लाठीचार्ज से लेकर गोली चलाने तक का ऑर्डर कौन देता है? पैलेट गन से लेकर AK-47 तक के केस में समझें- Explainer

सदन में आज राहुल गांधी ने अमित शाह का सीधा नाम लेते हुए कहा कि गृह मत्री ने फायरिंग के आदेश दिए हैं जिसके बाद बवाल मच हुआ है और अब चर्चा की जा रही है आखिर ये फायरिंग करने के आर्डर किसके हाथ में होता है तो आइए जानते हैं...

By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 29 July 2026 7:09 PM IST

लोकसभा में 29 जुलाई को परीक्षा संशोधन बिल पास हो गया. लेकिन आज के राहुल गांधी के 50 मिनट भाषण के दौरान खूब टोका टाकी और बवाल देखने को मिला है. माहौल वहां पर बिगड़ गया जब राहुल गांधी ने अमित शाह का सीधा नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने फायरिंग के आदेश दिया उस समय सदन में खूब हंगामा गया और सत्ता पक्ष इसका सबूत मांगने लगा और माफी की मांग की. जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल हो गया है कि आखिर फायरिंग का आदेश देता कौन हैं क्या ये किसी मंत्री के हाथ में होता है तो आइए जानते हैं क्या कहता है भारतीय कानून?

इसका जवाब समझने के लिए कानून और दिल्ली की हालिया घटना को अलग-अलग देखना जरूरी है. सबसे पहले समझिए- पुलिस फायरिंग का आदेश कौन देता है? यह कहना कि भारत में हर स्थिति में गोली चलाने का आदेश सिर्फ जिलाधिकारी (DM) ही दे सकता है, कानूनी रूप से बहुत व्यापक और अधूरा बयान होगा.

वर्तमान आपराधिक प्रक्रिया कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 148 के मुताबिक किसी गैरकानूनी जमावड़े या ऐसी पांच या उससे अधिक लोगों की सभा, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो, को हटने का आदेश कार्यकारी मजिस्ट्रेट या थाना प्रभारी दे सकता है. थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में कम से कम सब-इंस्पेक्टर रैंक का पुलिस अधिकारी भी यह आदेश दे सकता है.

अगर भीड़ आदेश के बाद नहीं हटती या उसके व्यवहार से साफ है कि वह हटने को तैयार नहीं है, तो संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट या अधिकृत पुलिस अधिकारी बल का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर कर सकता है. इसलिए 'पुलिस कभी खुद बल प्रयोग का फैसला नहीं कर सकती' कहना भी सही नहीं होगा. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण फर्क है- भीड़ को तितर-बितर करने की सामान्य शक्ति और किसी खास हथियार/गोली का इस्तेमाल अधिकृत करने का सवाल एक ही चीज नहीं है. हथियारों के इस्तेमाल पर स्थानीय कानून, पुलिस नियम, SOP और मौके की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं.

क्या गृह मंत्री सीधे गोली चलाने का आदेश दे सकते हैं?

सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में किसी केंद्रीय या राज्य मंत्री का यह काम नहीं है कि वह मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को सीधे कहे कि 'गोली चलाओ.' गृह मंत्री का मंत्रालय पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था की प्रशासनिक निगरानी से जुड़ा हो सकता है, लेकिन किसी प्रदर्शन स्थल पर बल प्रयोग का तत्काल परिचालन निर्णय संबंधित कानूनी और पुलिस कमांड व्यवस्था के तहत लिया जाता है. यानी राजनीतिक जिम्मेदारी और मौके पर कानूनी/ऑपरेशनल आदेश-श्रृंखला को एक ही चीज मानना सही नहीं है.

फिर DM या Executive Magistrate की भूमिका क्या होती है?

BNSS की धारा 148 भीड़ को हटाने के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट की भूमिका स्पष्ट करती है. वहीं अगर कोई सभा सामान्य पुलिस बल से नहीं हटाई जा सकती और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उसे हटाना जरूरी हो, तो BNSS की धारा 149 के तहत मौजूद जिला मजिस्ट्रेट या उसके द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट सशस्त्र बलों की मदद से उसे तितर-बितर कराने का निर्देश दे सकता है. कानून में यह भी कहा गया है कि बल प्रयोग करते समय जरूरत से ज्यादा बल और नुकसान नहीं किया जाना चाहिए. यानी उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना है, अनावश्यक नुकसान पहुंचाना नहीं.

 

एक और महत्वपूर्ण अपवाद

BNSS की धारा 150 यह भी बताती है कि यदि सार्वजनिक सुरक्षा स्पष्ट रूप से खतरे में हो और किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट से संपर्क करना संभव न हो, तो कुछ परिस्थितियों में सशस्त्र बल का अधिकृत अधिकारी भी कार्रवाई कर सकता है. बाद में जब मजिस्ट्रेट से संपर्क संभव हो जाए, तो उसके निर्देशों का पालन करना होता है. इसलिए कानून को सिर्फ “DM आदेश देगा, तभी पुलिस कुछ कर सकती है” के एक वाक्य में समेटना सही नहीं होगा.

दिल्ली में मामला अलग क्यों है?

अब आते हैं उस घटना पर जिसने संसद में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया. दिल्ली में पुलिस व्यवस्था का अपना विशेष कानूनी ढांचा है. Delhi Police Act, 1978 की धारा 70(1)(b) के तहत केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए ACP या उससे ऊपर रैंक के कुछ पुलिस अधिकारियों को निर्दिष्ट क्षेत्र में Executive Magistrate की शक्तियां दे सकती है. इसलिए दिल्ली में अधिकृत DCP, परिस्थितियों के अनुसार, Executive Magistrate की शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है. यही प्रावधान 20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े पैलेट गन विवाद में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.

 

जंतर-मंतर पर पैलेट गन को लेकर क्या सामने आया?

20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान दिल्ली में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था. बाद में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हुआ. पहले सामने आई एक General Diary Entry में दावा किया गया था कि DCP North राजा भाटिया ने RAF के अधिकारियों के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी थी. रिपोर्ट के मुताबिक RAF ने कार्रवाई के दौरान आंसू गैस के गोले, अन्य एंटी-रायट उपकरण और प्लास्टिक पैलेट के दो राउंड इस्तेमाल किए. इस दस्तावेज की टाइमिंग और प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल उठे हैं और दिल्ली पुलिस की जांच का उल्लेख रिपोर्टों में है. इसके बाद 28 जुलाई को सामने आए एक अलग दस्तावेज ने मामले को और गंभीर बना दिया.

दूसरे दस्तावेज में DCP का नाम आया

Newslaundry की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दस्तावेज में नई दिल्ली जिले के DCP सचिन शर्मा का नाम है. रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने Executive Magistrate के तौर पर 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए RAF को गैस, लाठीचार्ज और firearms के इस्तेमाल तथा गिरफ्तारी की अनुमति दी थी. दस्तावेज में BNSS की धारा 149 का हवाला दिया गया है.

 

इसका मतलब यह है कि सामने आए दस्तावेजों के आधार पर पैलेट गन और अन्य हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े दो अलग-अलग DCP-स्तरीय प्राधिकरणों की बात सामने आई है. एक दस्तावेज में DCP North राजा भाटिया का नाम पैलेट गन के संदर्भ में आया, जबकि दूसरे दस्तावेज में DCP New Delhi सचिन शर्मा का नाम गैस, लाठीचार्ज और firearms की अनुमति के संदर्भ में सामने आया. यहां यह भी साफ कर देना जरूरी है कि इन दस्तावेजों का सामने आना और किसी अधिकारी की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी तय होना दो अलग बातें हैं. मामले में जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे.

RAF खुद से पैलेट गन चला सकती है?

रिपोर्ट के मुताबिक, RAF यानी Rapid Action Force, जो CRPF की विशेष दंगा-रोधी इकाई है, मौके पर तैनात थी. लेकिन RAF के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि ऐसी स्थिति में जवान अपने स्तर पर यह फैसला नहीं लेते कि 12-बोर एंटी-रायट गन का इस्तेमाल करना है या नहीं.

इसके लिए मौके पर मौजूद अधिकृत Executive Magistrate की अनुमति की प्रक्रिया होती है. यानी जिस जवान ने हथियार चलाया और जिसने उसका इस्तेमाल अधिकृत किया- दोनों की भूमिका अलग हो सकती है. यही वजह है कि किसी वीडियो में हथियार चलाते हुए जवान दिखाई देने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसी जवान ने खुद फायरिंग का फैसला लिया था.

 

क्या अमित शाह ने पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था?

यह सबसे संवेदनशील सवाल है. राहुल गांधी ने लोकसभा में अमित शाह पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल को अधिकृत किया. इससे पहले भी राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से गृह मंत्री से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की थी. लेकिन उपलब्ध दस्तावेजी रिपोर्टिंग में अभी ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से जंतर-मंतर पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था.

इसके उलट, सामने आए दस्तावेज मौके पर मौजूद/अधिकृत DCP स्तर के अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग की अनुमति की ओर इशारा करते हैं. इसलिए खबर लिखते समय राहुल गांधी के आरोप को “राहुल गांधी का आरोप” कहना सही होगा, उसे स्थापित तथ्य के रूप में लिखना नहीं.

क्या दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है?

हां. दिल्ली पुलिस का प्रशासनिक नियंत्रण केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि केंद्रीय गृह मंत्री हर कानून-व्यवस्था की घटना में व्यक्तिगत रूप से पुलिस को मौके पर कार्रवाई का आदेश देते हैं. मैदान में कार्रवाई के लिए अलग कमांड और कानूनी प्रक्रिया होती है. दिल्ली पुलिस के मामले में DCP जैसे अधिकारियों को कानून के तहत Executive Magistrate की शक्तियां भी दी जा सकती हैं. यही अंतर “राजनीतिक/प्रशासनिक नियंत्रण” और “ऑपरेशनल आदेश” को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

राज्य में कौन देता है आदेश?

दिल्ली से बाहर स्थिति राज्य के कानून और पुलिस प्रशासन के हिसाब से बदल सकती है. आम तौर पर कानून-व्यवस्था राज्य के अधिकार क्षेत्र में आती है और राज्य पुलिस तथा जिला प्रशासन अपनी निर्धारित शक्तियों के तहत काम करते हैं. BNSS की धारा 148 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट और निर्धारित पुलिस अधिकारी गैरकानूनी या शांति भंग की आशंका वाली सभा को हटने का आदेश दे सकते हैं और परिस्थितियों के अनुसार बल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसलिए यह कहना कि 'हर राज्य में गोली चलाने का आदेश मुख्यमंत्री या गृह मंत्री ही देता है' गलत होगा. उसी तरह यह कहना भी गलत होगा कि 'हर स्थिति में केवल DM ही आदेश देता है.'

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