महिला आरक्षण लागू होते ही क्यों सुर्खियों में आया Vertical Reservation सिस्टम? क्या है केंद्र की रणनीति, समझें पूरा विवाद

महिला आरक्षण लागू होने को लेकर जारी बहस के बीच भारत में वर्टिकल आरक्षण प्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. जानें क्यों यह मुद्दा चर्चा में है, महिला आरक्षण का सिस्टम कैसे काम करेगा और मोदी सरकार की क्या रणनीति है. साथ ही समझें कि SC, ST, OBC और EWS कोटे के बीच यह नया बदलाव कैसे संतुलन बनाएगा और इससे राजनीतिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा.

By :  धीरेंद्र कुमार मिश्रा
Updated On : 10 April 2026 5:14 PM IST

भारत में वर्टिकल आरक्षण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है क्योंकि महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) लागू होने की प्रक्रिया और उसके राजनीतिक प्रभावों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. लोकसभा और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण के प्रावधान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह व्यवस्था मौजूदा SC, ST, OBC और EWS आधारित वर्टिकल आरक्षण ढांचे के भीतर कैसे समायोजित होगी. इसी बीच केंद्र सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है. जबकि विपक्ष और कुछ विशेषज्ञ इसके क्रियान्वयन और संतुलन को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

इस मामले में तूल उस मिला जब पीएम मोदी ने कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का रास्ता साफ किया जाएगा. इसके लिए 16 से 18 अप्रैत तक के लिए संसद को विशेष सत्र भी बुलाया गया है. सरकार ने महिला आरक्षण का रास्ता साफ करने के लिए सहयोग की भी अपील है. वहीं विपक्ष की ओर से इसको लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं. अहम सवाल यह है कि जनगणना और परिसीमन से पहले अगर इस बिल को 2029 से लागू किया गया तो महिलाओं को एडजस्ट कहां किया जाएगा? जानें इन सवालों का डिटेल में जवाब.

आखिर पीएम ने क्या कह दिया कि मच गया बवाल?

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन की विशेष बैठक बुलाई गई है. इसका मकसद देश की महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का लाभ दिलाने के संकल्प को पूरा करना है. यह फैसला न केवल महिलाओं के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने वाला है, बल्कि दक्षिण भारतीय नेताओं और महिलाओं की चिंता को भी दूर करेगा. उन्होंने ये भी कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का मार्ग हमारी सरकार ने प्रशस्त किया था. इस कानून का लाभ महिलाओं को 2029 के लोकसभा चुनाव से मिलना शुरू हो जाए. इसके लिए कानून बनाने और मौजूदा प्रावधानों में संशोधन की जरूरत है. इसके लिए 16 से 18 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया गया है.

विवाद की वजह क्या है?

यहां पर सवाल यह है कि ऐसा तो सभी विपक्षी दल भी चाहते हैं, फिर विवाद क्या है? दरअसल, महिला आरक्षण लागू होने की स्थिति में बहस इसलिए तेज हुई है क्योंकि यह आरक्षण वर्टिकल कोटे के ऊपर नहीं, बल्कि उसके अंदर लागू होगा. यानी महिलाओं के लिए अलग 33% सीटें नहीं बनाई जाएंगी, बल्कि SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग की सीटों के भीतर ही महिलाओं के लिए एक-तिहाई हिस्सेदारी तय होगी. इसी वजह से यह सवाल उठा कि क्या इससे मौजूदा वर्टिकल आरक्षण का संतुलन प्रभावित होगा या नहीं.

दूसरी बड़ी वजह यह है कि भारत में वर्टिकल आरक्षण पहले से ही 50% की सीमा के आसपास या उससे अधिक दबाव में है. कई राज्यों में कोटा बढ़ाने की मांग चल रही है. आर्थिक आधार पर 10% EWS आरक्षण लागू होने के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि आरक्षण का आधार सामाजिक होना चाहिए या आर्थिक. ऐसे में महिला आरक्षण जोड़ने से यह सिस्टम और जटिल हो जाएगा.

वर्टिकल आरक्षण चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि महिला आरक्षण “हॉरिजॉन्टल आरक्षण” की श्रेणी में आता है, जो वर्टिकल कोटे के अंदर काम करता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य में 100 सीटें हैं और 15 SC सीटें हैं, तो उनमें से लगभग 5 सीटें SC महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. यही ओवरलैपिंग सिस्टम इस समय राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र है.

इस मसले पर केंद्र सरकार का कहना है कि यह नया प्रावधान मौजूदा वर्टिकल आरक्षण को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि उसे और समावेशी बनाएगा. सरकार का तर्क है कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रतिनिधिक होगी. हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं का मानना है कि इससे कोटा प्रणाली और जटिल हो जाएगी और विभिन्न वर्गों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

यही वजह है कि वर्टिकल आरक्षण आज चर्चा में है, क्योंकि यह केवल एक कोटा सिस्टम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन का बड़ा सवाल बन गया है. 9 अप्रैल से चर्चा इसलिए बढ़ गई क्योंकि हाल ही में लागू किए गए महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) में भी यही सवाल उठा कि यह व्यवस्था मौजूदा कोटा सिस्टम के साथ कैसे संतुलित होगी.

वर्टिकल आरक्षण चर्चा में क्यों?

वर्टिकल आरक्षण इन दिनों इसलिए चर्चा में है, क्योंकि इसे लेकर 50% आरक्षण सीमा, नए वर्गों की मांग, और सामाजिक न्याय बनाम आर्थिक आधार जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है. इसके अलावा, राज्यों में अलग-अलग कोटा बढ़ाने की मांग और EWS आरक्षण लागू होने के बाद पूरा ढांचा फिर से राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है. इस बहस की बुनियाद उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा और सिद्धांत तय किए थे, यानी इंद्र साहनी केस. इस मसले पर सरकार का कहना यह व्यवस्था खत्म नहीं हो रही, बल्कि इसका अपडेशन और विस्तार हो रहा है.

महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023) पास होने के बाद सवाल यह है कि महिलाओं की 33% सीटें कहाँ से और कैसे एडजस्ट की जाएंगी तो इसका जवाब सिस्टम में “रोटेशन + मौजूदा सीटों के भीतर आरक्षण” के मॉडल से जुड़ा है.

महिला आरक्षण की सीटें कहां एडजस्ट होंगी?

1. महिलाओं के लिए अलग नई सीटें नहीं बनाई जाएंगी. बल्कि जो मौजूदा सीटें हैं, उन्हीं में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी.

2. आरक्षित सीटें स्थायी नहीं होंगी. हर परिसीमन के बाद और हर चुनाव चक्र में सीटों का “rotation” किया जाएगा. मतलब एक चुनाव में जो सीट महिला के लिए आरक्षित होगी. अगले परिसीमन के बाद वह दूसरी सीट हो सकती है

3. परिसीमन के बाद तय होगा कौन सी सीट आरक्षित होगी. सीटों का चयन जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्र और निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्गठन के आधार पर होगा. यानी महिलाओं के लिए सीटें “फिक्स” नहीं होंगी, बल्कि बदलती रहेंगी.

4. SC/ST और ओबीसी सीटों में ही महिलाओं को एडजस्ट किया जाएगा. जो सीटें पहले से आरक्षित हैं, उन्हीं के अंदर भी 1/3 महिला आरक्षण लागू होगा. यानी SC/ST और ओबीसी महिलाओं को अलग से अवसर मिलेगा, लेकिन मौजूदा कोटे के भीतर ही. आसान भाषा में कहा जाए तो नई सीटें नहीं बनेंगी. मौजूदा सीटों में से 33% महिलाओं को दी जाएंगी. हर परिसीमन के बाद सीटें बदलती रहेंगी. SC/ST कोटे के अंदर भी महिलाओं को हिस्सा मिलेगा

बिल की खासियत क्या

महिलाओं के लिए आरक्षण: यह बिल लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में महिलाओं के लिए, जहां तक संभव हो, सभी सीटों में से एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है. यह नियम लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में SC और ST के लिए आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा.

आरक्षण की शुरुआत: यह आरक्षण इस बिल के लागू होने के बाद होने वाली जनगणना के प्रकाशित होने के बाद ही प्रभावी होगा. जनगणना के आधार पर, महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने हेतु परिसीमन (सीमा-निर्धारण) किया जाएगा. यह आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए प्रदान किया जाएगा. हालांकि, यह तब तक जारी रहेगा, जब तक संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा कोई अन्य तिथि निर्धारित नहीं कर दी जाती.

सीटों का रोटेशन: महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें प्रत्येक परिसीमन के बाद बदली (रोटेट की) जाएंगी, जैसा कि संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा निर्धारित किया जाएगा.

अहम सवाल क्या?

  • क्या महिलाओं के लिए आरक्षण की नीति उनके सशक्तिकरण के लिए एक प्रभावी साधन के रूप में कार्य कर सकती है ?
  • क्या विधानमंडलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के वैकल्पिक तरीके व्यावहारिक हैं?
  • क्या बिल में आरक्षण के लिए प्रस्तावित तरीके में कोई समस्याएं हैं?

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