता.अजमेर सेंट्रल जेल में हुआ ये मामला कोई आम जेल क्राइम नहीं है. यहां न कोई हथियार तस्करी हुई, न दीवार टूटी, यहां इंसान को सांस लेने से रोका गया. फेविक्विक जैसी आम चीज को मौत का हथियार बनाकर जिस तरह कैदी की जान लेने की कोशिश की गई, उसने देश को झकझोर दिया. सबसे डरावनी बात यह है कि आरोपी खुद चीख भी रहा है. “मासूम को तड़पाकर क्यों मारा?” तो फिर सवाल उठता है - जेल में असल कातिल कौन है? कैदी या सिस्टम?

अजमेर जेल में क्या हुआ?

दरअसल, अजमेर सेंट्रल जेल के भीतर एक कैदी ने दूसरे कैदी पर जानलेवा हमला बोल दिया. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया. जबकि अजमेर जेल हाई-सिक्योरिटी अजमेर सेंट्रल जेल (Ajmer Central Jail) हैं, लेकिन वह इस घटना को लेकर बार सुर्खियों में है. इसकी वजह जेल ब्रेक नहीं, बल्कि जेल की दीवारों के पीछे गूंजा 'इंसाफ' का खौफनाक का खतरनाक खेल है. चौंकाने वाली बात यह है कि इंसाफ करने वाला खुद क्रिमिनल है और जेल में बंद. उसी ने दूसरे कैदी पर इसलिए सुनियोजित तरीके हमला बोल दिया कि उसने एक मासूम बच्चे की तड़पाकर हत्या की थी. हत्या का आरोप लगाते हुए, उसे जान से मारने की कोशिश की. यह हमला इतना सुनियोजित था कि हमलावर ने जेल के भीतर ही अपना हथियार तैयार किया था.

जेल कर्मचारियों के अनुसार यह घटना अजमेर सेंट्रल जेल के वार्ड नंबर 13 में 19 जनवरी की दोपहर की ळै. विचाराधीन कैदी दीपक सैनी अपने साथी कैदियों के साथ शतरंज के खेल में मशगूल था. तभी वहां हिनेश पहुंचता है. दीपक को देखते ही हिनेश का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उसने बैरक में मौजूद सभी कैदियों के सामने दीपक के पुराने गुनाहों का हिसाब मांगना शुरू कर दिया.

तू राक्षस है, जेल में रहने का अधिकार नहीं

हिनेश ने दीपक पर चिल्लाते हुए कहा- 'तूने एक मासूम बच्चे के मुंह में फेविक्विक डालकर उसकी निर्मम हत्या की थी. तू राक्षस है, तुझे जेल में रहने का और जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है.' इस सनसनीखेज आरोप ने वहां मौजूद कैदियों और प्रहरियों को सन्न कर दिया. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, हिनेश ने हमला कर दिया. हिनेश के पास लोहे का धारदार हथियार था, जिससे उसने दीपक के चेहरे पर वार कर दिया. हमला इतना सटीक था कि दीपक के बाएं गाल पर गहरा घाव हो गया और वह मौके पर ही खून से लथपथ हो गया. जेल प्रहरी मुकेश जाट और अन्य कैदियों ने तुरंत बीच-बचाव किया, वरना हिनेश दीपक की जान ले लेता.

घायल कैदी अस्पताल में भर्ती

घायल कैदी दीपक सैनी को तत्काल जेल डिस्पेंसरी ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल रेफर कर दिया गया. सिविल लाइन थाना पुलिस ने जेल प्रहरी की शिकायत पर आरोपी कैदी हिनेश के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. आगे की कार्रवाई जारी है.

जेल प्रशासन कटघरे में

सवाल यह है कि सीसीटीवी, वार्डन, बैरक निगरानी होने के बावजूद इतनी बेरहमी कैसे हुई? क्या यह सिर्फ हत्या की कोशिश है या जेल के भीतर पनपती माफिया संस्कृति का नतीजा? यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल है. लोग कह रहे हैं, “अगर जेल में भी इंसाफ सुरक्षित नहीं, तो बाहर कौन बचेगा?” ठीक वैसे ही जैसे पहले तिहाड़ और नैनी जेल के मामलों पर देश उबला था.

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