इन 7 स्थानों पर बोल सकते हैं झूठ, नहीं लगेगा पाप; जानें क्या कहता है श्रीमदभागवत

बामन अवतार के समय जब भगवान नारायण राजा बलि से तीन पग जमीन की मांग करते हैं, उस समय दैत्यगुरु शुक्राचार्य राजा बलि को मना करने की सलाह देते हैं. वह कहते हैं कि 7 स्थानों पर बोला गया झूठ वास्तव में झूठ नहीं होता. इस लिए इस मौके पर राजा बलि को नि:संकोच झूठ का आश्रय लेना चाहिए.;

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By :  स्टेट मिरर डेस्क
Updated On : 28 Dec 2025 11:57 PM IST

सनातन धर्म के सभी ग्रंथ सत्य का नारायण का रूप कहते हैं. शिवपुराण में सत्य को ही शिव और शिव को ही सुंदर बताया गया है. गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीराम चरितमानस में लिखते हैं कि 'धरम न दूसर सत्य समाना'. मतलब सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है. खुद श्रीमद भागवत में भगवान नारायण को सत्य नारायण के रूप में कई बार संबोधित किया गया है. लेकिन इसी श्रीमद भागवत में एक बार झूठ बोलने का भी समर्थन किया गया है. आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है, लेकिन यही हकीकत है. यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि यह झूठ विशेष परिस्थिति में बोला जाना चाहिए. अब सवाल उठ सकता है कि वह विशेष परिस्थिति क्या हो सकती है.

इसका जवाब भी श्रीमद भागवत के नवम स्कंध के 19वें अध्याय में ही मिल जाता है. कथा आती है कि जब भगवान नारायण राजा बलि के दरबार में जाते हैं और दान में तीन पग जमीन मांगते हैं तो शुक्राचार्य को संदेह हो जाता है. वह तुरंत अपनी दिव्य दृष्टि से भगवान को पहचान लेते हैं और राजा बलि को उपदेश करते हैं कि वह भगवान नारायण को मना कर दें. उस समय राजा बलि कहते हैं कि वह वचन दे चुके हैं. ऐसे में यदि मना करते हैं तो वह झूठ माना जाएगा. इसके जवाब में शुक्राचार्य उन्हें समझाते हुए कहते हैं 7 स्थानों पर यदि झूठ भी बोला जाए तो पाप नहीं लगता. वह सात स्थान हैं 'स्त्रीषु नर्म विवाहे च,वृत्यर्थे प्राण संकटे। गो ब्राह्मणार्थे हिंसायां, नानृतं स्याज्जुगुप्सितम्।।'

इन 7 स्थानों पर बोल सकते हैं झूठ

इस श्लोक के मुताबिक अपनी स्त्री से कोई महत्वपूर्ण बात छिपाने के लिए एक बार झूठ बोलने पर पाप नहीं लगता. इसी प्रकार हास परिहास अर्थात हंसी मजाक में, विवाह के दौरान वर या कन्या की प्रशंसा में, अपनी जीविका की रक्षा के लिए, प्राण संकट हो, गौ और ब्राह्मण के रक्षा के लिए तथा किसी निर्दोष की प्राण रक्षा के लिए यदि झूठ बोला जाए तो इसमें पाप नहीं लगता. इस प्रसंग का विस्तार करते हुए भगवान शुकदेव राजा परीक्षित को समझाते हुए कहते हैं कि स्त्रियों का हृदय निर्मल होता है. उनके पेट में कोई बात नहीं पचती. ऐसे में यदि किसी बात को अभी उजागर ना करनी हो तो उस बात को टालने के लिए स्त्रियों के सामने एक बार झूठ बोला जा सकता है.

हंंसी मजाक में बोला गया झूठ भी पाप की श्रेणी में नहीं आता 

इसी प्रकार हंसी मजाक में बोला गया झूठ भी पाप की श्रेणी में नहीं आता. बशर्ते कि सामने वाला उसे सही ना मान बैठे. वहीं यदि किसी युवक या युवती का विवाह हो रहा हो और उनकी प्रशंसा में दो बोल बोल देने से भी पाप नहीं लगता. बल्कि इसे शास्त्रों में अच्छी बात कहा गया है. भगवान शुकदेव के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी जीविका बचाने या कोई नया रोजगार पाने के लिए भी झूठ बोलता है तो इसकी अनुमति दी जा सकती है. इसी प्रकार अपनी या गौ-ब्राह्मण के रक्षा के लिए भी बोला गया झूठ वास्तव में झूठ नहीं होता. हालांकि उन्होंने इस प्रसंग में साफ भी किया है कि इन परिस्थितियों में भी एक बार झूठ बोलने की अनुमति है. 

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