सोनम वांगचुक के आंदोलनों का कैसा रहा है सक्सेस रेट, कब-कब किए प्रोटेस्ट, कितनी मिली सफलता?

सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है, ये पहली बार नहीं था कि वे किसी अनशन पर बैठे हो. इससे पहले कई बार वे अलग-अलग मांगों को लेकर प्रोटेस्ट कर चुके हैं. कई बार उनके सामने सरकार को झुकना भी पड़ा है.

Sonam Wangchuk Protest History

Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On :

Sonam Wangchuk Protest History: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं. छात्रों के हित, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सामाजिक मुद्दों को लेकर आवाज उठाने वाले वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर लंबा अनशन किया. करीब 26 दिनों तक चली उनकी भूख हड़ताल के बाद सरकार के साथ बातचीत हुई और लिखित आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया.

सोनम वांगचुक के आंदोलनों का इतिहास केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा है. उनका सामाजिक संघर्ष शिक्षा सुधार, लद्दाख के संवैधानिक अधिकार और पर्यावरण संरक्षण के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है. गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित वांगचुक ने अहिंसक आंदोलन और भूख हड़ताल को अपनी आवाज उठाने का प्रमुख माध्यम बनाया है. अपने जीवन में वांगचुक कई बड़े आंदोलन कर चुके हैं. जिनमें से कुछ सफल रहे हैं तो कुछ बीच में ही रहे.

वांगचुक ने कब-कब किए आंदोलन?

1. सोनम वांगचुक ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद महसूस किया कि लद्दाख के छात्र मौजूदा सरकारी शिक्षा प्रणाली में लगातार पिछड़ रहे हैं. जिसको लेकर सोनम वांगचुक ने साल 1988 में सेकमोल आंदोलन किया था. उन्होंने साल 1988 में SECMOL (Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की. यह लद्दाख में वैकल्पिक और व्यावहारिक शिक्षा मॉडल की शुरुआत थी, जिसका उद्देश्य छात्रों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बेहतर शिक्षा देना था. 

X/ @Wangchuk66

2. जून 2020 में भारत-चीन सीमा विवाद के बाद सोनम वांगचुक ने देशवासियों से चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की. उन्होंने लोगों से अपनी खरीदारी की ताकत यानी 'वॉलेट पावर' का इस्तेमाल करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का सामाजिक अभियान शुरू करने का आह्वान किया.

3. मार्च 2024 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में 21 दिनों का मैराथन अनशन किया. इस आंदोलन के बाद उन्होंने लेह से दिल्ली तक दिल्ली चलो पदयात्रा का नेतृत्व भी किया. इस अभियान का उद्देश्य लद्दाख के लोगों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना था. 

X/ @Wangchuk66

4. सितंबर 2025 में सोनम वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर फिर आंदोलन किया. इस दौरान लेह में हुए प्रदर्शनों के बाद बने हालातों के बीच उन्हें हिरासत में भी लिया गया था.

5. जून-जुलाई 2026 में सोनम वांगचुक ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की. उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में 28 जून 2026 से अनशन शुरू किया, जो करीब 26 दिनों तक चला. 

X/ @Wangchuk66

सोनम वांगचुक के कितने आंदोलन सफल रहे?

1. लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए गए आंदोलनों ने राष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया. इन आंदोलनों के बाद केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ी. 

X/ @Wangchuk66

2. नीट पेपर लीक को लेकर किया गया उनका अनशन तो सरकार से बातचीत के साथ खत्म हो गया. सरकार ने उनकी 3 शर्तें मानी. हालांकि आंदोलन की जो सबसे बड़ी मांग है शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा वो नहीं हो पाया है. लेकिन सरकार को सोनम वांगचुक से बातचीत करके उनका अनशन तुड़वाना पड़ा.

3. सोनम वांगचुक के सबसे सफल अभियानों में SECMOL और कृत्रिम ग्लेशियर यानी आइस स्तूप परियोजना शामिल हैं. SECMOL ने लद्दाख में शिक्षा के क्षेत्र में एक नया मॉडल पेश किया, जबकि आइस स्तूप अभियान ने पानी संरक्षण और जल संकट से निपटने के लिए नई तकनीक को लोकप्रिय बनाया. इन पहलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार जैसे सम्मानों से भी सम्मानित किया गया.

Similar News