बॉस है टॉक्सिक? Gen Z ने ढूंढ लिए ऑफिस में सर्वाइव करने के धांसू तरीके

ऑफिस में अगर बॉस का मूड मौसम से भी तेजी से बदलता है, तो टेंशन लेने की जगह Gen Z ने नया तरीका अपनाया है, जिसेस्मार्ट सर्वाइवल कहते हैं. नौकरी छोड़ना आसान नहीं, इसलिए नई पीढ़ी दिमागी जुगाड़ से माहौल को हैंडल कर रही है.;

( Image Source:  AI SORA )
Edited By :  हेमा पंत
Updated On : 13 Feb 2026 12:53 PM IST

ऑफिस में कदम रखते ही अगर आपको लगता है कि आप नौकरी पर नहीं, किसी रियलिटी शो के सेट पर पहुंच गए हैं. जहां बॉस का मूड ही स्क्रिप्ट लिखता है, तो घबराइए मत. Gen Z इस खेल को समझ चुका है. नौकरी छोड़ना हर बार ऑप्शन नहीं होता, इसलिए नई पीढ़ी ने सर्वाइव करने के ऐसे जुगाड़ ढूंढ निकाले हैं कि टॉक्सिक माहौल भी थोड़ा कम जहरीला लगने लगे.

ये युवा बहस से ज्यादा दिमाग लगाते हैं. कभी इमोशनल दूरी बना लेते हैं, कभी हालात को कॉमेडी शो मानकर हंसते हुए निकाल जाते हैं, तो कभी ऐसी स्मार्ट चाल चलते हैं कि सामने वाला खुद संभल जाए. 

“लेट देम” थिंक

Gen Z ने एक सिंपल सा फार्मूला अपना लिया है. हर चीज़ पर रिएक्शन देना जरूरी नहीं है. अगर बॉस आज फिर से “मंडे मोड” में हैं, कंपनी की पॉलिसी रातों-रात बदल गई है, या कोई कलिग बिना वजह अजीब बर्ताव कर रहा है और इनमें से कुछ भी आपके कंट्रोल में नहीं है, तो फिर माथा क्यों पकड़ना? इस जनरेशन का मानना है कि जहां रिमोट ही आपके हाथ में नहीं, वहां चैनल बदलने की कोशिश क्यों! बेहतर है कंधे उचकाओ, मन में बोलो “लेट इट बी”, और अपनी एनर्जी उस काम में लगाओ जो सच में आपके बस में है. इससे बेकार की बहसें भी बचती हैं और दिमाग की बैटरी भी फुल रहती है.

मेल में “वकील” को एड करना

कुछ Gen Z दिमाग से शतरंज खेलते हैं. क्लाइंट अगर ज्यादा ताव में हो, बात मानने को तैयार न हो, तो ये लोग ईमेल लिखते समय एक छोटा सा “ड्रामा ट्विस्ट” डाल देते हैं. सीधे किसी फर्जी वकील को CC में जोड़ देते हैं. बस फिर क्या, सामने वाला, जो अभी तक ALL CAPS में मेल भेज रहा था, अचानक संस्कारी मोड में आ जाता है. भाषा नरम, टोन मीठा, और जवाब बेहद प्रोफेशनल. मतलब, बिना लड़ाई किए भी जीतने के तरीके होते हैं. बस थोड़ा दिमाग और हल्का सा फिल्मी इफेक्ट चाहिए.

अलग-अलग कहानियां गढ़ना

कुछ लोग जानबूझकर अपने बारे में अलग-अलग लोगों को अलग बातें बताते हैं. अगर बाद में कोई आकर उन बातों पर सवाल करे, तो समझ आ जाता है कि पीठ पीछे चर्चा हो रही थी. यह तरीका भरोसेमंद और गैर-भरोसेमंद लोगों को पहचानने में मदद करता है.

ग्रे रॉक तरीका

इस ट्रिक का सीधा सा मतलब है कि ऑफिस में इंसान कम, वाई-फाई राउटर ज्यादा बन जाएं. मौजूद तो रहो, पर फीलिंग्स की लाइट्स ऑफ. न ओवर एक्साइटेड, न दुखी, न गुस्से में. बस हल्की सी “हम्म”, “ओके”, “देखते हैं” वाली एनर्जी रखें. अपना काम निपटाएं और शांति से लॉगआउट करें. मज़ेदार बात ये है कि जब आप रिएक्शन देना बंद कर देते हो, तो सामने वाले का ड्रामा अपने आप दम तोड़ देता है.

ऑफिस को सिटकॉम समझना

कई Gen Z  तनाव कम करने के लिए खुद को याद दिलाते हैं कि यह सब एक टीवी शो जैसा है. किरदार बदलते रहते हैं, सीन आते-जाते हैं, और हर दिन एक नया एपिसोड है. इस नजरिए से चीजें कम पर्सनल लगती हैं. साफ है, Gen Z सिर्फ नौकरी नहीं कर रहा. वह माहौल को समझते हुए खुद को बचाने की रणनीति भी बना रहा है. ये तरीके भले अजीब लगें, लेकिन कई युवाओं के लिए यही रोज की जंग जीतने का तरीका बन चुके हैं.

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