क्या है Keto Diet? कैसे करती है काम और किन लोगों के लिए है जरुरी, FAQ में जानें सब

कीटो डाइट आजकल वजन कम करने और ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए काफी लोकप्रिय हो गई है. यह डाइट शरीर को केटोसिस की स्थिति में ले जाती है, जहां शरीर कार्बोहाइड्रेट की जगह फैट से ऊर्जा बनाता है.

( Image Source:  AI Sora )
Edited By :  रूपाली राय
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कीटो डाइट, जिसे कीटोजेनिक डाइट (Ketogenic Diet) भी कहते हैं, एक खास प्रकार का डाइट है जो बहुत कम कार्बोहाइड्रेट (low-carb), बहुत ज्यादा फैट (high-fat) और मध्यम मात्रा में प्रोटीन (moderate protein) पर आधारित होता है. इसका मुख्य लक्ष्य शरीर को केटोसिस (Ketosis) नामक स्थिति में ले जाना होता है. केटोसिस में शरीर सामान्य रूप से कार्ब्स से मिलने वाली चीनी (ग्लूकोज) की जगह फैट को जलाकर एनर्जी बनाता है और कीटोन बॉडीज (ketone bodies) नामक पदार्थ बनाता है, जो मस्तिष्क और शरीर के लिए अल्टरनेटिव फ्यूल का काम करते हैं. 

कहां से शुरू हुई?

सबसे पहले 1920 के दशक में बच्चों में मिर्गी (epilepsy) के दौरे कम करने के लिए डॉक्टरों ने इस डाइट का इस्तेमाल किया. आजकल यह मुख्य रूप से वजन घटाने, टाइप-2 डायबिटीज कंट्रोल, PCOS, और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए बहुत पॉपुलर है. 

कीटो डाइट के नियम

एक सामान्य कीटो डाइट में कैलोरी का विभाजन इस प्रकार होता है:

पोषक तत्व

प्रतिशत (%)

रोज़ाना उदाहरण (2000 kcal पर)

फैट (Fat)

70-75%

155-167 ग्राम

प्रोटीन (Protein)

20-25%

100-125 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट (Carbs)

5-10%

20-50 ग्राम (Net carbs)

सख्त नियम:

  • कुल नेट कार्ब्स (Total carbs - Fiber) 20-50 ग्राम से कम रखें
  • चीनी, स्टार्च, अनाज, ज्यादातर फल, दालें, आलू, चावल, रोटी, मीठा पूरी तरह बंद 
  • खूब सारा पानी + इलेक्ट्रोलाइट्स (नमक, पोटैशियम, मैग्नीशियम) लें- कीटो फ्लू से बचने के लिए 
  • शुरू के 3-7 दिन कीटो फ्लू (थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन) आ सकता है 

क्या खाएं?

  • फैट: घी, मक्खन, नारियल तेल, जैतून का तेल, एवोकाडो, बादाम, अखरोट, मक्खन
  • प्रोटीन: अंडे, चिकन, मटन, मछली, पनीर, चीज़, दही (बिना चीनी)
  • सब्जियां: पालक, ब्रोकली, फूलगोभी, ज़ुकीनी, शिमला मिर्च, खीरा (कम कार्ब वाली)
  • अन्य: नट्स (सीमित), डार्क चॉकलेट (85%+), बिना चीनी वाली चाय/कॉफी

क्या न खाएं?

  • चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जूस
  • चावल, रोटी, पराठा, ब्रेड, नूडल्स
  • आलू, शकरकंद, केला, आम, अंगूर
  • दालें, चना, राजमा (ज्यादातर)
  • बीयर, मीठी चीजें
  • कीटो डाइट किसके लिए जरूरी है?
  • मोटापे से ग्रस्त लोग (खासकर इंसुलिन रेसिस्टेंस वाले)
  • टाइप-2 डायबिटीज या प्री-डायबिटीज वाले (ब्लड शुगर बहुत अच्छे से कंट्रोल होता है)
  • PCOS वाली महिलाएँ (हॉर्मोन बैलेंस में मदद)
  • मिर्गी के मरीज (डॉक्टर की देखरेख में)
  • कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियां (Alzheimer’s, Parkinson’s में रिसर्च चल रही है)

किन लोगों को नहीं करनी चाहिए?

  • टाइप-1 डायबिटीज (केटोएसिडोसिस का खतरा)
  • किडनी की गंभीर बीमारी
  • लिवर की समस्या
  • गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं 
  • एथलीट्स/बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने वाले (लंबे समय तक कार्ब्स की कमी से परफॉर्मेंस गिर सकती है)
  • खाने की डिसऑर्डर वाले लोग

कीटो डाइट के फायदे

  • तेज़ वजन घटना (खासकर शुरू के 6-12 महीने)
  • भूख बहुत कम लगती है
  • ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल में सुधार
  • ट्राइग्लिसराइड कम, HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) बढ़ सकता है
  • मानसिक स्पष्टता (कई लोगों को ब्रेन फॉग कम लगता है)

कीटो डाइट के नुकसान / साइड इफेक्ट्स

  • कीटो फ्लू (शुरुआती 1-2 हफ्ते)
  • कब्ज (फाइबर कम होने से)
  • पोषक तत्वों की कमी (विटामिन C, फाइबर, कुछ मिनरल्स)
  • किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है
  • लंबे समय (1-2 साल+) तक करने पर हृदय स्वास्थ्य पर असर (अगर अस्वास्थ्यकर फैट ज्यादा लें)
  • मांसपेशियों की हानि (अगर प्रोटीन कम हो)
  • वापस नॉर्मल डाइट पर जाने पर वजन वापस आ सकता है
  • 1. कीटो डाइट से कितना वजन कम हो सकता है?

FAQ – सबसे आम सवालों के जवाब

पहले महीने 4-10 किलो (ज्यादातर पानी + ग्लाइकोजन), बाद में 0.5-1 किलो/हफ्ता संभव 

2. क्या भारतीय खाने में कीटो संभव है?

हां! घी, पनीर, अंडे, चिकन, मटन, पालक, लौकी, भिंडी, फूलगोभी का पराठा (आलू के बिना), नारियल तेल इस्तेमाल कर सकते हैं. 

3. क्या कीटो लंबे समय तक कर सकते हैं?

कुछ लोग सालों तक करते हैं, लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट 6-12 महीने के बाद साइक्लिकल या कम सख्त वर्जन की सलाह देते हैं. 

4. क्या कीटो से कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है?

कई लोगों में LDL बढ़ता है, लेकिन पार्टिकल साइज अच्छा होता है. फिर भी हार्ट की समस्या वाले डॉक्टर से पूछें. 

5. शाकाहारी कीटो संभव है?

हां, लेकिन मुश्किल पनीर, दही, नट्स, एवोकाडो, नारियल, टोफू, सीड्स पर निर्भर रहना पड़ता है. 

सबसे जरूरी सलाह: कीटो डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह जरूर लें, खासकर अगर कोई बीमारी है. ब्लड टेस्ट (लिपिड, किडनी, लिवर) करवाते रहें. 

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