Ekadashi Vrat: एकादशी तिथि पर चावल खाना क्यों माना जाता है वर्जित? जानिए धार्मिक मान्यताएं और नियम

एकादशी व्रत हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. खास बात यह है कि एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है, जिसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं.

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By :  State Mirror Astro
Updated On : 22 Feb 2026 6:30 AM IST

एकादशी तिथि को हिंदू धर्म में बहुत ही खास और पवित्र माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जो इस समूचे जगत के पालनहार हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, एक माह में 15-15 दिन के दो पक्ष होते हैं, जिसमें से एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण पक्ष होता है. इस तरह से शुक्ल और कृष्ण पक्ष में एक-एक एकादशी पड़ती है. एकादशी पर व्रत रखने और इसके नियमों का पालन करने से मनुष्यों को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति से सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा, जप और व्रत रखता है उसको मृत्यु के बाद श्रीहरि के चरणों में स्थान मिलता है. एकादशी का व्रत कठिन व्रतों में से एक होता है जिसमें कई तरह के नियमों का पालन करना होता है. एकादशी पर चावल का सेवन करना वर्जित होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे की पौराणिक कथा.

एकादशी पर क्यों नहीं खाते चावल?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां शक्ति किसी कारण से महर्षि मेधा पर क्रोधित हो गईं थीं, तब महर्षि मेधा ने माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए अपना शरीर त्याग दिया था. महर्षि के शरीर का त्याग होने से उनके शरीर के अंश धरती में समाहित हो गए. पृथ्वी पर जहां पर उनके शरीर के अंश गिरे वहां पर जौ और चावल के पौधे पैदा हो गए. ऐसे में चावल और जौ में महर्षि के शरीर का अंश होता है ऐसे में इसे जीव के समान जाता है. इस कारण से एकादशी तिथि पर चावल का सेवन करना वर्जित होता है.

एकादशी व्रत के क्या है नियम?

  • एकादशी तिथि के एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. दशमी तिथि के दिन मांस, लहसुन, प्याज और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • एकादशी व्रत के दिन ब्रह्राचर्य के नियमों का पालन नहीं करना चाहिए और भोग-विलास से दूर रहना चाहिए.
  • एकादशी के दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय का मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके अलावा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हैं.
  • भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते भोग में अति प्रिय होते है लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए.
  •  एकादशी के दिन दान करना चाहिए लेकिन किसी दूसरे का अन्न भूलकर भी नहीं करना चाहिए.

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