25 हजार का कमरा 365 दिन की Booking, 'नासिक के आशिक' Ashok Kharat की करतूतों के बारे में कितना जानते हैं आप?

महाराष्ट्र में अशोक खरात हवाला घोटाला अब राज्य और मीडिया में हंगामा पैदा कर रहा है. उपमुख्यमंत्री शिंदे के साथ 17 कॉल और अंतरराष्ट्रीय धन लेन-देन की जांच के लिए फडणवीस ने एसआईटी को निर्देश दिया.

महाराष्ट्र में अशोक खरात का घोटाला अब राज्य की राजनीति और मीडिया में हंगामा पैदा कर रहा है. वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने दावा किया है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच 17 फोन कॉल हुए थे. दमानिया का कहना है कि यह खुलासा उन्होंने सीडीआर के आधार पर किया है. वहीं सवाल उठता है कि इतने संवेदनशील डेटा की सीडीआर कैसे लीक हुई और इसे किसने सार्वजनिक किया?

इस मामले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि 'किसी को भी ऐसे सीडीआर प्राप्त करने का अधिकार नहीं है. यह अधिकार केवल जांच एजेंसियों के पास है. राज्य सरकार इस मामले की जांच करेगी. जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.'

सीडीआर लीक की गुत्थी और सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री फडणवीस ने नासिक में पीसी में कहा कि 'इतने संवेदनशील मामले में झूठे आरोप नहीं लग सकते. जिनके खिलाफ पुख्ता सबूत होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. किसने किससे क्या किया? यह सब सिस्टम के माध्यम से साफ होगा. इस मामले की हर एंगल से जांच की जाएगी.' उन्होंने आगे कहा कि 'अशोक खरात की संपत्तियों और लेन-देन की भी पूरी जांच की जाएगी. लोग खुद सामने आकर जानकारी दे रहे हैं, जिससे एसआईटी को कई सुराग मिले हैं. सभी को एसआईटी पर भरोसा करना चाहिए.'

पांच सितारा होटल में हवाला रैकेट

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, अशोक खरात मुंबई के एक फाइव स्टार होटल के विशेष सुइट से हवाला रैकेट चला रहा था. इस सुइट का किराया 25,000 रुपये प्रतिदिन था और यह सालभर बुक रहता था. एसआईटी के अनुसार, इस होटल के कमरे के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जा रहा था. खबरों में यह भी बताया जा रहा है कि इस हवाला रैकेट का दुबई और अन्य अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आ सकता है.

जालसाजी और अंतरराष्ट्रीय असर

अशोक खरात ने जादू-टोने और हवाला के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया, दुबई और अन्य पांच देशों में धन का लेन-देन किया. इसमें राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं. महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रोहित पवार ने कहा, "खरात की जांच ईडी द्वारा होनी चाहिए. फर्जी खरात के पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा है. राज्य सरकार के पास मौजूद सबूत केंद्र को सौंपे जाएं और केंद्रीय एजेंसियां गहन जांच करें."

राज्य सरकार की अगले कदम की रणनीति

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई ढील नहीं दी जाएगी. एसआईटी हर छोटे-बड़े सुराग पर काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया कि मामले की गहन जांच के लिए केंद्र की मदद ली जा सकती है.

Similar News