क्या मां से बेटियों में ट्रांसफर हो रहा है मैथ्स का डर? ऋषि सुनक-अक्षता मूर्ति की चैरिटी का चौंकाने वाला सर्वे

क्या आपको मैथ्स से डर लगता है? अगर हां, तो इसकी वजह स्कूल नहीं बल्कि घर का माहौल हो सकता है. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति की शिक्षा चैरिटी 'द रिचमंड प्रोजेक्ट' के सर्वे में खुलासा हुआ है कि मैथ्स का डर मां से बेटी तक पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुंचता है. सर्वे बताता है कि जिन माताओं को नंबर्स से घबराहट होती है, उनकी बेटियों में भी मैथ्स को लेकर कॉन्फिडेंस कम रहता है.;

( Image Source:  Instagram: akshatamurty_official )
Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 12 Jan 2026 1:47 PM IST

क्या आपको मैथ्स का नाम सुनते ही थोड़ा डर या अनकम्फर्ट महसूस होता है? क्या बचपन में नम्बर्स वाला होमवर्क आपको रातों की नींद उड़ा देता था, जैसे कोई बुरा सपना हो? अगर हां, तो इसका असली कारण शायद स्कूल की क्लास में नहीं, बल्कि घर के माहौल में छिपा हो सकता है. खासकर माताओं के व्यवहार में.

हाल ही में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति ने एक शिक्षा चैरिटी शुरू की है, जिसका नाम है द रिचमंड प्रोजेक्ट. इसी संस्था ने एक बड़ा सर्वे किया है, जिसमें एक बहुत ही हैरान करने वाला नतीजा निकला है. यह सर्वे बताता है कि मैथ्स का डर मां से बेटी तक पीढ़ी दर पीढ़ी कैसे चुपके-चुपके पहुंचता रहता है. 

माएं अनजाने में बेटियों में मैथ्स का डर पैदा कर देती हैं.

सर्वे के मुताबिक, अगर किसी मां को खुद नंबर्स से परेशानी होती है या मैथ्स करते वक्त घबराहट होती है, तो उनकी बेटी में भी मैथ्स के प्रति कॉन्फिडेंस कम होने की बहुत ज्यादा संभावना रहती है. अक्षता मूर्ति ने 'द संडे टाइम्स' अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मैथ्स को लेकर ज्यादा चिंता और डर देखने को मिलता है. जब एक छोटी बच्ची अपनी मां को होमवर्क करते समय परेशान, घबराई हुई या मुश्किल में फंसी देखती है, तो उसके मन में यह बात घर कर जाती है कि मैथ्स तो बहुत मुश्किल चीज है. 'यह डर धीरे-धीरे इतना डीप हो जाता है कि बच्ची खुद मैथ्स से दूर भागने लगती है और यही डर आगे चलकर उसकी बेटी तक भी पहुंच जाता है. इस तरह यह एक चेन की तरह चलता रहता है.  

Instagram: akshatamurty_official

लड़कों का कॉन्फिडेंस बढ़ता जाता है, लड़कियां पीछे छूट जाती हैं

इस सर्वे में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े भी सामने आए हैं:

4 से 8 साल के बच्चों में: 51% लड़के मैथ्स को आसान मानते हैं, जबकि सिर्फ 41% लड़कियां ऐसा सोचती हैं यानी इतनी छोटी उम्र में ही अंतर शुरू हो जाता है.

9 से 18 साल के बच्चों में: यह फर्क और भी बड़ा हो जाता है. इस उम्र में 86% लड़के मैथ्स में कॉन्फिडेंस महसूस करते हैं, लेकिन लड़कियों में यह संख्या सिर्फ 63% रह जाती है. 

सर्वे में कुल 8,000 बड़ों से बात की गई पता चला कि संख्याओं से निपटते वक्त महिलाओं में पुरुषों की तुलना में दोगुनी घबराहट होती है.  ऑफिस या प्रोफेशनल लाइफ में भी यही ट्रेंड दिखता है- 61% पुरुष नम्बर्स के साथ काम करने का मजा लेते हैं, जबकि सिर्फ 43% महिलाएं ऐसा कहती हैं. 

Instagram: akshatamurty_official

रोजमर्रा की जिंदगी मैथ्स को करें शामिल 

अक्षता मूर्ति ने बताया कि उन्हें खुद कभी मैथ्स का डर नहीं लगा. इसका कारण उनकी मां (सुधा मूर्ति) इंजीनियर थीं और मौसियां भी विज्ञान की बैकग्राउंड से थी. घर में गणित को हमेशा पॉजिटिव तरीके से देखा जाता था. इसी अनुभव से प्रेरित होकर अक्षता अब अपनी बेटियों- कृष्णा और अनुष्का को मैथ्स सिखाने का तरीका बदल रही हैं. वे जानबूझकर मैथ्स को किताबों और फॉर्मूले तक सीमित नहीं रखतीं. उनका कहना है कि मैथ्स को सिर्फ 'एक सब्जेक्ट' समझने की बजाय रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए जैसे:

-सब्जी खरीदते समय हिसाब लगाना

-ट्रेन का टाइमटेबल देखना

-रेसिपी में सामान नापना

-रेस्टोरेंट में बिल बांटना

Instagram: akshatamurty_official

मैथ्स को बनाए मजेदार न की बोझ

जब बच्चे मैथ्स को इस तरह इस्तेमाल करते देखेंगे, तो उनका डर अपने आप कम हो जाएगा. यह पूरी रिपोर्ट अभी आधिकारिक तौर पर अगले हफ्ते जारी होने वाली है, लेकिन इसके नतीजों ने पहले ही बहुत सारी चर्चाएं शुरू कर दी हैं. लोग बात कर रहे हैं कि घर में पालन-पोषण का तरीका, लिंग के बारे में पुरानी सोच (जैसे मैथ्स लड़कों का विषय है), और शुरुआती उम्र में मैथ्स के प्रति नजरिया कैसे बनता है इन सबका बच्चों के भविष्य पर कितना गहरा असर पड़ता है. 

Similar News