आजादी से पहले का इतिहास-डिप्लोमैटिक रेसिडेंस से लेकर कांग्रेस का उफान और उतार देखा, कहानी 24 अकबर रोड की

24 अकबर रोड का इतिहास आजादी से पहले के डिप्लोमैटिक रेसिडेंस से शुरू होकर कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय तक फैला है. ब्रिटिश राज के दौरान यह बंगला कई उच्च अधिकारियों और राजदूतों का निवास रहा. 1977 के बाद, इंदिरा गांधी ने इसे कांग्रेस गुट के लिए आवंटित किया.

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दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. केंद्र सरकार के अधीन आने वाले संपदा विभाग ने कांग्रेस पार्टी को उसके ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने का नोटिस भेज दिया है. बताया जा रहा है कि पार्टी को 28 मार्च तक यह दफ्तर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गर्मा गया है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कांग्रेस ने पिछले साल करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से अपना नया मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ तैयार कर लिया है, तो फिर भी 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड के दफ्तर क्यों नहीं छोड़े गए? इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि सरकार नियमों का हवाला दे रही है.

कांग्रेस को 24 अकबर रोड खाली करने का नोटिस क्यों मिला?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) की 2006 की नीति के तहत जिन राजनीतिक दलों को नया प्लॉट आवंटित किया गया है, उन्हें अपने पुराने सरकारी बंगलों को तय समयसीमा के भीतर खाली करना होता है.

नीति में साफ कहा गया है कि 'यदि किसी राजनीतिक दल का कब्ज़ा सरकारी बंगले पर है… तो उन्हें अपने कार्यालय भवन के निर्माण के तुरंत बाद या तीन साल के भीतर उस बंगले को खाली कर देना चाहिए, यानी नया दफ्तर बनने के बाद पुराने सरकारी आवास को रखना नियमों के खिलाफ माना जाता है.

क्या कांग्रेस ने नियमों का उल्लंघन किया है?

रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 2013 में ही कांग्रेस को आवंटित 24 अकबर रोड, 26 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड के बंगले रद्द कर दिए गए थे. हालांकि, पार्टी ने 26 अकबर रोड खाली कर दिया, लेकिन बाकी दो परिसरों पर अब भी कब्जा बनाए रखा है.

नया मुख्यालय बनने के बाद भी पुराने दफ्तर क्यों नहीं छोड़े?

कांग्रेस का कहना है कि उसे अपने कामकाज के लिए दोनों जगहों की जरूरत है. वहीं पार्टी सूत्रों का दावा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक द्वेष के तहत की जा रही है और इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है.

24 अकबर रोड का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

24 अकबर रोड सिर्फ एक दफ्तर नहीं, बल्कि कांग्रेस की राजनीति का केंद्र रहा है. 1978 से यह पार्टी का मुख्यालय रहा है और कई प्रधानमंत्रियों के दौर की राजनीति का गवाह बना है. ब्रिटिश काल में यह बंगला वरिष्ठ अधिकारी सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल का निवास था. बाद में यह म्यांमार की राजदूत दा खिन की का घर भी रहा, जहां नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की ने भी समय बिताया था.

क्या अन्य पार्टियों पर भी लागू होते हैं ये नियम?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह नियम सभी राष्ट्रीय और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होता है. उदाहरण के तौर पर, बीजेपी ने भी अपना नया कार्यालय बनने के बाद 11 अशोका रोड का दफ्तर कुछ समय तक रखा था, जिसे बाद में खाली किया गया.

क्या बढ़ेगा सियासी टकराव?

कांग्रेस को दिए गए इस नोटिस के बाद राजनीतिक टकराव की स्थिति बन सकती है. जहां सरकार इसे नियमों का पालन बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दे रही है. आने वाले दिनों में यह मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है.

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