'मैं Epstein से 3-4 बार मिला हूं, मेरे बॉस उसे जानते थे', आरोपों पर हरदीप पुरी ने राहुल गांधी को खूब सुनाया

लोकसभा में राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ‘Epstein Files’ को लेकर सरकार पर तीखे आरोप लगाए. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विस्तृत सफाई दी.;

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By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 11 Feb 2026 5:11 PM IST

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण ने बुधवार को सियासी तापमान अचानक बढ़ा दिया. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से लेकर कथित 'Epstein Files' तक, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर तीखे आरोप लगाए. उनके भाषण के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को 'बेबुनियाद' बताते हुए कड़ा जवाब दिया.

संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह यह टकराव चर्चा का विषय बना रहा. एक ओर राहुल गांधी ने व्यापार समझौते को 'complete surrender' करार दिया, तो दूसरी ओर हरदीप पुरी ने उन्हें 'baseless allegations' लगाने वाला नेता बताते हुए कहा कि देश चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द तीसरे स्थान पर पहुंचने वाला है.

क्या राहुल गांधी ने संसद में बेबुनियाद आरोप लगाए?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के भाषण पर रिएक्शन देते हुए लिखा कि'आज एक युवा नेता ने संसद के सामने कुछ बातें रखीं. उन्हें बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है. पुरी ने आगे नेताओं की दो श्रेणियों का जिक्र करते हुए कहा कि' नेताओं की दो तरह की श्रेणियां होती हैं. एक वे जो राजनीतिक व्यवस्था में जिम्मेदारी निभाते हैं और अपना जीवन समाज सेवा तथा देश को बदलने में समर्पित कर देते हैं, और दूसरे वे नेता जो कभी-कभार देश में आते हैं, और जब संसद में आते हैं तो किसी के ठोस जवाब देने पर उसे सुने बिना ही सदन से बाहर चले जाते हैं. आज भी वह अपना भाषण देने के बाद चले गए. उन्होंने इशारों में राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता संसद में भाषण देने के बाद जवाब सुने बिना ही सदन से बाहर चले जाते हैं.

Epstein Files से जुड़े आरोपों पर हरदीप पुरी ने क्या सफाई दी?

राहुल गांधी ने अपने भाषण में हरदीप पुरी का नाम कथित ‘Epstein Files’ से जोड़ा था. इस पर पुरी ने साफ किया कि, 'आईपीआई में मेरे बॉस एपस्टीन को जानते थे और मैं उनसे केवल कुछ मौकों पर, सटीक कहूं तो तीन या अधिकतम चार बार, एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में मिला था। हमारी मुलाकातों का उन अपराधों से कोई संबंध नहीं था जिनका उन पर आरोप है.' पुरी ने कहा कि यह मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं और उनका कथित अपराधों से कोई संबंध नहीं था. उन्होंने दोहराया: 'उन्हें (राहुल गांधी को) बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है.'

क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौता ‘चोकहोल्ड’ में साइन हुआ?

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'मेरा मानना है कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल हैं, ऐसे समझौते (भारत-अमेरिका व्यापार समझौते) पर हस्ताक्षर तब तक नहीं करेगा जब तक उस पर किसी तरह का दबाव या शिकंजा न हो. उन्होंने दावा किया कि भारत को टैरिफ, डिजिटल डेटा और कर नियमों में भारी रियायतें देनी पड़ीं.

राहुल गांधी के मुताबिक हम टैरिफ के मुद्दे पर झुक गए हैं, हमने अपना डेटा सौंप दिया है, डिजिटल व्यापार नियमों पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया है, डेटा लोकलाइजेशन नहीं है, अमेरिका को डेटा का मुक्त प्रवाह दिया गया है, डिजिटल टैक्स पर सीमा तय कर दी गई है, सोर्स कोड के खुलासे की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है और 20 साल की टैक्स छूट दे दी गई है.' उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता देश के आर्थिक हितों के खिलाफ है.

क्या यह किसानों और टेक्सटाइल उद्योग के खिलाफ समझौता है?

राहुल गांधी ने समझौते को किसानों और छोटे उद्योगों के लिए खतरा बताया कि 'भारत के पास जो सबसे मूल्यवान संपत्ति है और जो भविष्य में भी रहेगी, उसे सौंप दिया गया है. हमारे किसानों को विशाल और मशीनीकृत अमेरिकी खेतों की दया पर छोड़ दिया गया है.' उन्होंने यह भी कहा कि 'हमारा टेक्सटाइल उद्योग खत्म कर दिया गया है. अब बांग्लादेश हमारे वस्त्र उद्योग को भी खत्म करने जा रहा है, हमारी ऊर्जा सुरक्षा सौंप दी गई है और हम जिससे चाहें उससे तेल भी नहीं खरीद सकते.'

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