UGC Controversy: अब Damage Control मोड में सरकार! नए नियमों पर दूर करेगी कंफ्यूजन

UGC के नए Equity in Higher Education Regulations 2026 पर विवाद बढ़ गया है. सरकार विपक्ष की भ्रामक दावों को रोकने और छात्रों में भ्रम कम करने की तैयारी में है.;

( Image Source:  ANI )
Edited By :  प्रवीण सिंह
Updated On : 27 Jan 2026 11:14 AM IST

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों - Equity in Higher Education Institutions Regulation, 2026 - को लेकर चल रहे विवाद के बीच सरकार अब सटीक तथ्यों के जरिए भ्रम और भ्रामक जानकारी को रोकने की तैयारी कर रही है. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार यह स्पष्ट करेगी कि नियमों का दुरुपयोग किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगा.

सूत्रों ने बताया कि विपक्ष इस मुद्दे को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है, जिसका असर अब यूपी के बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकर अग्निहोत्री के इस्तीफे और बीजेपी युवा मोर्चा के एक नेता के इस्तीफे तक पहुंच गया है, जो संसद के बजट सत्र शुरू होने से पहले सामने आए.

इस्तीफों और आलोचनाओं का केंद्र

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकर अग्निहोत्री और बीजेपी युवा मोर्चा के नेता (अभी नाम सार्वजनिक नहीं) का कहना है कि नए नियम विभाजन फैलाएंगे और सुधार की बजाय अशांति पैदा करेंगे. अग्निहोत्री ने नियमों को “ब्लैक लॉ” बताया और कहा कि यह शैक्षणिक माहौल को खराब करेंगे, इसलिए इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए.

विवाद तब और बढ़ा जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय पर सवालों से बचते हुए मीडिया के सामने सिर्फ “हर हर महादेव” का जाप करने का आरोप लगा. वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने भी सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि सरकार विवादों पर खुली चर्चा के लिए तैयार है और नियम समानता को बढ़ावा देने के लिए हैं.

UGC के नए नियम क्या कहते हैं?

UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026, में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए शिकायत निवारण, समावेशन और समर्थन का ढांचा तय किया गया है. ये नियम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप बनाए गए हैं. कोर्ट ने UGC से 2012 के एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों के कार्यान्वयन पर अपडेटेड नियम पेश करने को कहा था.

पृष्ठभूमि में, 2016 में रोहित वेमुला (University of Hyderabad) और 2019 में पायल तडवी (Topiwala National Medical College, मुंबई) की मौत के मामले थे, जिनमें जातिगत उत्पीड़न की बात सामने आई थी. नए नियमों का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव रोकना और शिकायतों का समय पर निवारण सुनिश्चित करना है.

आलोचकों की प्रतिक्रिया

हालांकि आलोचक कहते हैं कि इस नियम के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को अपराधी के रूप में लेबल किया गया है. अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि ये नियम ब्राह्मणों के खिलाफ उत्पीड़न को बढ़ावा दे सकते हैं और सामाजिक अशांति का कारण बन सकते हैं. राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी आई है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे गंभीर मुद्दा बताया. उन्होंने X पर लिखा, "शंकराचार्य और उनके शिष्यों पर लाठीचार्ज और प्रशासनिक दबाव यह दिखाता है कि BJP के शासन में संविधान, धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में हैं. सत्य सामने आना चाहिए. राज्य संविधान के तहत चलेगा, डर के तहत नहीं."

सपा नेता और पूर्व बरेली सांसद प्रवीण सिंह आरोन ने भी कहा, "किसी वरिष्ठ PCS अधिकारी के इस्तीफे की परिस्थितियां यह दिखाती हैं कि यह मुद्दा जाति या धर्म का नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा और संविधान का है."

सरकार का रुख

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार जल्द ही स्पष्ट करेगी कि UGC के नियम केवल समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए हैं, और उनका दुरुपयोग किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं होगा. सरकार का लक्ष्य है कि सत्यता और तथ्य पेश करके विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को रोका जाए, जिससे छात्रों और विश्वविद्यालयों में अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव न बढ़े.

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