दिल्ली की राह पर नीतीश कुमार? राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार की कुर्सी पर कौन - सम्राट, नित्यानंद राय या कोई और नया चेहरा?
नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के बाद बिहार की राजनीति में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या वह मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली की राजनीति में जाएंगे. अगर ऐसा होता है तो सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और कुछ अन्य नेताओं के नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सामने आ रहे हैं.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते ही राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है. करीब दो दशकों से ज्यादा समय तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे जेडीयू सुप्रीमो अब राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिल्ली जा सकते हैं.
गुरुवार को उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, जिसके बाद यह अटकलें तेज हो गईं कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने सिर्फ चार महीने पहले ही रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं तो बिहार की कमान किसके हाथ में जाएगी.
क्या सम्राट चौधरी और नित्यानंद क्यों आ गए आमने सामने?
अगर बिहार में बीजेपी को मुख्यमंत्री पद मिलता है तो मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. कुशवाहा (ओबीसी) समुदाय से आने वाले सम्राट चौधरी पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी के भीतर तेजी से मजबूत हुए हैं. पार्टी संगठन में उनकी पकड़ और राज्य सरकार में सक्रिय भूमिका ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता बना दिया है. नीतीश कुमार के साथ सरकार चलाने के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अनुभव भी हासिल किया है. बीजेपी के कई नेताओं का मानना है कि उनकी जमीनी पकड़ और संगठनात्मक समर्थन उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाता है.
मुख्यमंत्री पद की चर्चा में एक और बड़ा नाम केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का सामने आ रहा है. राय लंबे समय से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ काम कर रहे हैं और बीजेपी के भीतर उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान है. वह यादव समुदाय से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीजेपी किसी यादव नेता को मुख्यमंत्री बनाती है तो यह विपक्ष के पारंपरिक यादव वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति हो सकती है. फिलहाल यह वोट बैंक काफी हद तक लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की आरजेडी के साथ जुड़ा माना जाता है.
दिलीप जायसवाल और संजीव चौरसिया के नाम क्यों सामने आ रहे हैं?
सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के अलावा बिहार सरकार के मंत्री और पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है. वैश्य (कलवार) समुदाय से आने वाले जायसवाल को संगठन में भरोसेमंद और संतुलित नेता माना जाता है. सीमांचल क्षेत्र, खासकर किशनगंज और आसपास के इलाकों में उनका प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है. इसके अलावा पटना की दीघा सीट से पांच बार विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी कभी-कभी पार्टी के भीतर चर्चा में आता है. वह लंबे समय से बीजेपी से जुड़े रहे हैं और उनके पिता गंगा प्रसाद भी पार्टी के शुरुआती नेताओं में रहे थे, जो बाद में सिक्किम के राज्यपाल बने.
क्या BJP नेतृत्व तय करेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?
हालांकि इन तमाम अटकलों के बीच पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा. पार्टी को बिहार की जटिल जातीय समीकरण, संगठनात्मक मजबूती और आने वाले चुनावों की रणनीति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना होगा. अगर नीतीश कुमार वास्तव में दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक युग के अंत जैसा होगा. ऐसे में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, यह फैसला आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है.
बिहार की राजनीति में क्या बदल सकता है?
अगर नीतीश कुमार वास्तव में दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़े दौर के अंत जैसा माना जाएगा. लंबे समय से राज्य की सत्ता का चेहरा रहे नीतीश के बाद नया नेतृत्व किसके हाथ में आता है, यह आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है.
ऐसे में सबकी नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या नीतीश कुमार वास्तव में दिल्ली की राह पकड़ते हैं और अगर ऐसा होता है तो बिहार की मुख्यमंत्री कुर्सी पर आखिर किसकी ताजपोशी होती है.