नहीं बंद हो रहा बिहार में जहरीली शराब का कहर, 7 लोगों की मौत, पीड़ितों की गई आंख की रोशनी
बिहार में लागू शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूर्वी चंपारण जिले से जहरीली शराब पीने से अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं.
पूर्वी चंपारण में जहरीली शराब पीने से 7 की मौत
(Image Source: AI SORA )बिहार में शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूर्वी चंपारण में हुए ताजा हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य अस्पताल में भर्ती हैं. इस घटना ने एक बार फिर कानून व्यवस्था और अवैध शराब के बढ़ते नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस दर्दनाक हादसे की सबसे भयावह तस्वीर यह है कि कई पीड़ितों की आंखों की रोशनी चली गई है, जो जहरीली शराब के खतरनाक असर को दिखाती है. मोतीहारी समेत आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है, और लोग इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद मौत का यह धंधा कैसे जारी है.
7 की मौत, 6 की आंखों की रोशन गई
पूर्वी चंपारण में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है. 14 अन्य पीड़ित अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से छह लोगों की आंखों की रोशनी तक चली गई है, जो इस जहरीली शराब के खतरनाक असर को दिखाता है. अस्पताल में इलाज करवा रहे लोगों की पहचान लोहा ठाकुर, रविंद्र यादव, दिनेश यादव, उमेश राम और कुछ अन्य लोगों के रूप में हुई है.
खुशियां मातम में बदलीं
इस हादसे ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है. एक मृतक परीक्षण मांझी के घर में जहां शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है. 13 अप्रैल को होने वाली बेटी की शादी अब टल गई है. यह घटना दिखाती है कि जहरीली शराब सिर्फ जान ही नहीं लेती, बल्कि परिवारों के सपने भी छीन लेती है.
50 रुपये में बिक रही जहरीली शराब
जानकारी के मुताबिक, कई लोगों ने मात्र 50 रुपये में मिलने वाली अवैध शराब खरीदी थी. यही सस्ती शराब उनके लिए जहर साबित हुई. पीड़ितों का कहना है कि उनके साथ शराब पीने वाले कई लोग अब इस दुनिया में नहीं रहे. जांच में सामने आया है कि इलाके में लंबे समय से अवैध शराब की सप्लाई चल रही थी.
बिहार में शराबबंदी के बावजूद बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि जमीनी स्तर पर कानून का पालन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. जब तक अवैध शराब के नेटवर्क पर सख्ती से लगाम नहीं लगाई जाती, तब तक ऐसे हादसे यूं ही लोगों की जान लेते रहेंगे.