चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि दो दिन, पंचांग गणना के अनुसार जानें कब मनाएं महानवमी और रामनवमी ?

चैत्र नवरात्रि में इस बार नवमी तिथि दो दिन पड़ने से लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है कि महानवमी और रामनवमी कब मनाई जाए. पंचांग गणना के अनुसार सही तिथि और शुभ समय जानना बेहद जरूरी है, ताकि पूजा का पूरा फल मिल सके.

( Image Source:  AI SORA )
By :  State Mirror Astro
Updated On : 26 March 2026 6:30 AM IST

चैत्र नवरात्रि का पवित्र समय जारी है. हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि का धार्मिक अनुष्ठान चैत्र प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलता है. इस दौरान नवरात्रि के 9 दिनों तक माता के सभी 9 स्वरूपों की पूजा विधि-विधान के साथ होती है. नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का खास महत्व होता है, जिसमें कन्या पूजन और हवन करते हुए व्रत को पूरा किया जाता है.

नवमी तिथि पर मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है, तो वहीं दूसरी तरफ चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस वर्ष चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 26 और 27 मार्च दो दिन होने के कारण भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई की किस दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाए. आइए जानते हैं रामनवमी, महानवमी की सही तिथि.

महानवमी और रामनवमी पर क्या कहता है पंचांग?

हिंदू पंचांग के अनुसार, हिंदू धर्म में ज्यादातर व्रत और त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाया जाता है. इस वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को लेकर अलग-अलग पंचांगों में मतभेद देखने को मिल रहा है. कुछ पंचांग 26 मार्च को तो कुछ 27 मार्च को राम नवमी बता रहे हैं, जिससे लोगों में थोड़ा असमंजस बना हुआ है. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी. इस वजह से नवमी तिथि दो दिनों तक पड़ रही है.

कब हुआ था भगवान राम का जन्म?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में अभिजीत मुहूर्त और पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था. इस साल यह नक्षत्र 27 मार्च को पड़ रहा है और उस दिन सूर्योदय भी नवमी तिथि में ही होगा. इसलिए कई विद्वान पंडित और ज्योतिषाचार्य 27 मार्च को राम नवमी मनाना अधिक शुभ मानते हैं.वहीं कुछ विद्वानों का मानना है कि कि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर के समय हुआ था. इसलिए जिस दिन दोपहर में नवमी तिथि हो, उसी दिन राम नवमी मनानी चाहिए. इस बार 26 मार्च की दोपहर में नवमी तिथि रहेगी, इसलिए इस दिन भी राम नवमी मनाई जा सकती है. ऐसे में भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार किसी भी दिन राम नवमी मना सकते हैं.

रामनवमी पूजा शुभ मुहूर्त

चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान राम का जन्म मध्याह्र काल में हुआ था. 26 मार्च को नवमी तिथि मध्याह्र काल तक विद्यमान रहेगी. 26 मार्च को मध्याह्र मुहूर्त 11 बजकर 13 मिनट से लेकर 01 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. वहीं इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र दोपहर 4 बजकर 19 मिनट से आरंभ हो जाएगा.

नवरात्रि अष्टमी-नवमी तिथि

26 मार्च को चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन होगा, इस दिन माता महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है और 27 मार्च को नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी.

नवरात्रि पर कन्या पूजन और हवन का महत्व

नवरात्रि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब नवरात्रि के दिन होते हैं तो मां दुर्गा पृथ्वी लोक पर वास करती हैं और 2 से लेकर 10 वर्ष की कन्याओं को मां का स्वरूप माना जाता है. अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. नवरात्रि पर नौ दिनों तक विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान और हवन करने का विशेष महत्व होता है. हवन करने से पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है. ऐसे में अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन जरूर करें.

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