ये लम्हा है गर्व का! हरियाणा की बेटी अक्षिता धनखड़ ने राष्ट्रपति संग तिरंगा फहराया, देखें Photos

हरियाणा के झज्जर जिले के कासनी गांव की बेटी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ ने 26 जनवरी 2026 को देश को गर्व का पल दिया. 77वें गणतंत्र दिवस पर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया. यह सम्मान उनकी मेहनत, अनुशासन और देशसेवा का प्रतीक है। NCC से शुरुआत कर AFCAT पास करने तक का उनका सफर लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है. पिता का अधूरा सपना पूरा कर अक्षिता ने साबित किया कि आज की भारतीय बेटियां हर ऊंचाई छू सकती हैं.;

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Edited By :  रूपाली राय
Updated On : 26 Jan 2026 2:55 PM IST

हरियाणा के झज्जर जिले के छोटे से कासनी गांव की बेटी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ ने एक ऐसा कारनामा किया है, जिससे पूरे देश को गर्व हो रहा है. उन्होंने अपने पिता का अधूरा सपना पूरा कर दिखाया है. बहुत मेहनत, लगन और अनुशासन से उन्होंने खुद को उस ऊंचाई तक पहुंचाया है, जहां से उनका सबसे बड़ा और खूबसूरत सपना सच होने जा रहा है. 26 जनवरी 2026 को, जब देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, तब अक्षिता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया.

यह मौका किसी भी सैनिक या अधिकारी के लिए बहुत बड़ा सम्मान होता है. यह सम्मान सिर्फ वही लोग पाते हैं, जो अपनी ड्यूटी, अनुशासन और देशसेवा में सबसे आगे रहते हैं. अक्षिता का यह चयन हुआ है, तो यह बात साफ हो जाती है कि भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका अब बहुत मजबूत हो गई है. वे अब सिर्फ साथ देने वाली नहीं, बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व करने वाली बन चुकी हैं. 

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अक्षिता धनखड़ आज देश की करोड़ों बेटियों के लिए एक जीती-जागती मिसाल बन गई हैं. उनका नाम सुनते ही हर कोई गर्व से सीना चौड़ा कर लेता है. यह दिखाता है कि आज की भारतीय बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. वे आसमान की सबसे ऊंची उड़ान भर सकती हैं, देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा सकती हैं और हर चुनौती को पार कर सकती हैं. अक्षिता ने साबित कर दिया है कि अगर हौसला मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी सपना बड़ा क्यों न हो, उसे पूरा किया जा सकता है. 

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जब 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर तिरंगा लहराया गया, तो यह पल सिर्फ झज्जर या हरियाणा का नहीं, बल्कि पूरे भारत का गर्व का क्षण था. आने वाली पीढ़ियां इस दृश्य को देखकर प्रेरणा लेंगी कि मेहनत और लगन से कुछ भी हासिल किया जा सकता है. अक्षिता के परिवार में खुशी का माहौल है. उनके पिता की कुछ महीने पहले बीमारी से मौत हो गई थी. अगर वे आज जिंदा होते, तो अपनी बेटी के इस बड़े सम्मान को देखकर बहुत खुश होते.

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अक्षिता की दादी सुनहरी देवी ने बहुत इमोशनल होकर कहा, 'मुझे आज बहुत खुशी हो रही है. मेरी पोती ने पूरे परिवार का नाम रोशन कर दिया है. यह मेरी जिंदगी का सबसे खुशी का पल है. अक्षिता हमेशा फोन करके बात करती रहती है। काश सभी बेटियां ऐसे ही नाम रोशन करती रहें.' अक्षिता के चाचा सितेंदर धनखड़ भी भारतीय वायुसेना में तैनात हैं.

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उन्होंने बताया, 'मुझे बहुत गर्व हो रहा है. यह हमारे लिए बहुत गौरवान्वित करने वाला पल है. पूरे गांव, गली-मोहल्ले में बस अक्षिता की ही चर्चा है. हमारी बेटी ने पूरे हरियाणा का नाम ऊंचा कर दिया है. यह हर बेटी के लिए प्रेरणा का मौका है.' अक्षिता का सफर छोटे गांव से शुरू हुआ, NCC से आगे बढ़ा, AFCAT परीक्षा पास की और आज भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया. उनका यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार के लिए, बल्कि देश की हर बेटी के लिए एक बड़ा संदेश है - सपने देखो, मेहनत करो और आगे बढ़ो। आज पूरे देश को अक्षिता पर बहुत नाज है. 

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