वहां सिर्फ पत्थर ही पत्थर कैसे जाओगे? Subramanian Swamy ने चीन से ऐसे खुलवाया कैलाश मानसरोवर का रास्ता

सुब्रमण्यम स्वामी ने स्टेट मिरर हिंदी से बात करते हुए कहा कि, बताया कि उन्होंने चीन से बातचीत कर कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता खुलवाया. जानिए पूरा दिलचस्प किस्सा.

By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 23 March 2026 6:21 PM IST

भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाले Subramanian Swamy ने एक बार फिर अपने जीवन के उस ऐतिहासिक अध्याय का खुलासा किया है, जिसने भारत-चीन संबंधों और धार्मिक यात्राओं की दिशा बदल दी. स्टेट मिरर हिंदी से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि आखिर कैसे उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा का बंद पड़ा रास्ता खुलवाया था?

स्वामी के मुताबिक, यह सिर्फ एक राजनीतिक या कूटनीतिक कदम नहीं था, बल्कि उनके व्यक्तिगत आस्था और संकल्प से जुड़ा मिशन था. करीब तीन साल तक लगातार प्रयास और बातचीत के बाद 1981 में चीन ने भारतीय श्रद्धालुओं के लिए कैलाश मानसरोवर का रास्ता खोल दिया. खास बात यह है कि उसी साल स्वामी खुद इस यात्रा पर जाने वाले पहले भारतीय बने.

कैलाश मानसरोवर यात्रा खुलवाने का विचार कैसे आया?

स्वामी बताते हैं कि बचपन से ही उनकी मां उन्हें कैलाश मानसरोवर के बारे में बताया करती थीं. उन्होंने कहा कि 'नहीं देखिए कैलाश के बारे में तो मेरी मां बताती थी. हम लोग उस प्रकार के लोग हैं जो कैलाश को बहुत मानते हैं.' यही आस्था उनके मन में गहराई से बैठ गई और एक दिन यह उनके लिए मिशन बन गया.

चीन के साथ बातचीत कैसे शुरू हुई?

Subramanian Swamy ने बताया कि हार्वर्ड में प्रोफेसर रहते समय उनके कई चीनी छात्र बने, जिन्होंने उन्हें चीन आने का निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि 'उन्होंने कहा कि आप हमारे देश आना चाहिए. मैंने कहा मैं तो एंटी कम्युनिस्ट हूं. इसके बाद उनकी मुलाकात चीन के सर्वोच्च नेता Deng Xiaoping से हुई, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दी.

डेंग शियाओपिंग से मुलाकात में क्या हुआ?

स्वामी ने खुलासा किया कि उस समय चीन आर्थिक मदद की तलाश में था. उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए वर्ल्ड बैंक से चीन को सहायता दिलाने में भूमिका निभाई. स्वामी के मुताबिक, 'उन्होंने कहा हम क्या करें आपके लिए? यहीं से उन्होंने अपनी इच्छा सामने रखी.

Subramanian Swamy का कैलाश मानसरोवर खुलवाने का किस्सा

जब चीन ने उनसे पूछा कि बदले में क्या चाहिए, तो स्वामी ने साफ कहा कि मैं कैलाश कभी नहीं गया हूं… बंद है तो खोल दो तो उन्होंने कहा कि नहीं वहां पत्थर हैं कैसे जाओगे? तो मैंने कहा कि क्या मैं पैदल नहीं जा सकता है क्या? उन्होंने कहा कि घोड़ा भी नहीं जा सकता है आगे मैंने कहा कि मैं पैदल जाऊंगा फिर मैं इंडिया के बॉर्डर से कैलाश पैदल गया था. आगे बताते हैं कि उस समय मैं बहुत मजबूत था. फिर मैंने कहा कि ये मैंने कर दिया अब आप सबके लिए खोल दो

Subramanian Swamy ने आगे कहा कि हर साल कुछ भी हमारी रिश्ता पाकिस्तान चाइना के साथ हम कभी कैलाश का नहीं रोका है. हालांकि ये उनके बयान के मुताबिक है. बात करें साल 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा विवाद (तनाव) के बाद से चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता एकतरफा रूप से अवरुद्ध कर दिया था. कोरोना महामारी और 2020 के गलवान झड़प के बाद, चीन ने भारतीय तीर्थ यात्रियों के लिए परमिट जारी करना बंद कर दिया, जिससे यह यात्रा पिछले 5 वर्षों से बंद थी. हालांकि, अब दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के साथ इसे फिर से शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है.

क्या 1981 में पहली बार यात्रा संभव हुई?

1981 में Subramanian Swamy खुद कैलाश मानसरोवर यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने. इसके बाद उन्होंने चीन से कहा कि इस रास्ते को सभी भारतीयों के लिए खोल दिया जाए. उन्होंने कहा, "मैंने कर दिया अब आप सबके लिए खोलिए…" इस सवाल पर स्वामी ने बेहद सादगी से जवाब दिया. आपको लगता है बहुत बड़ी अचीवमेंट थी सर वो क्योंकि शिवा कहां है भाई?'

भारत से कैलाश मानसरोवर की दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस मार्ग से यात्रा कर रहे हैं. यह यात्रा सामान्य दूरी की तरह सीधी नहीं होती, बल्कि पहाड़ी और अंतरराष्ट्रीय रूट के कारण अलग-अलग पड़ावों में पूरी की जाती है.

इंडिया बॉर्डर से कैलाश मानसरोवर की दूरी कितनी?

भारत से कैलाश मानसरोवर की दूरी इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस मार्ग से यात्रा कर रहे हैं. यह यात्रा सामान्य दूरी की तरह सीधी नहीं होती, बल्कि पहाड़ी और अंतरराष्ट्रीय रूट के कारण अलग-अलग पड़ावों में पूरी की जाती है.

1. लिपुलेख पास (उत्तराखंड) मार्ग

शुरुआती बिंदु: धारचूला

कुल दूरी: लगभग 450–500 किमी (ट्रेक + सड़क मिलाकर)

यह पारंपरिक और सबसे लोकप्रिय मार्ग है

इसमें लंबा ट्रेक शामिल होता है

2. नाथू ला पास (सिक्किम) मार्ग

शुरुआती बिंदु: गंगटोक

कुल दूरी: लगभग 1,500 किमी (ज्यादातर वाहन से)

यह अपेक्षाकृत आसान और कम ट्रेक वाला मार्ग है

सीधी दूरी (एरियल)

भारत-तिब्बत बॉर्डर से कैलाश पर्वत की सीधी दूरी लगभग 100–150 किमी के बीच मानी जाती है. लेकिन वास्तविक यात्रा दूरी पहाड़ों और रास्तों के कारण काफी ज्यादा हो जाती है.

खास बात

माउंट कैलाश और मानसरोवर झील समुद्र तल से लगभग 4,500–6,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं. इसलिए दूरी से ज्यादा चुनौती ऊंचाई और मौसम होती है

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