उसके कत्ल पे मैं भी चुप था! 10 साल के Abhinav Arora ने परिवार के साथ हुए हादसे पर कह दी बड़ी बात
दिल्ली के तिलक नगर में रोडरेज की घटना में बाल संत अभिनव अरोड़ा के परिवार की कार पर भीड़ ने हमला कर दिया, जिसमें उनके पिता घायल हो गए. घटना के बाद वीडियो वायरल हुआ, पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
बीते 7 अप्रैल 2026 की रात दिल्ली के तिलक नगर में रोडरेज की घटना में बाल कथावाचक अभिनव अरोड़ा (Abhinav Arora) के परिवार की कार पर भीड़ ने हमला कर दिया. गाड़ी के शीशे तोड़े गए, पिता तरुण राज अरोड़ा घायल हुए कार के अंदर दहशत में था. अभिनव ने खुद इस वीडियो को अपने इंस्टाग्राम,(@abhinavaroraofficial) पर शेयर किया और एक बेहद इमोशनल पोस्ट शेयर किया. जिसके बाद उनके फॉलोअर्स का साथ मिला और दुखद समय में अभिनव का समर्थन कर रहे है.
अभिनव ने लिखा, 'जलते घर को देखने वालो, फूस का छप्पर आप का है… आग के पीछे तेज़ हवा है, आगे मुक़द्दर आप का है. उसके क़त्ल पे मैं भी चुप था, अब मेरा नंबर आया… मेरे क़त्ल पे आप भी चुप हैं, अगला नंबर आप का है.' उन्होंने साफ-साफ कहा कि यह किसी समुदाय या धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है. कुछ लोगों ने सिख समुदाय का नाम लिया था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया और सिख भाई-बहनों के प्रति सम्मान जताया. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.
क्या बताया अभिनव के पिता ने?
हालांकि हमले के बाद अभिनव के पिता तरुण अरोड़ा का भी बयान सामने आया. जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उनकी कार को एक परिवार ले 6 लोगों ने हमला किया. ANI को दिए इंटरव्यू में तरुण अरोड़ा ने कहा, 'गुरूवार वह अपनी भतीजी को हॉस्टल छोड़कर घर लौट रहे थे. तभी तिलक नगर में कड़ी बुलेट को उनकी कार हल्का टच कर गई. बाइक के पास छोटा बच्चा था. जिससे बच्चे की मां को ग़लतफहमी हो गई कि बच्चे को चोट लगी है. जबकि सीटीवी में देखने में पता चला कि तरुण की बुलेट से एक मीटर की दूरी पर थी. ग़लतफहमी का शिकार हुए परिवार ने तरुण की कार पर हमला बोला नुकीले हथियार और पत्थरों से कार के शीशे तोड़ दिए गए.'
तरुण पर शराब पीने का आरोप
तरुण का कहना है कि ऐसे हालात में उन्होंने खुद को कार में लॉक रखा और 112 पर पुलिस को बुलाया गया. जिसके बाद पुलिस दोनों पक्षों को मेडिकल कराने के लिए ले गई क्योंकि तरुण पर आरोप था कि उन्होंने शराब पी रखी है. वहीं हमलावार पक्ष का आरोप था कि कार की वजह से बच्चे के पैर फ्रैक्चर हुआ है. हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में न तो तरुण का अलकोहल निकला न ही बच्चे को कोई खरोच आई थी. वहीं ज्यादातर लोगों का सवाल है कि क्या अभिनव उस वक्त अपने पिता के साथ थे? तो शायद नहीं क्योंकि अब तक उनके पिता ने किसी भी बयान में अभिनव के साथ होने का जिक्र नहीं किया है.
वह कौन हैं?
अभिनव अरोड़ा की उम्र लगभग 10-11 वर्ष है. वह बाल कथावाचक, बाल संत या बालराम के नाम से मशहूर हैं. वे दिल्ली के रहने वाले हैं, लेकिन वृंदावन-मथुरा से गहरा नाता रखते हैं. वे भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त हैं और खुद को कृष्ण का बड़ा भाई बलराम मानते हैं. उनके पिता तरुण राज अरोड़ा बिजनेसमैन और TEDx स्पीकर हैं, माता ज्योति अरोड़ा परिवार की रीढ़ हैं. अभिनव के यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लाखों फॉलोअर्स हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उन्हें भारत का सबसे 'युथ स्पिरिचुअल स्पीकर' कह चुके हैं.
कैसे कथावाचक बने?
मात्र 3 साल की उम्र में उनकी आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई. बचपन से ही वे श्रीकृष्ण-राधा की लीला, भक्ति और सनातन संस्कृति पर प्रवचन देने लगे. स्कूल में पढ़ते हुए भी वे कथा सुनाते थे. सोशल मीडिया पर उनके छोटे-छोटे रील्स और कथाएं वायरल होने लगीं. परिवार ने उनका साथ दिया, लेकिन अभिनव का अपना स्वाभाविक आकर्षण और बोलने का जादू ही उन्हें लाखों तक ले गया. आज वे बड़े-बड़े मंचों पर कथा वाचन करते हैं, लग्जरी गाड़ी में आते हैं, लेकिन उनका मैसेज हमेशा भक्ति, सकारात्मकता और 'मुझे फर्क नहीं पड़ता' वाला आत्मविश्वास भरा रहता है.