'आज नहीं तो कल सबको मिलेगा न्याय', UGC के नए नियम रहेंगे या जाएंगे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के यूजीसी (UGC) नियमों पर आए फैसले के बाद अब देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में नीतिगत, प्रशासनिक और अकादमिक स्तर पर कई बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं. यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों, छात्रों और फैकल्टी तीनों के लिए दिशा तय करने वाला है.;
सुप्रीम कोर्ट के यूजीसी (UGC) नियमों पर आए फैसले के बाद अब देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में नीतिगत, प्रशासनिक और अकादमिक स्तर पर कई बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं. यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों, छात्रों और फैकल्टी के लिए दिशा तय करने वाला है. वहीं यूजीसी के नए नियमों को लेकर संसदीय कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि यूजीसी ने कमेटी की कई सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया.
इस मसले सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा था कि यूजीसी को रेगुलेशन बनाने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार संविधान, संघीय ढांचे और राज्यों की शक्तियों के दायरे में होना चाहिए. अदालत ने यह भी दोहराया कि शिक्षा में गुणवत्ता और समानता जरूरी है, पर राज्यों की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
विश्वविद्यालयों पर क्या असर पड़ेगा?
- केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों को अब यूजीसी नियमों की कानूनी वैधता के साथ समीक्षा करनी होगी.
- जिन नियमों पर रोक या सवाल लगे हैं, उन पर सरकार या यूजीसी नई गाइडलाइंस या संशोधन सामने आ सकता है.
- प्रमोशन, नियुक्ति और शैक्षणिक ढांचे से जुड़े नियमों में स्पष्टता आएगी.
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
- दाखिला, मूल्यांकन और डिग्री से जुड़े नियमों में स्थिरता आएगी.
- एससी-एसटी या ओबीसी छात्रों मी मनमानी या अस्पष्ट नियमों पर लगाम लगेगी.
- छात्रों को कानूनी रूप से सुरक्षित और पारदर्शी सिस्टम मिलेगा.
- शिक्षकों और फैकल्टी के लिए आगे क्या?
- प्रमोशन और भर्ती नियमों में स्पष्ट मानक तय होने की उम्मीद है.
- परफॉर्मेंस आधारित सिस्टम पर दोबारा विचार संभव हो सकता है.
- विवादित प्रावधानों पर यूजीसी को री-ड्राफ्टिंग करनी पड़ सकती है.
अगला कदम क्या?
- केंद्र सरकार और यूजीसी को अब राज्यों से संवाद बढ़ाना होगा.
- राज्य सरकारें अपने विश्वविद्यालय अधिनियमों के साथ यूजीसी नियमों का संतुलन तलाशेंगी.
- भविष्य में शिक्षा नीति पर कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की भूमिका अहम होगी.
क्या UGC के संशोधित नियम आएंगे?
शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी जल्द ही संशोधित या स्पष्ट नियम ला सकता है.सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखकर नए फ्रेमवर्क तैयार होंगे. विवादित धाराओं को या तो बदला जाएगा या फिर चरणबद्ध लागू किया जाएगा.
क्या संकेत देता है फैसला?
यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक तरह से वेक-अप कॉल है. शिक्षा सुधार जरूरी हैं, लेकिन संविधान, संवाद और संतुलन के साथ. आने वाले महीनों में यूजीसी, केंद्र और राज्य सरकारों के फैसले तय करेंगे कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में जाएगी.
किसने क्या कहा?
अदालत ने वही किया जिसकी उम्मीद थी - निशिकांत दुबे
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने यूजीसी के नए रूल्स पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद लोगों से संविधान, मोदी सरकार पर भरोसा रखने का आग्रह किया. उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए कहा, "विवाद को गलत दिशा दी जा रही है. किसी भी राजनीतिक दल ने संसद में इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा नहीं की. मोदी सरकार ने गरीबों का समर्थन करने के लिए 10% EWS आरक्षण लागू किया." इसके अलावा उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जिसकी उम्मीद थी.
दिग्विजय सिंह आये सामने, साफ किया संसदीय समिति का रुख
यूजीसी रूल्स को लेकर बढ़ते राजनीतिक आरोपों के बीच संसद की शिक्षा पर स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि समिति झूठी शिकायतों के लिए सजा के प्रावधान को हटाने के लिए जिम्मेदार नहीं थी. समिति ने कभी भी झूठे मामलों के लिए दंड हटाने की सिफारिश नहीं की. सामान्य श्रेणी के छात्रों को बाहर करने का सुझाव भी नहीं दिया.
उनके मुताबिक UGC ने दो महत्वपूर्ण सिफारिशों को नजरअंदाज किया. इक्विटी समितियों में SC, ST और OBC सदस्यों का 50% से अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भेदभावपूर्ण व्यवहार क्या है, इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करना था. उन्होंने कहा कि स्पष्ट परिभाषाओं की कमी के कारण ही अब कैंपस में झूठे मामलों का डर फैल रहा है.
2012 के नियमों में संतुलन था, नए में नहीं बीजेपी विधायक
बीजेपी विधायक अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि ये नियम एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहां सामान्य श्रेणी को दोषी माना जाता है. जबकि झूठी शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा उपायों को हटा दिया गया है. हालांकि, नियमों का इरादा सकारात्मक हो सकता है, पर उस पर अमल करने का प्रावधान गलत है. 2012 के नियमों में सुरक्षा उपायों के साथ शिकायतों की अनुमति थी. 15 जनवरी के नियमों में जांच और संतुलन की कमी है. सामान्य श्रेणी को बाहर करना अनुचित है. निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जरूरत है. 2012 के फ्रेमवर्क में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के लिए सजा का प्रावधान था. इस प्रावधान को हटाने से इसका दुरुपयोग बढ़ सकता है. छात्र, शिक्षक और वाइस-चांसलर तेजी से चिंतित हो रहे हैं.
सरकार कोर्ट के निर्देश का पालन करेगी - सम्राट चौधरी
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मामला विचाराधीन है और सरकार न्यायिक निर्देशों के अनुसार सख्ती से काम करेगी. कोर्ट अपना काम करेगा. न्यायपालिका जो भी फैसला करेगी, सरकार उसी के अनुसार काम करेगी.
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा कि यह फैसला सम्मानजनक और जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को 'अस्पष्ट' पाया, विशेषज्ञ समीक्षा की मांग की है.
आज नहीं तो कल, नए नियम सबके लिए न्याय वाले होंगे - विनीत जिंदल
सु्प्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद UGC में याचिकाकर्ता अधिवक्ता विनीत जिंदल के मुताबिक UGC का ये मामला अब एक या दो महीने में ही हल नहीं होने वाला है. ये पूरा प्रकरण कोर्ट में 1-2 साल तक भी खिंच सकता है. हालांकि, सरकार चाहे तो पहले भी हो सकता है, लेकिन इसकी संभावना कम है. बावजूद इसके अदालत के फैसले यह तय हो गया है कि आज नहीं तो कल, जब भी अब UGC के नए नियम आएंगे, वो सबके साथ न्याय करने वाले ही होंगे. मामला कोर्ट की निगरानी में रहेगा.
नए नियम बनाने होंगे - विष्णु शंकर जैन
सुप्रीम कोर्ट के लॉयर विष्णु शंकर जैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी की नई गाइडलाइन्स पर रोक लगा दी है. इसका मतलब है कि न्यायालय इस नियमावली और उसके ढांचे से संतुष्ट नहीं है. मतलब साफ है यूजीसी को नए सिरे से नियम बनाने होंगे. पूर्व में कोर्ट के आदेशों के अनुसार इसे लागू नहीं किया गया था, इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई है.
सरकार जवाब दे - कल्पना श्रीवास्तव
एडवोकेट कल्पना श्रीवास्तव का कहना है कि जनरल कैटेगरी का लड़का रैगिंग सहता है. शिकायत करता है तो उल्टा उसी पर क्रॉस केस करा दिया जाता है. UGC का ये नया नियम क्या बता रहा है? कि शिकायत करने वाला ही दोषी? ये न्याय है या एकतरफा जुल्म? क्या कॉलेज अब पढ़ाई के लिए हैं या झूठे केस लड़ने के लिए तैयार है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार जवाब दे!