अगर आपके बच्चे भी हैं 'Gen Z- Alpha' तो पेरेंटिंग में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी
आज के Gen Z और Gen Alpha बच्चे मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बीच बड़े हो रहे हैं. ऐसे में पेरेंटिंग पहले से ज्यादा मुश्किल हो गई है. कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं, जो बच्चों की आदतों और बिहेवियर पर बुरा असर डालती हैं.;
gen z and alpha
(Image Source: AI SORA )Gen Z के बच्चे जागते ही फोन हाथ में ले लेते हैं. सुबह उठते ही इंस्टाग्राम रील्स, टिकटॉक वीडियो या यूट्यूब शॉर्ट्स स्क्रॉल करने लगते हैं. स्कूल या कॉलेज से लौटते ही दोस्तों के स्टोरीज चेक करते हैं. डिनर टाइम पर भी फोन टेबल पर रखे रहते हैं. रात को सोने से पहले 1-2 घंटे स्क्रॉलिंग.
एक सर्वे के मुताबिक, भारत के किशोर औसतन 7-8 घंटे रोज सोशल मीडिया पर बिताते हैं. ऐसे में Gen Z- Alpha जनरेशन के पेरेंट्स को पेरेंटिंग का खास ध्यान रखना चाहिए. उनकी छोटी-सी लापरवाही फ्यूचर में बड़ी मुसीबत बन सकती है.
बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर न रखना
आजकल के पेरेंट्स काम में काफी बिजी रहते हैं. इसलिए वह अक्सर बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं. खासतौर पर वह कितनी देर से फोन चला रहे हैं. Gen Z बच्चे अक्सर पढ़ाई के बहाने फोन लेकर बैठते हैं, लेकिन धीरे-धीरे सोशल मीडिया, गेम्स और वीडियो में खो जाते हैं. पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें. दिन में कितने घंटे मोबाइल इस्तेमाल करना है, यह पहले से तय हो. साथ ही, रात में सोने से पहले फोन का इस्तेमाल बंद करवा दें.
ओपन बातचीत से दूरी
इस जनरेशन से बात करता बेहद जरूरी है, क्योंकि इनकी दुनिया अब सिर्फ घर और दोस्त नहीं है. अब यह एक जगह बैठकर दुनिया की हर अच्छी-बुरी चीज़ देखते हैं. आजकल पेरेंट्स और बच्चों में कम्यूनिकेशन गैप आ गया है. इसलिए सीधी और ओपन बातचीत करें. उनसे सवाल पूछें कि 'वह सोशल मीडिया पर क्या देखते हैं? किससे बात करते हैं और उन्हें क्या परेशान करता है? साइबर बुलिंग या फेक न्यूज के खतरे समझाएं'. ऐप्स जैसे Bark या Qustodio इंस्टॉल करें जो पैरेंटल कंट्रोल देते हैं.
जीरो आउटडोर-इनडोर एक्टिविटी
डिनर के दौरान सभी फोन एक बॉक्स में रख दें. 'फोन-फ्री डिनर' रूल बनाएं. वीकेंड पर फैमिली गेम्स, पार्क घूमना या मूवी नाइट प्लान करें. इससे बच्चे रियल कनेक्शन महसूस करेंगे. इसके अलावा, अपने बच्चे के खाली टाइम को यूटिलाइज करें. बच्चों को फोन देने के बजाय डांस क्लास ज्वाइन करवाएं. अपने बच्चों को बाहर दूसरे बच्चों के साथ खेलने भेजें.