मां काली की मूर्ति के मुंह में शराब डालते पुजारी का वीडियो वायरल, हिंदू परंपराओं पर उठा सवाल; यूजर्स बोले- 'पोंगा पंडित' का ढोंग
सोशल मीडिया पर काली माता की मूर्ति को शराब चढ़ाते एक पुजारी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. लाल वस्त्रों में दिख रहे पुजारी को बोतल से मूर्ति के मुंह में मदिरा डालते देखा गया, जिसे X यूजर अमित यादव ने ‘पोंगा पंडित’ बताते हुए आस्था का दुरुपयोग कहा. 31 सेकंड के इस वीडियो को 35 हजार से ज्यादा व्यूज मिले हैं. कुछ लोग इसे तांत्रिक परंपरा और पंचमकार साधना से जोड़कर सही ठहरा रहे हैं.;
सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया. इसमें लाल कपड़े पहने एक पुजारी काली माता की मूर्ति के मुंह में बोतल से शराब डालते दिख रहे हैं. पोस्ट करने वाले अमित यादव ने इसे 'पोंगा पंडित' का ढोंग बताया, जो भगवान के नाम पर लाभ कमाते हैं. यह तांत्रिक रीति का हिस्सा है, लेकिन रूढ़िवादी हिंदू इसे गलत मानते हैं. वीडियो को 35 हजार से ज्यादा व्यूज मिले, और प्रतिक्रियाएं समर्थन से आक्रोश तक बंटी हुई हैं. यह घटना धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आलोचना के बीच बहस छेड़ रही है.
24 जनवरी 2026 से, जब एक्स हैंडल पर अमित यादव नाम के यूजर ने एक छोटा सा वीडियो शेयर किया. वीडियो सिर्फ 31 सेकंड का था, लेकिन इसमें दिखाई गई घटना ने पूरे सोशल मीडिया को हिला दिया. वीडियो में एक पुजारी, जो लाल रंग के कपड़े पहने हुए है, एक काली माता की मूर्ति के सामने खड़े हैं. मूर्ति का मुंह खुला हुआ है, और पुजारी बोतल से सीधे शराब उसमें डाल रहे हैं. यह दृश्य किसी मंदिर या पूजा स्थल का लगता है, जहां अनुष्ठान चल रहा है. अमित यादव ने कैप्शन में हिंदी में लिखा, 'पोंगा पंडित भगवान के नाम पर सब कुछ डकार जाते हैं..." मतलब, ये ढोंगी पुजारी भगवान के नाम पर सब कुछ हड़प जाते हैं. उन्होंने इसे आस्था का दुरुपयोग बताया, जहां लोग व्यक्तिगत फायदे के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण करते हैं.
वीडियो वायरल होने के बाद क्या हुआ?
यह पोस्ट जल्दी ही 35 हजार से ज्यादा बार देखी गई. लाइक्स 697, रीपोस्ट 190, और रिप्लाई 23 से ज्यादा हो गए. लोगों की प्रतिक्रियाएं दो हिस्सों में बंट गईं. एक तरफ वे लोग थे जो इसे सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बता रहे थे. कुछ यूजर्स ने लिखा कि महाराणा प्रताप, महाराजा रणजीत सिंह और छत्रपति शिवाजी जैसे योद्धा भी बलि प्रथा या ऐसी रीतियां मानते थे. वे कहते हैं कि तंत्र में बलि या मदिरा चढ़ाना क्रूर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक है जहां जानवर का चयन खास होता है, और तरीका हलाल नहीं बल्कि एक झटके में. लेकिन वीडियो में दिखाया गया तरीका थोड़ा ड्रामेटिक लगता है, जैसे कैमरे के लिए बनाया गया हो. दूसरी तरफ, आलोचना करने वाले इसे ढोंग और व्यावसायीकरण बता रहे थे. जैसे, एक यूजर ने लिखा, 'अंधभक्त और पोंगा पंडितों ने देश को बर्बाद कर दिया.' एक अन्य ने कहा, 'ये सब क्या चल रहा है?' कुछ ने तो इसे क्रूरता बताया, खासकर अगर इसमें जानवरों की बलि शामिल हो. इसी तरह के अन्य वीडियो भी वायरल हो रहे थे, जहां लोग मंदिरों में दूध बर्बाद करते या प्रसाद फेंकते दिख रहे थे, और लोग पूछ रहे थे: 'क्या यह धर्म है?'.'
X: @amityadavbharat
क्या कहता है इस रीति का बैकग्राउंड
अब बात करते हैं इस रीति की पृष्ठभूमि की. हिंदू धर्म में काली माता को शराब चढ़ाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह मुख्य रूप से तांत्रिक परंपराओं से जुड़ा है. तंत्र शास्त्र में 'पंचमकार' नाम का एक अनुष्ठान होता है, जिसमें मांस, मछली, मदिरा (शराब), मुद्रा और मैथुन जैसे पांच तत्व शामिल हैं. ये तत्व वर्जनाओं को पार करने का प्रतीक हैं, यानी इंसान को सांसारिक मोह से ऊपर उठाने के लिए. पुराने ग्रंथों जैसे कुलचूड़ामणि तंत्र में इसका जिक्र है. कुछ मंदिरों में, जैसे पंजाब के पटियाला में काली देवी मंदिर, यह प्रथा आज भी चलती है. वहां भक्त काली को मदिरा चढ़ाते हैं, और इसे शक्ति की पूजा का हिस्सा माना जाता है. लेकिन रूढ़िवादी हिंदू, जो वेदों और पुराणों पर ज्यादा भरोसा करते हैं, इसे विचलन या गलत मानते हैं. उनके लिए पूजा में शराब जैसी चीजें अशुद्ध हैं और धर्म से भटकाव हैं। यह विवाद सदियों पुराना है – तंत्र बनाम वैदिक परंपरा.