जब बाल-बाल बची थी BJP के नए अध्यक्ष नितिन नबीन की जान, जानिए झारखंड में हुए हमले की पूरी कहानी
बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का रांची से रिश्ता सिर्फ जन्मस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी ज़िंदगी के सबसे अहम मोड़ों का साक्षी यही शहर रहा है. यहीं उनका जन्म हुआ, यहीं उन्होंने बीआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, यहीं उनका परिवार बसा और यहीं उनकी शादी भी हुई.;
झारखंड की राजधानी रांची से भी भाजपा के अध्यक्ष नितिन नबीन का कनेक्शन रहा है. रांची नितिन नबीन के लिए सिर्फ एक भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि उनकी ज़िंदगी की कहानी का अहम अध्याय है. यहीं उनका जन्म हुआ, यहीं बचपन की यादें बनीं और यहीं उन्होंने अपने भविष्य की नींव रखी. यही वह शहर है जहां पढ़ाई ने दिशा दी, परिवार ने संबल दिया और ज़िंदगी ने ऐसे इम्तिहान भी लिए, जिन्होंने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया. आज जब नितिन नबीन देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं, तो रांची से जुड़ी उनकी कहानी अपने आप में एक संघर्षगाथा बन जाती है.
रांची उनके जीवन में बार-बार लौटकर आती रही है. कभी छात्र के रूप में, कभी परिवार के सदस्य के तौर पर और कभी एक राजनेता के रूप में. यह शहर उनके लिए सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि उन फैसलों का गवाह है, जिन्होंने उनकी सोच और राह दोनों बदल दी.
बीआईटी से की बीटेक की पढ़ाई
नितिन नबीन का जन्म रांची में हुआ, लेकिन शुरुआती पढ़ाई उन्होंने पटना में पूरी की. उच्च शिक्षा के लिए वे फिर रांची लौटे और यहां के प्रतिष्ठित बीआईटी (BIT) से बीटेक किया. परिवार की इच्छा थी कि वे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाएं और एक अलग प्रोफेशनल करियर बनाएं. उनके पिता भी यही चाहते थे और इसकी तैयारी भी चल रही थी. लेकिन पिता के आकस्मिक निधन ने सब कुछ बदल दिया. जिस मोड़ पर ज़िंदगी को तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय दिशा लेनी थी, वहीं से राजनीति का रास्ता खुल गया. यह बदलाव अचानक था, लेकिन इसी ने नितिन नबीन के जीवन को एक नई पहचान दी.
परिवार, अपनापन और रांची की घरेलू यादें
रांची में आज भी नितिन नबीन के मामा संजय कुमार सिन्हा और मामी सविता श्रीवास्तव रहते हैं. परिवार के लिए उनका बीजेपी अध्यक्ष बनना गर्व का क्षण है. मामा बताते हैं कि नितिन शुरू से ही मेहनती और अनुशासित रहे, लेकिन कभी यह नहीं जताया कि वे इतनी ऊंचाई तक पहुंचेंगे. जब भी नितिन नबीन रांची आते हैं, घर का माहौल वही पुराना अपनापन लिए होता है. मामी उनके खाने-पीने का खास ख्याल रखती हैं. नॉनवेज, सत्तू पराठा और पकौड़ी ये सब आज भी उनकी पसंद में शामिल हैं. पद और जिम्मेदारी बढ़ने के बावजूद, रांची में वे आज भी वही परिवार वाले नितिन रहते हैं.
जहां शादी हुई, वहीं यादें बस गईं
नितिन नबीन की शादी भी रांची से ही जुड़ी है. अशोक नगर में उनका विवाह हुआ, जबकि लड़का और लड़की दोनों पक्ष बिहार से थे. फिर भी शादी के लिए रांची को ही चुना गया. यह फैसला भी इस बात का संकेत था कि यह शहर उनके जीवन में कितनी गहराई से रचा-बसा है. शादी के बाद भी रांची उनके लिए सिर्फ ससुराल या रिश्तेदारों का शहर नहीं रहा, बल्कि निजी खुशी और पारिवारिक यादों का ठिकाना बन गया. यही वजह है कि वे जब भी रांची आते हैं, शहर उनके लिए भावनाओं से भरा रहता है.
हिंसा की वह रात, जब मौत बहुत करीब थी
रांची की सबसे डरावनी याद 10 जून 2022 की है. उस दिन शहर में अचानक हिंसा भड़क उठी थी. पत्थरबाज़ी, आगजनी और गोलियों की आवाज़ें पूरा माहौल दहशत में था. उसी दौरान रांची की मुख्य सड़क से एक बड़ी कार गुजर रही थी, जिस पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया. कार के शीशे टूट गए और अंदर बैठे लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश हुई. थोड़ी देर बाद पुलिस पहुंची और हालात काबू में आए. जांच में पता चला कि उस कार में नितिन नबीन मौजूद थे, जो किसी कार्यक्रम में शामिल होने रांची आए थे.
बाल-बाल बची जान
यह खबर जब परिवार तक पहुंची, तो मामी सविता श्रीवास्तव आज भी उस पल को याद कर सिहर उठती हैं. गनीमत रही कि नितिन नबीन इस हमले में सुरक्षित बच गए, हालांकि उनकी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी. बताया जाता है कि वे उस समय अपनी शादी की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर रांची आए थे. यह घटना न सिर्फ एक हिंसक याद बनकर रह गई, बल्कि नितिन नबीन के लिए भी ज़िंदगी को एक नए नजरिए से देखने का कारण बनी. मौत को इतनी नज़दीक से देखने के बाद, जिम्मेदारी और भी गहरी हो गई.
सिर्फ यादें नहीं, पहचान का हिस्सा
पढ़ाई, परिवार, शादी और हिंसा- रांची नितिन नबीन की ज़िंदगी के हर अहम पड़ाव से जुड़ा रहा है. यह शहर उनके लिए केवल अतीत नहीं, बल्कि उस अनुभव का नाम है जिसने उन्हें मजबूत बनाया. जब वे आज राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर हैं, तब भी रांची से जुड़ी यह कहानी उनके व्यक्तित्व को और गहराई देती है.