रो रहे लोग, 550 परिवारों को हटाया जा रहा; धुबरी में क्यों खाली कराई जा रही करीब 650 बीघा जमीन... क्या है असम सरकार का बेदखली अभियान?
| असम के धुबरी जिले में करीब 4,500 से अधिक लोगों को सरकारी जमीन से हटाया जा रहा है. इसको लेकर लोग सड़कों पर जमा होकर रो रहे हैं. कई घरों के साथ घरों के साथ एक मस्जिद को भी हटाया गया है.
Dhubri Eviction Bulldozer Action
(Image Source: X/ @VoxShadabKhan )असम के पश्चिमी हिस्से में स्थित मुस्लिम बहुल धुबरी जिले में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया गया है. रविवार से मंगलवार तक करीब 550 परिवारों के 4,500 से अधिक लोगों को सरकारी जमीन से हटाया जा चुका है. प्रशासन इस जमीन पर नया इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की तैयारी कर रहा है. अभियान के दौरान कई बुलडोजर लगाए गए, जिनकी मदद से लोगों के घरों के साथ एक मस्जिद और दूसरी इमारतों को भी ढहा दिया गया.
यह कार्रवाई आलमगंज पार्ट IX इलाके में की गई. प्रशासन का कहना है कि इन निर्माणों को सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाया गया था और जमीन पर लंबे समय से कब्जा था. रविवार को जब बुलडोजर से घर और मस्जिद हटाए जाने लगे, तो बड़ी संख्या में प्रभावित लोग मौके पर जमा हो गए और विरोध में नारेबाजी की. मंगलवार तक प्रशासन की ओर से मलबा हटाने का काम जारी रहा.
क्यों हटाया जा रहा है कब्जा?
धुबरी के जिला आयुक्त दिवाकर नाथ ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि प्रशासन ने करीब 650 बीघा यानी 215 एकड़ सरकारी जमीन खाली कराने के लिए अभियान शुरू किया है. उनके मुताबिक, इस इलाके में कुल करीब 800 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था. नाथ ने कहा "करीब 800 बीघा सरकारी ज़मीन पर गैर-कानूनी कब्ज़ा था लेकिन हम 650 बीघा ज़मीन खाली करा रहे हैं क्योंकि बाकी 150 बीघा ज़मीन से जुड़े कुछ केस गुवाहाटी हाई कोर्ट में पेंडिंग हैं."
उन्होंने बताया कि अदालत में मामले लंबित होने के कारण बाकी 150 बीघा जमीन पर फिलहाल कार्रवाई नहीं की जा रही है. जिला आयुक्त का दावा है कि प्रभावित परिवारों में से करीब 80 फीसदी लोगों ने खुद ही अपनी जगह खाली कर दी थी. इसके लिए उन्हें कई महीने पहले नोटिस जारी किए गए थे. कार्रवाई के बाद कई वीडियो ऐसे भी सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं जिनमें मुस्लिम परिवार रोते हुए दिखाी दे रहे हैं.
क्या है हिमंता सरकार का बेदखली अभियान?
धुबरी में हुई यह कार्रवाई असम की बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार के उस अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत जंगलों और दूसरी सरकारी जमीनों से कथित अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के 2021 में पद संभालने के बाद से राज्य के अलग-अलग इलाकों में हजारों परिवारों को सरकारी जमीन से हटाया जा चुका है. इनमें बड़ी संख्या बंगाली बोलने वाले मुस्लिम परिवारों की रही है.
मुख्यमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस कार्रवाई को लेकर पोस्ट भी किया. उन्होंने लिखा, "धुबरी में कब्ज़ा करने वालों की खैर नहीं- हो गया भाई! मैंने तुमसे कई बार कहा है कि असम की ज़मीन उसके लोगों के लिए है, कब्ज़ा करने वालों के लिए नहीं लेकिन कुछ लोग शायद मेरी बातें समझना नहीं चाहते. उनके लिए, हम JCB पेश करते हैं. कब्ज़ा करने वालों को हटाने का पक्का फ़ॉर्मूला."
क्या धुबरी में रहते हैं बांग्लादेशी?
धुबरी असम का सीमावर्ती जिला है, जिसकी सीमा बांग्लादेश से लगती है. यहां बंगाली बोलने वाले मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती है. बीजेपी लंबे समय से इस समुदाय के एक हिस्से पर बांग्लादेश से अवैध रूप से आने का आरोप लगाती रही है. पार्टी का कहना है कि अवैध घुसपैठ की वजह से असम के मूल निवासियों की पहचान, संस्कृति और जमीन पर दबाव बढ़ रहा है.