'32 साल पार्टी को दिए, फिर भी अकेला छोड़ दिया गया', भूपेन बोरा का छलका दर्द, सियासी भविष्य को लेकर क्या कहा?
असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने पद छोड़ने के बाद खुलकर ‘साजिश’ का आरोप लगाया. उन्होंने राजीव भवन को लेकर भी भावुक टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.;
असम की राजनीति में हलचल उस वक्त तेज हो गई जब भूपेन कुमार बोरा ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद खुलकर ‘साजिश’ का आरोप लगाया. उनका कहना है कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से पद से हटाया गया. इस्तीफे के बाद उनका दर्द सार्वजनिक रूप से सामने आया, और उन्होंने असम कांग्रेस मुख्यालय ‘राजीव भवन’ को लेकर भी भावुक टिप्पणी की. आइए, सिलसिलेवार जानते हैं कि क्या है असम कांग्रेस का सियासी संकट?
फिलहाल, भूपेन बोरा के कांग्रेस छोड़ने का फैसला उस समय फैसले को अस की सियासत में यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि बोरा को संगठन के मजबूत और जमीनी चेहरों में गिना जाता है. सवाल उठ रहे हैं, क्या यह महज नेतृत्व परिवर्तन है या पार्टी के भीतर गहरी गुटबाजी का संकेत? उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर कुछ ताकतें सक्रिय थीं जो उन्हें कमजोर करना चाहती थीं.
बोरा ने गुवाहाटी स्थित कांग्रेस मुख्यालय Indian National Congress के प्रदेश कार्यालय ‘राजीव भवन’ को लेकर कहा कि यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की आस्था और संघर्ष का प्रतीक है. उन्होंने संकेत दिया कि संगठनात्मक मूल्यों से समझौता नहीं होना चाहिए.
इस्तीफे के बाद भूपेन बोरा ने क्या कहा?
असम कांग्रेस से अपने इस्तीफे पर भूपेन कुमार बोरा ने मंगलवार को कहा, "मैं 1994 में कांग्रेस में शामिल हुआ था, जब मैं डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी में जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) था. पिछले 32 सालों से, मैंने पार्टी के लिए अलग-अलग पदों पर काम किया. सबसे मुश्किल समय में स्टेट प्रेसिडेंट बना. 6 महीने तक, कोई भी राजीव भवन नहीं आया. मैं राजीव भवन में अकेला था और BJP मेरा मजाक उड़ा रही थी. कह रही थी कि भूपेन बोरा वहीं से पार्टी चला रहे हैं और सिर्फ मीडिया के लोग आ-जा रहे हैं.
पिछले पंचायत चुनावों में, एक आदमी की साजिश की वजह से PCC प्रेसिडेंट की सारी पावर छीन ली गईं. अगर मैं सब कुछ बताने लगूंगा, तो मुझे 3 से 4 दिन लग जाएंगे." भूपेन कुमर बोरा ने अपने ग्रांड फादर का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस में शामिल होने की उनसे प्रेरणा मिली थी. मैं, कांग्रेस में छात्र राजनीति के समय में ही सक्रिय हो गया था.
भूपेन कुमार बोरा कौन हैं?
असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष. वह असम में कांग्रेस के विधायक और संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. उन्हें में असम में कांग्रेस के लिए जमीनी राजनीति करने और संगठन निर्माण में सक्रिय चेहरा माने जाते हैं. वह पार्टी के भीतर रणनीतिक और सांगठनिक फैसलों में प्रभावशाली भूमिका निभा चुके हैं. बोरा को असम में कांग्रेस के पुनर्गठन की कोशिशों से भी जोड़ा जाता रहा है.
असम में ‘राजीव भवन’ की पहचान क्या है?
Indian National Congress का असम मुख्यालय ‘राजीव भवन’ कहलाता है. यह गुवाहाटी में स्थित प्रदेश कांग्रेस का केंद्रीय कार्यालय है. संगठनात्मक बैठकें, प्रेस कॉन्फ्रेंस और रणनीतिक फैसले यहीं से संचालित होते हैं. राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है.
भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा क्यों दिया?
भूपेन कुमार बोरा ने इस्तीफे के पीछे कई वजह गिनाए हैं. इनमें संगठन के भीतर मतभेद, प्रदेश नेतृत्व के साथ रणनीतिक असहमति. टिकट वितरण/आंतरिक राजनीति और चुनावी फैसलों को लेकर विवाद. बोरा ने कांग्रेस नेतृत्व द्वारा अनदेखी का आरोप लगाया है. समर्थकों का दावा कि बोरा को निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया. हालांकि, आधिकारिक बयान में उन्होंने संगठनात्मक कारणों का हवाला दिया है.
‘साजिश’ का आरोप-किसने उठाया?
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि असम कांग्रेस के भीतर गुटबाजी के चलते बोरा को साइडलाइन किया गया. उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई. हालांकि, सार्वजनिक तौर पर किसी एक व्यक्ति या नेता का नाम लेकर आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं. यह मामला अभी भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दायरे में है, न कि कानूनी पुष्टि में.
भूपेन बोरा का राजनीतिक प्रोफाइल?
भूपेन बोरा राज्यस्तरीय नेता से लेकर संगठनात्मक पदों तक काम कर चुके हैं. छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया. असम की क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति के बीच सेतु की भूमिका निभाया. कांग्रेस की राज्य इकाई में रणनीतिक चेहरा माने जाते रहे. इसके बावजूद अपनी उपेक्षा की वजह से उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और आज उनका दर्द भी छलकर सामने आ गया.
अब कांग्रेस में उनकी अहमियत क्या?
उनकी कांग्रेस में जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठनात्मक पकड़ है. वह युवा और जमीनी कार्यकर्ताओं में प्रभाव रखते हैं. चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. राज्य में कांग्रेस की पुनर्स्थापना की कोशिशों में सक्रिय चेहरा माने जाते रहे हैं. उनका इस्तीफा असम कांग्रेस के लिए झटका माना जा रहा है. खासकर तब जब पार्टी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
भूपेन कुमार बोरा का इस्तीफा महज एक व्यक्ति का फैसला नहीं, बल्कि असम कांग्रेस की आंतरिक राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या वे किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की ओर बढ़ते हैं या संगठन में वापसी की संभावना बनती है.
बोरा के इस्तीफे को लेकर सस्पेंस क्यों?
असम कांग्रेस के नेता रहे भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. कुछ घंटे बाद यह खबर सुर्खियों में आई कि उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है. असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है और राहुल गांधी ने भी उनसे बात की है. उस समय ऐसा लगा कि उनकी शीर्ष नेतृत्व से बात बन गई है.
मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा था इस्तीफा
इससे पहले, सोमवार को भूपेन बोरा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिट्ठी में कहा था कि उन्हें उनके तरीके से काम नहीं करने दिया जा रहा है. रोचक बात है कि भूपेन बोरा को हटाकर ही कांग्रेस ने गौरव गोगोई को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था. सोमवार को गौरव गोगोई भी भूपेन बोरा के घर पहुंचे थे. इस मौके पर उन्होंने भूपेन बोरा को कांग्रेस की धरोहर बताते हुए कहा कि अगर उन्हें किसी बात का बुरा लगा तो वह (गौरव गोगोई) भूपेन से माफी मांगते हैं. इसके बाद एक बार को लगा था कि सब ठीक है लेकिन अब बात पलटती दिखाई दे रही है.
बीजेपी के किस नेता ने दिया पार्टी में शामिल होने का दिया न्योता?
पर ये क्या? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह किसी पार्टी में नहीं हैं और उन्हें 6 राजनीतिक दलों की ओर से ऑफर है. वहीं, 17 फरवरी को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी भूपेन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का न्योता दिया है. हिमंत का कहना है कि भूपेन बोरा ने उन्हें अपने घर भी बुलाया है.
सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने अपने एक्स पोस्ट में कहा कि भूपेन बोरा असम कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उभरे अंतिम प्रमुख हिंदू नेता रहे हैं. उनके निमंत्रण पर आज शाम उनसे भेंट करूंगा. मेरी हार्दिक इच्छा है कि वे भाजपा परिवार में शामिल होकर राष्ट्र और असम की सेवा के हमारे संकल्प को और सशक्त करें.
क्या हैं सियासी मायने?
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष रहे. उन्हें संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का क्रेडिट दिया जाता है. उनके इस्तीफे और फिर वापसी ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के अंदर असंतोष जरूर है, लेकिन फिलहाल टूट टल गई है लेकिन अब हिमंता का बयान नए सवाल पैदा करता है. असम विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए अहम माना जा रहा है.