डिजिटल बेवफाई! हर 7 सेकंड में बन रहा है शादीशुदा लोगों का नया मैच, 3.5 लाख से ज्यादा लोग यूज़ कर रहे है ये ऐप

जापान में शादीशुदा लोगों के लिए बनाया गया एक खास डेटिंग ऐप तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसने समाज में नई बहस छेड़ दी है. प्रोजेक्ट नाइटफॉल की रिपोर्ट के मुताबिक, बिना किसी बड़े विज्ञापन के इस ऐप को 3.5 लाख से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं और हर 7 सेकंड में एक नया मैच बन रहा है. यह ऐप पूरी गोपनीयता और गुमनामी का दावा करता है, जिससे लोग इसे ‘डिजिटल बेवफाई’ कह रहे हैं. समर्थक इसे अकेलेपन का नतीजा मानते हैं, जबकि विरोधियों के अनुसार यह शादी और पारिवारिक मूल्यों के लिए खतरा है.;

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Edited By :  रूपाली राय
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बाहर से देखने पर ज्यादातर शादियां बहुत परफेक्ट और खुशहाल लगती हैं. परिवार के साथ हंसते-खेलते पल, सोशल मीडिया पर मुस्कुराती हुई खूबसूरत तस्वीरें, और सब कुछ संतुष्ट और व्यवस्थित दिखता है. लेकिन घर के बंद दरवाजों के पीछे कई बार हकीकत अलग होती है. कुछ पति-पत्नी चुपके से किसी और की तरफ आकर्षित हो जाते हैं. सबसे बड़ा सदमा तब लगता है, जब पता चलता है कि आपका लाइफ पार्टनर सीक्रेट रूप से किसी डेटिंग ऐप पर 'दूसरा पार्टनर' ढूंढ रहा है. यह अनुभव बेहद दुखदायी और परेशान करने वाला हो सकता है, क्योंकि इसमें विश्वासघात का गहरा दर्द छिपा होता है.

अब जापान में भी ऐसी ही एक स्थिति तेजी से सामने आ रही है. वहां एक खास डेटिंग ऐप बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जो खास तौर पर शादीशुदा लोगों के लिए बनाया गया है. इस ऐप की मदद से विवाहित लोग अपने मौजूदा शादीशुदा जीवन को बनाए रखते हुए एक से ज्यादा साथी की तलाश कर सकते हैं. प्रोजेक्ट नाइटफॉल नाम की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऐप को लगभग कोई विज्ञापन दिए बिना ही 3.5 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड कर लिया है और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस ऐप पर हर 7 सेकंड में एक नया मैच बन जाता है. यानी लोग बहुत तेजी से नए कनेक्शन बना रहे हैं, जो दिखाता है कि इस तरह की जरूरत कितनी गहरी है.  

डिजिटल धोखे को लेकर बढ़ती चिंता

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जापान के समाज में काफी हलचल मच गई है. खासकर मध्यम वर्ग के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और रिलेशनशिप एक्सपर्ट बहुत चिंतित हैं. कई लोग इस ऐप को 'डिजिटल बेवफाई' का बड़ा उदाहरण मान रहे हैं. यहां शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही ऑनलाइन इमोशनल और रोमांटिक बॉन्डिंग हो जाती है, जो मैरिटल रिलेशनशिप्स को अंदर से कमजोर कर सकती है. यह ऐप खुद को एक 'सीक्रेट दोस्ती' या 'सुरक्षित जगह' के रूप में पेश करता है. यूजर्स पूरी तरह गुमनाम रह सकते हैं, फेक या छिपी हुई प्रोफाइल बना सकते हैं, और बहुत सख्त प्राइवेसी सेटिंग्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन सबके कारण पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सामने वाला व्यक्ति असल में कौन है. इसी वजह से कई शादीशुदा लोग बिना डर के अजनबियों से खुलकर बात करते हैं और अपनी भावनाओं को शेयर करते हैं. 

समाज में बंटे हुए विचार

जापान में इस मुद्दे पर लोगों के विचार बहुत बंटे हुए हैं. कुछ लोग इसे सपोर्ट करते हैं और कहते हैं कि जापान में काम का बहुत ज्यादा प्रेशर है. लोग सुबह जल्दी निकलते हैं, देर रात घर लौटते हैं, थकान बहुत रहती है, और सामाजिक अलगाव (अकेलापन) भी बढ़ रहा है. इन सबके कारण पति-पत्नी के बीच भावनात्मक दूरी आ जाती है. ऐसे में यह ऐप कोई नई समस्या नहीं पैदा कर रहा, बल्कि जो पहले से मौजूद है, उसे सिर्फ सामने ला रहा है यानी यह समाज की असल हकीकत को दिखा रहा है. दूसरी तरफ विरोध करने वाले लोग इसे बहुत गलत मानते हैं. उनका कहना है कि यह ऐप शादी और फैमिली वैल्यू को सीधे खतरे में डाल रहा है. वे डरते हैं कि ऐसी तकनीक से आने वाली जनरेशन लॉयल्टी और कमिटमेंट को कम इम्पोर्टेंस देने लगेंगी. लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक नियम कमजोर पड़ सकते हैं, और रिश्तों में जिम्मेदारी की फीलिंग खत्म हो सकती है. 

सोशल मीडिया पर भी गरमागरम बहस

यह चर्चा अब सोशल मीडिया पर भी बहुत तेज हो गई है. कुछ लोग कहते हैं कि अगर किसी रिश्ते में खुशी नहीं मिल रही, तो इंसान स्वाभाविक रूप से खुशी की तलाश करता है यह मानवीय जरूरत है. वहीं दूसरे लोग इसे बहाना मानते हैं और कहते हैं कि यह शादी की जिम्मेदारियों से भागने का आसान रास्ता है. लोग अपनी असली समस्याओं का सामना करने के बजाय बाहर की तलाश में लग जाते हैं. यह डेटिंग ऐप सिर्फ एक ऐप नहीं है. यह जापान में रिश्तों के बदलते स्वरूप, बढ़ते अकेलेपन, आधुनिक जीवन की भागदौड़ और काम के दबाव को साफ-साफ दिखाता है. 

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