कौन बनेगा CM, किसे मिलेगा डिप्टी CM का ओहदा? Bihar में सत्ता की पूरी इनसाइड स्टोरी

बिहार में CM और डिप्टी CM को लेकर बड़ा सियासी मंथन तेज है. Nitish Kumar के बाद नए नेतृत्व पर NDA में चर्चा जारी है. सम्राट चौधरी समेत कई नाम रेस में हैं और जल्द बड़ा फैसला संभव है.

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Curated By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 9 April 2026 2:53 PM IST

बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि - क्या नीतीश का बतौर सीएम दौर खत्म होने वाला है? करीब दो दशक तक सत्ता में रहने के बाद उनके राज्यसभा जाने और संभावित इस्तीफे की चर्चाओं ने एनडीए खेमे में हलचल तेज कर दी है. मीडिया सूत्रों के मुताबिक 14 अप्रैल के आसपास विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो सकता है, जिससे बिहार की राजनीति का नया अध्याय शुरू होगा. इससे पहले 10 अप्रैल को नीतीश राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेंगे.

क्या नीतीश कुमार सच में इस्तीफा देने वाले हैं?

हालिया घटनाक्रम इस ओर इशारा करते हैं कि उन्होंने धीरे-धीरे सत्ता से दूरी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. विधान परिषद से इस्तीफा, राज्यसभा चुनाव जीतना और दिल्ली की सक्रियता बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उनकी पुरानी इच्छा - विधानमंडल और संसद दोनों में रहने को पूरा करने के साथ-साथ एक सुनियोजित सत्ता हस्तांतरण की तैयारी भी है. नीतीश कुमार का अब जाना तय है.

नए मुख्यमंत्री की रेस में कौन सबसे आगे है?

बिहार की राजनीति के मौजूदा समीकरणों में सम्राट चौधरी का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है. वे फिलहाल उपमुख्यमंत्री हैं और संगठन के साथ-साथ सरकार में भी उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है. ओबीसी समीकरण और युवा नेतृत्व के रूप में उनकी छवि भाजपा के लिए उन्हें सबसे उपयुक्त विकल्प बना सकती है. दूसरे नंबर पर नित्यानंद राय का नाम चल रहा है.

बीजेपी किन अन्य चेहरों पर कर रही मंथन?

बीजेपी सिर्फ एक नाम पर निर्भर नहीं दिख रही, बल्कि कई नेताओं पर विचार कर रही है. नित्यानंद राय को मजबूत संगठनात्मक पकड़ और पिछड़े वर्गों में प्रभाव के कारण गंभीर दावेदार माना जा रहा है. दिलीप जायसवाल प्रशासनिक अनुभव और व्यापारिक वर्ग में पकड़ के चलते चर्चा में हैं. जबकि विजय कुमार सिन्हा साफ-सुथरी छवि और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण विकल्प बने हुए हैं.

क्या महिला भी तय करेंगे सीएम चेहरा?

बिहार की राजनीति में जातीय और सामाजिक संतुलन हमेशा अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में रेणु देवी का नाम महिला और दलित चेहरे के तौर पर उभर रहा है. इसके अलावा संजीव चौरसिया और जनक राम जैसे नेता भी समीकरण साधने में अहम हो सकते हैं, खासकर अगर पार्टी सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देती है. जहां तक डिप्टी सीएम की बात है ​तो निशांत कुमार को जेडीयू कोटे से बनाया जा सकता है. दूसरे डिप्टी सीएम पद पर सम्राट या विजय सिन्हा में से कोई एक बरकरार रहेंगे.

क्या NDA में सब कुछ ठीक है?

आधिकारिक तौर पर गठबंधन में किसी तरह के मतभेद से इनकार किया जा रहा है. नीतिन नबीन ने साफ कहा है कि सभी फैसले सहमति से होंगे और गठबंधन मजबूत है. हालांकि, अंदरखाने यह साफ है कि मुख्यमंत्री पद का चयन बेहद रणनीतिक होगा, क्योंकि यही फैसला आने वाले चुनावों की दिशा तय करेगा.

बिहार की राजनीति किस दिशा में जाएगी?

अगर नीतीश कुमार वास्तव में पद छोड़ते हैं, तो यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि सत्ता संतुलन का बड़ा बदलाव होगा. भाजपा के पास मौका होगा कि वह राज्य में अपना नेतृत्व स्थापित करे, जबकि जेडीयू के लिए यह अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की चुनौती होगी. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि बिहार में नेतृत्व का केंद्र किसके हाथ में जाएगा, लेकिन इतना तय है कि यह फैसला राज्य की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित करेगा.

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