'नेहरू से शुरू किया नंदन तक आ गए', Nandan Nilekani का कांग्रेस कनेक्शन, जिन्हें परीक्षाओं को लेकर पीएम मोदी ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी?
NTA सुधारों के लिए बनी हाई-पावर टास्क फोर्स में इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को शामिल किया गया है. जानिए उनका कांग्रेस से क्या संबंध रहा, और कितने काबिल हैं नीलेरणी?
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में सुधार के लिए बनाई गई हाई-पावर टास्क फोर्स में इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को शामिल किया है. खास बात यह है कि नंदन नीलेकणी साल 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. इसके बावजूद मोदी सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण समिति में जगह देकर यह संकेत दिया है कि इस सुधार प्रक्रिया में राजनीतिक बैकग्राउंड से ज्यादा विशेषज्ञता और अनुभव को महत्व दिया गया है.
एक दशक से अधिक समय बाद मोदी सरकार ने एक बार फिर नंदन नीलेकणी पर भरोसा जताया है. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब NEET समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बाद सरकार NTA में व्यापक सुधार की दिशा में काम कर रही है.
नंदलन नीलेकणी क्या है कांग्रेस कनेक्शन?
इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी मार्च 2014 में कांग्रेस में शामिल हुए थे और बेंगलुरु साउथ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. हालांकि उन्हें बीजेपी के उम्मीदवार अनंत कुमार से 2.28 लाख से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. राजनीति में आने से पहले यूपीए सरकार ने उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का प्रमुख नियुक्त किया था. उनके नेतृत्व में आधार (Aadhaar) परियोजना तैयार हुई, जिसने भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था की नींव रखी.
कांग्रेस लीडर पवन खेड़ा ने क्या कहा?
परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में बनाई गई हाई-पावर्ड टास्क फोर्स पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा,"ये लोग कांग्रेस के बिना काम नहीं कर सकते. इनके कई मुख्यमंत्री कहां से आए हैं? नरेंद्र मोदी भी कांग्रेस के बिना सांस नहीं ले सकते. वे हर बात की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू से करते हैं और अब नंदन नीलेकणी तक पहुंच गए हैं."
राजीव शुक्ला ने क्या कहा?
राज्यसभा एमपी राजीव शुक्ला एक्स पर लिखते हैं,"अरे ये नंदन नीलिकेनी जी हमारे साथ योजना आयोग में आधार कार्ड के प्रमुख थे जब मैं योजना मंत्री था. बाद में वह बैंगलोर से लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी थे."
कौन हैं नंदन नीलेकणी?
नंदन नीलेकणी इंफोसिस में गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं. 24 अगस्त 2017 को उन्हें इंफोसिस का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. उन्होंने आर. शेषशायी और रवि वेंकटेशन का स्थान लिया था, जो उस समय बोर्ड के सह-अध्यक्ष थे. कंपनी के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विशाल सिक्का के इस्तीफे के बाद नीलेकणी को दोबारा नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
कहां के रहने वाले हैं नीलेकणी?
2 जून 1955 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में जन्मे नंदन नीलेकणी का परिवार मूल रूप से उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी का रहने वाला है. उनके माता-पिता दुर्गा और मोहन राव नीलेकणी कोंकणी ब्राह्मण समुदाय से थे. उनके पिता मोहन राव नीलेकणी ने मैसूर और मिनर्वा मिल्स में महाप्रबंधक के रूप में काम किया और फैबियन समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे. उनके इन्हीं विचारों का प्रभाव नंदन नीलेकणी के शुरुआती जीवन पर भी पड़ा. उनके बड़े भाई विजय नीलेकणी अमेरिका के न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट से जुड़े रहे हैं.
कितना पढ़े हैं नीलेकणी?
शिक्षा की बात करें तो नंदन नीलेकणी ने बेंगलुरु के बिशप कॉटन बॉयज़ स्कूल, धारवाड़ के सेंट जोसेफ हाई स्कूल और कर्नाटक पीयू कॉलेज से शुरुआती पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की.
नीलेकणी ने कब की थी इंफोसिस की स्थापना?
साल 1981 में नंदन नीलेकणी ने अपने साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की. कंपनी की शुरुआत से ही वह निदेशक के रूप में जुड़े रहे और बाद में इंफोसिस को देश की अग्रणी आईटी कंपनियों में शामिल कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
नंदन लीलेकणी की नियुक्ति से क्या संदेश देना चाहती सरकार?
नंदन नीलेकणी की नियुक्ति के साथ केंद्र सरकार ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि इस महत्वपूर्ण सुधार प्रक्रिया में अलग-अलग सरकारों के साथ काम कर चुके अनुभवी विशेषज्ञों पर भरोसा किया जा सकता है और इस मामले में राजनीतिक पृष्ठभूमि से अधिक योग्यता और अनुभव को महत्व दिया गया है. इसकी ड्रैमेटिक और सस्पेंस वाली हेडलाइन सजेस्ट करें, थोड़ी बड़ी