कौन लड़ सकता है झारखंड नगर निकाय चुनाव, किन वजहों से कट सकता है नामांकन? जानिए पूरे नियम

झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 और राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत नगर निकाय चुनावों के लिए स्पष्ट और सख्त प्रावधान किए गए हैं.;

Jharkhand Municipal Election

(Image Source:  AI: Sora )
Edited By :  विशाल पुंडीर
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झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. चुनाव की घोषणा होते ही आम लोगों और संभावित उम्मीदवारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए कौन पात्र है और किन परिस्थितियों में किसी की उम्मीदवारी खारिज हो सकती है

क्या हर मतदाता पार्षद, अध्यक्ष या मेयर का चुनाव लड़ सकता है? या फिर इसके लिए कुछ खास नियम और शर्तें तय की गई हैं? दरअसल, झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 और राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत नगर निकाय चुनावों के लिए स्पष्ट और सख्त प्रावधान किए गए हैं, जिनका पालन करना हर उम्मीदवार के लिए अनिवार्य है.

वार्ड पार्षद बनने के लिए क्या हैं शर्तें?

नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत में वार्ड पार्षद पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना जरूरी है. इसके साथ ही उम्मीदवार का नाम उसी वार्ड की विधानसभा मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है. उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है. हालांकि, शिक्षा को लेकर कोई न्यूनतम योग्यता निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन नामांकन के समय शपथ पत्र में अपनी शैक्षणिक जानकारी देना अनिवार्य होगा.

टैक्स बकाया है तो नामांकन खारिज

नगर निकाय चुनाव में एक बेहद अहम शर्त यह भी है कि उम्मीदवार पर नामांकन वर्ष से पहले के वित्तीय वर्ष के अंत तक नगर निकाय का कोई भी कर, शुल्क या किराया बकाया नहीं होना चाहिए. यदि टैक्स बकाया पाया गया, तो नामांकन सीधे खारिज किया जा सकता है.

प्रस्तावक और समर्थक की भूमिका क्यों अहम?

वार्ड पार्षद चुनाव में प्रस्तावक और समर्थक दोनों का उसी वार्ड का पंजीकृत मतदाता होना अनिवार्य है। जो व्यक्ति मतदाता नहीं है, वह न तो उम्मीदवार बन सकता है और न ही किसी अन्य प्रत्याशी का प्रस्तावक या समर्थक. यह नियम स्थानीय प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से रखा गया है.

महापौर और अध्यक्ष पद के लिए अलग नियम

महापौर या नगर पालिका/नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 30 वर्ष तय की गई है. उम्मीदवार का नाम पूरे नगर निकाय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए. नागरिकता, टैक्स भुगतान और अन्य योग्यताएं वही हैं, जो वार्ड पार्षद के लिए लागू होती हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इन पदों के लिए प्रस्तावक और समर्थक किसी भी वार्ड के मतदाता हो सकते हैं.

सबसे चर्चित नियम

झारखंड नगर निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा दो-संतान नीति को लेकर होती है. यह नियम झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 18 के तहत लागू है. नियम के अनुसार, यदि 9 फरवरी 2013 के बाद किसी उम्मीदवार की तीसरी संतान का जन्म हुआ है, तो वह नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा.

हालांकि, जिन उम्मीदवारों की दो से अधिक संतान 9 फरवरी 2013 से पहले पैदा हो चुकी है, उन्हें छूट दी गई है. इस गणना में गोद ली गई संतान और जुड़वा बच्चे भी शामिल किए जाते हैं. उम्मीदवार को इसकी पूरी जानकारी शपथ पत्र में देना अनिवार्य है. गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

किन कारणों से अयोग्य हो सकता है उम्मीदवार?

1. भारतीय नागरिक न होना

2. तय न्यूनतम आयु पूरी न करना

3. मतदाता सूची में नाम दर्ज न होना

4. किसी आपराधिक मामले में 6 महीने से अधिक की सजा पाई हो

5. किसी आपराधिक मामले में फरार होना

6. सरकार या स्थानीय निकाय के अधीन वेतनभोगी पद पर होना

7. नगर निकाय का टैक्स बकाया होना

8. दिवालिया या मानसिक रूप से अक्षम घोषित होना

9. भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने पर 6 साल तक प्रतिबंध

10. एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना

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