PSLV-C62 मिशन में ISRO को झटका! लॉन्च सफल लेकिन ऑर्बिट तक नहीं पहुंचा अन्वेषा सैटेलाइट, क्या बोले इसरो चीफ?

ISRO के PSLV-C62 मिशन को आंशिक झटका लगा है. रॉकेट की लॉन्चिंग सफल रही, लेकिन तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी के कारण अन्वेषा (EOS-N1) सैटेलाइट अपनी तय कक्षा में स्थापित नहीं हो सका. ISRO ने बताया कि दिशा में बदलाव की वजह से ऑर्बिटल इंसर्शन पूरा नहीं हो पाया और पूरे डेटा का विश्लेषण जारी है. यह मिशन सीख और सुधार की दृष्टि से अहम माना जा रहा है.;

( Image Source:  isro )
Edited By :  नवनीत कुमार
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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को उस वक्त आंशिक झटका लगा, जब ISRO का PSLV-C62 मिशन पूरी तरह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका. रॉकेट ने तय समय पर सफल उड़ान भरी और शुरुआती सभी चरण सामान्य रहे. लेकिन मिशन का सबसे अहम उद्देश्य सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करना पूरा नहीं हो पाया. इसी वजह से इस लॉन्च को ‘आंशिक सफलता’ माना जा रहा है.

मिशन के दौरान समस्या PSLV के तीसरे स्टेज में सामने आई. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस चरण में दिशा (orientation) में अनियंत्रित बदलाव हुआ. इसी कारण सैटेलाइट ऑर्बिटल इंसर्शन के लिए आवश्यक परिस्थितियां पूरी नहीं हो सकीं. हालांकि, रॉकेट सिस्टम का अधिकांश प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप रहा, जो ISRO के लिए एक सकारात्मक संकेत है.

अन्वेषा और 14 को-पैसेंजर सैटेलाइट

PSLV-C62 मिशन के तहत कुल 15 सैटेलाइट लॉन्च किए गए थे. इनमें प्रमुख था अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अन्वेषा (EOS‑N1). इसके साथ 14 को-पैसेंजर सैटेलाइट भी शामिल थे. अन्वेषा को करीब 600 किलोमीटर ऊपर सूर्य-समकालिक कक्षा (SSO) में स्थापित किया जाना था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह लक्ष्य हासिल नहीं हो सका.

DRDO का हाई-टेक स्पाई सैटेलाइट

अन्वेषा को DRDO ने विकसित किया है. यह एक अत्याधुनिक इमेजिंग और निगरानी सैटेलाइट है, जिसे रक्षा और रणनीतिक जरूरतों के लिए तैयार किया गया था. इसकी क्षमता इतनी उन्नत मानी जाती है कि यह घने जंगलों, झाड़ियों और बंकरों में छिपी गतिविधियों की पहचान कर सकता है. ऐसे में इसका ऑर्बिट में न पहुंच पाना रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है.

ISRO चीफ ने क्या कहा?

मिशन के बाद ISRO प्रमुख ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि तीसरे स्टेज में तकनीकी समस्या आई और दिशा में अनपेक्षित बदलाव हुआ. उन्होंने बताया कि पूरे फ्लाइट डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है. ISRO ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी होने के बाद कारणों और आगे की रणनीति को सार्वजनिक किया जाएगा. यह पारदर्शिता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की पहचान रही है.

झटके के बीच सबक

हालांकि PSLV-C62 अपने पूरे लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका, लेकिन इसे असफलता के बजाय एक महत्वपूर्ण सीख के रूप में देखा जा रहा है. ISRO पहले भी ऐसे तकनीकी झटकों से उबरकर और मजबूत होकर सामने आया है. रॉकेट सिस्टम का सफल प्रदर्शन भविष्य के मिशनों के लिए भरोसा देता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस अनुभव से मिली सीख आने वाले लॉन्च को और सुरक्षित व सटीक बनाने में मदद करेगी.

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