फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में कला जागृत हो रही तो उसे क्या कहेंगे! वायरल वीडियो पर बवाल के बाद कृषि मंत्री बोले- फोटो क्यों खींचे?
सूरजपुर जिले के कुम्हेली फॉरेस्ट रेस्ट हाउस का अश्लील डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. मामले में डिप्टी रेंजर और महिला फॉरेस्टर को सस्पेंड किया गया है, जबकि तत्कालीन रेंजर को नोटिस जारी हुआ है. कृषि मंत्री रामविचार नेताम के बयान ने इस केस को राजनीतिक रंग दे दिया है और विपक्ष सरकार पर हमलावर है.;
सूरजपुर जिले के कुम्हेली फॉरेस्ट रेस्ट हाउस से जुड़ा एक पुराना वीडियो अचानक सोशल मीडिया पर सामने आया और देखते ही देखते चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया. वीडियो में बार बालाओं के डांस को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया. मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी रेंजर और एक महिला फॉरेस्टर को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया, जबकि उस समय तैनात रेंजर को नोटिस थमाया गया है. यह मामला अब सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी व्यवस्था और जिम्मेदारी पर भी सवाल उठा रहा है.
वीडियो वायरल होते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया. प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया. सस्पेंशन और नोटिस की कार्रवाई यह संकेत देती है कि प्रशासन अब इस मामले को दबाने के बजाय खुलकर जांच के मूड में है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी रेस्ट हाउस के उपयोग के स्पष्ट नियम हैं और उनके उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद
मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया, जब कृषि मंत्री रामविचार नेताम का बयान सामने आया. कोरिया जिले के बैकुंठपुर में एक शोक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया, तो उन्होंने इसे “कला” के दायरे में रखने की बात कही. मंत्री के इस बयान को कई लोगों ने हल्के-फुल्के अंदाज में लिया, लेकिन विपक्ष ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया. बयान के बाद मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया.
‘कला’ की परिभाषा पर छिड़ी बहस
मंत्री नेताम ने कहा कि कला का क्षेत्र बहुत व्यापक होता है और हर कला को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूलों में डांस होते हैं, भजन-प्रवचन होते हैं और हर जगह कला का स्वरूप अलग होता है. उनका तर्क था कि सिर्फ धार्मिक संदर्भों में ही कला को सीमित नहीं किया जा सकता. इसी बयान ने सामाजिक और राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया.
मीडिया पर सवाल, जांच का भरोसा
मंत्री ने मीडियाकर्मियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वहां जाकर वीडियो बनाने की जरूरत क्यों पड़ी. हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो देखा जाएगा और पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी. इस बयान से यह साफ हुआ कि सरकार एक तरफ जांच की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ बयानबाजी से स्थिति और उलझती जा रही है.
सोशल मीडिया से सियासत तक असर
अब मंत्री का बयान और पूरा मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाकर सरकार पर नैतिकता और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर हमला तेज कर दिया है. वहीं भाजपा के नेता मंत्री के बयान को संदर्भ से अलग बताकर बचाव में उतर आए हैं. कुल मिलाकर, कुम्हेली फॉरेस्ट रेस्ट हाउस का यह मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया की बहस तीनों का केंद्र बन चुका है.