Exclusive: BJP ने पांव जमाने के लिए नीतीश से छीनी कुर्सी, पहले से था Rajya Sabha भेज ठिकाने लगाने का प्लान- यशवंत सिन्हा
बिहार की राजनीति और राज्यसभा चुनाव को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने बड़ा बयान दिया है. उनका दावा है कि बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी हासिल करने के लिए भाजपा लंबे समय से ‘साम-दाम-दंड-भेद’ की रणनीति पर काम कर रही है.
Bihar Politics: “प्यार, पॉलिटिक्स और वॉर में सब जायज है. भारतीय जनता पार्टी बिहार की राजनीति में अपने पांव मजबूती से जमाने के लिए इसी कहावत को इन दिनों चरितार्थ कर रही है. हाल ही में निपटे बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तो बीजेपी ने कसम खाकर कमर कस ली थी कि चाहे जैसे भी हो इस बार, बिहार की सत्ता पर बीजेपी कब्जा करने के लिए ‘साम दाम दंड भेद’ सबका इस्तेमाल करने में नहीं शर्माएगी. बिहार के राजनीतिक अखाड़े में यही सब बीजेपी कर भी रही है. यह तमाम अंदर की बातें मैं यूं ही हवा में नहीं कह रहा हूं. यह सब शत-प्रतिशत सच है, बिना किसी यदि-किंतु-परंतु के.
मैं यह सब सच क्यों ठोंक के बयान कर पा रहा हूं. इस सवाल के जवाब में कई प्रमुख पहलू हैं. मसलन, मैं बिहार कैडर का पूर्व ब्यूरोक्रेट (आईएएस) हूं. दूसरे, मैंने बिहार से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की. तीसरे, भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए मैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी (अब स्वर्गीय) की हुकूमत में भारत का विदेश और वित्त मंत्री रहा हूं. चौथा व अंतिम, जब 1995 के दौर में बिहार की राजनीति में अपने पांव जमाने के लिए भारतीय जनता पार्टी दिन-रात जूझकर पसीना बहा रही थी तब, बिहार में बीजेपी के संघर्ष के उन दुर्दिनों में मैं बिहार विधानसभा में बीजेपी की ओर से सदन में विपक्षी दल का नेता था.”
कौन हैं यशवंत सिन्हा?
दो टूक ठोंक कर यह दावेदारी भारतीय जनता पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता और भाजपा की रग-रग से अंदर तक वाकिफ भारत के पूर्व वित्त और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने की है. नई दिल्ली में मौजूद यशवंत सिन्हा “स्टेट मिरर हिंदी” के एडिटर इनवेस्टीगेशन के साथ इस वक्त देश के कई राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों पर होने वाले चुनावों और बिहार की राजनीति में दिल्ली से बिहार तक मची अंदरूनी उठा-पटक पर बेबाक बात कर रहे थे.
बीजेपी का सुख-चैन गायब क्यों
जिक्र जब साल 2026 के इन दिनों 37 राज्य सभा सीटों को भरे जाने के लिए होने वाले चुनावों की करें तो यूं तो हर सीट पर ही चुनाव अहम है. इसके बाद भी मगर जो दिलचस्प चुनाव सीटें हैं उनमें बिहार के मुख्यमंत्री पद से हटाकर राज्यसभा भेजे जा रहे नीतीश कुमार की सीट सबसे ज्यादा चर्चाओं में या कहिए ‘हॉट’ है. क्योंकि बिहार की राजनीति में अपना पांव जमाकर मुख्यमंत्री की सीट पर अपना कंडिडेट सजाने के लिए भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व का बीते 2 दशक से दिन का चैन और रातों की नींद गायब थी.
राज्यसभा चुनाव में सीटों का गणित
राज्यसभा की जिन 37 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया चल रही है उनमें से 11 सीटों पर मतदान होगा, जबकि 26 सीटों पर उम्मीदवारों का ‘निर्विरोध’ चुना जाना तकरीबन तय मानकर चलिए. इनमें से भी ओडिशा, हरियाणा, बिहार की सीटों पर सबसे ज्यादा दिलचस्प मुकाबले की प्रबल संभावनाएं हैं. क्योंकि इन्हीं सीटों पर क्रॉस-वोटिंग का खौफ राजनीतिक दलों को खाए जा रहा है. राज्यसभा की जिन 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक-चुनाव हो रहे हैं उनमें हरियाणा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ की 2-2, महाराष्ट्र की 7, ओडिशा की 4, बिहार की 5, हिमाचल की 1, तमिलनाडु की 6, पश्चिम बंगाल में 5 और असम में 3 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं.
बिहार हॉट क्यों?
इन तमाम सीटों पर होने वाले राज्यसभा सीटों के चुनाव में सबसे ज्यादा गर्मा-गरमी बिहार में नजर आ रही है. क्योंकि यहां से बीते 20 साल से लगातार सूबे में मुख्यमंत्री की सीट पर सजे बैठे और जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार को, सीएम पद से हटाकर राज्यसभा भेजा रहा है. अगर नीतीश कुमार को सीएम पद से हटाकर राज्यसभा न भेजा जाए तो अब भी भारतीय जनता पार्टी को बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी नसीब न होती. लिहाजा साम-दाम-दंड की नीति पर चल रही और बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने को बीते कई दशक से लार टपका रही भारतीय जनता पार्टी के हाथ अब, नीतीश कुमार को सीएम पद से हटाकर ठिकाने लगाते ही, उसका बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने का दूर का सपना अब सच होने जा रहा है.
BJP को अब भी मौका न मिलता तो ...
स्टेट मिरर हिंदी के साथ इस राज्यसभा चुनाव और बिहार की राजनीति में मची उथल पुथल पर विशेष बातचीत करते हुए 1995 में राज्य विधानसभा (बिहार) में नेता-विपक्ष रह चुके यशवंत सिन्हा कहते हैं, “दरअसल अगर नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र आड़े न आती. तो भारतीय जनता पार्टी को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की हसरत पूरी करने का मौका अब भी न मिलता. हां, यह जरूर है कि बिहार की कुर्सी हथियाने के लिए अब जैसे ही बीजेपी को मौका हाथ लगा उसने नीतीश बाबू को राज्यसभा सीट का झुनझुना थमाकर, उन्हें कुर्सी रुपी राजनीतिक खिलौने के रुप में दिल्ली (राज्यसभा) भेजकर चुप करा दिया है.
नीतीश और बीजेपी दोनो खुश कैसे?
नीतीश कुमार को भी यही चाहिए था. क्योंकि वह समझ चुके थे कि बढ़ती उम्र के साथ अब उनका शरीर और दिमाग दोनो ही उस कदर का साथ नहीं दे पा रहे हैं, जैसै कि किसी राज्य के मुख्यमंत्री को सक्रिय राजनीति करने लिए चाहिए होता है. इसलिए मैं यह नहीं कहूंगा कि यहां सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ने ही अपना उल्लू सीधा किया है. यहां नीतीश कुमार और बीजेपी दोनो ही अपना अपना राजनीतिक मसकद-सुख पाने में सफल हो रहे हैं.”
कौन-कौन राज्यसभा की लाइन में हैं..
यहां उल्लेखनीय है कि राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले इन चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (एनडीए) को पांचों सीट पर जीत का पक्का भरोसा है. एनडीए के उम्मीदवारों का अगर जिक्र करूं तो जेडीयू के नीतीश कुमार, राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी (आरएलएम) के उपेंद्र कुशवाहा, भारतीय जनता पार्टी के नव-निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हैं. हालांकि जदयू के और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर तीसरी बार राज्यसभा पहुंचने की जोड़-तोड़ में जुटे हैं. साथ ही भारतीय जनता पार्टी के बिहार राज्य के महासचिव शिवेश कुमार भी राज्यसभा पहुंचने की बाट जोह रहे हैं.