भारत में क्यों हो रही है ISKCON बंद करने की मांग, क्या है इसकी वजह?

ह्यूस्टन सिटी में एक रथयात्रा का आयोजन किया गया था, जिसके बाद से भारत में इस्कॉन मंदिर को बैन करने की मांग की जा रही है. यह मांग पुरी में जगन्नाथ मंदिर के गोवर्धन पीठ की ओर से की गई है. जानें क्या है पूरा मामला...

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Edited By :  संस्कृति जयपुरिया
Updated On : 11 Nov 2024 12:46 PM IST

इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) की स्थापना 1966 में न्यूयॉर्क शहर में हुई थी. इन दिनों भारत में इस्कॉन (ISKCON) मंदिर को बैन करने की मांग चल रही है. यह मांग पुरी में जगन्नाथ मंदिर के गोवर्धन पीठ (Govardhan Peeth) की ओर से की गई है. वहीं ओडिशा सरकार ने भी इस पर हामि भरी उन्होंने कहा कि जगन्नाथ मंदिर जो भी फैसला लेगा सरकार उसके साथ खड़ी रहेगी.

दरअसल, 9 नवंबर को टैक्सास के ह्यूस्टन सिटी में एक रथयात्रा का आयोजन किया गया था. जबकि इससे पहले इस्कॉन ने कहा था कि वह भारत के बाहर असामयिक रथ यात्रा नहीं करेगा. लेकिन इसके बाद भी रथयात्रा का आयोजन किया गया. ह्युस्टन में रथयात्रा निकाली गई जिसमें भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष विराजमान थे, लेकिन जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तयां नहीं रखी गई थीं. यह सब कुछ 'फेस्टिवल ऑफ ब्लिस' के समय किया गया है.

गोवर्धन पीठ के प्रवक्ता ने की आलोचना

इस पर पुरी गोवर्धन पीठ के प्रवक्ता मातृ प्रसाद मिश्रा ने आलोचना की है. उन्होंने कहा- 'कि यह आयोजन ठीक नहीं था. यह हमारे धर्म के खिलाफ साजिश है. इस्कॉन ने आश्वासन दिया था कि वह आयोजन नहीं करेगा. लेकिन उसने विश्वास तोड़ दिया. हम भारत में इस्कॉन को बैन करने की मांग करते हैं.'

इस्कॉन की ओर से आया जवाब

ह्यूस्टन इस्कॉन के प्रमुख सारंग ठाकुर दास ने संस्था की वेबसाइट पर एक बयान अपलोड किया है. बयान में कहा गया है- 'कि हम पहले देवताओं के साथ रथ यात्रा का आयोजन करना चाहते थे. लेकिन समुदाय के कुछ लोगों ने चिंता जताई, तो योजना में बदलाव किया गया. हमारे उत्सव का मकसद बस एक ही था कि लोगों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन का मौका मिले.' इस्कॉन के अधिकारी इस मुद्दे पर पुरी के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. ओडिशा सरकार के कानून मंत्री हरिचंदन ने कहा कि मंदिर प्रशासन जो भी फैसला लेगा, राज्य सरकार उसका समर्थन करेगी.

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