क्या LPG से ज्यादा उपलब्ध है PNG, दोनों में क्या है अंतर और क्यों सरकार दे रही पाइपलाइन गैस पर जोर?

मिडिल ईस्ट के तनावपूर्ण हालात के बीच भारत में गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी बीच सरकार ने नया नियम लागू किया है कि जहां-जहां PNG कनेक्शन उपलब्ध है वहां के सभी लोगों को PNG कनेक्शन लेना पड़ेगा नहीं तो LPG कनेक्शन भी काट दिया जाएगा.

By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 25 March 2026 6:28 PM IST

इन दिनों दुनिया के कई हिस्से गैस संकट से जूझ रहे हैं और इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इसी बीच सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो आने वाले समय में देश की रसोई व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है. अब सरकार का फोकस साफ है. LPG सिलेंडर से हटकर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को तेजी से बढ़ावा देना. नए आदेश के मुताबिक, जिन इलाकों में PNG उपलब्ध है, वहां LPG का इस्तेमाल जारी रखना मुश्किल हो सकता है.

सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि जहां-जहां PNG उपलब्ध है उनको तत्काल प्रभाव से PNG कनेक्शन लेना ही पड़ेना नहीं तो LPG कनेक्शन भी काट दिया जाएगा. Ministry of Petroleum and Natural Gas के 25 मार्च के आदेश के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद केवल 3 महीने का समय मिलेगा. ऐसे में बड़ा सवाल यही है. क्या वाकई PNG, LPG से बेहतर विकल्प है? और सरकार पाइपलाइन गैस पर इतना जोर क्यों दे रही है? इस रिपोर्ट में समझिए हर पहलू...

नया नियम क्या कहता है?

सरकार के आदेश में साफ कहा गया है कि “ऐसे पते पर एलपीजी की आपूर्ति, सूचना दिए जाने की तारीख से तीन महीने बाद बंद कर दी जाएगी. यानि नोटिस मिलने के 3 महीने के भीतर उपभोक्ताओं को PNG अपनाना होगा, वरना LPG कनेक्शन खत्म कर दिया जाएगा. हालांकि, जहां तकनीकी रूप से PNG देना संभव नहीं है, वहां सप्लायर की NOC के आधार पर LPG जारी रह सकती है.

अचानक यह फैसला क्यों लिया गया?

इस फैसले की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है. LPG सप्लाई पर इसका सीधा असर पड़ा है, जिससे देश के कई हिस्सों में कमी देखने को मिल रही है. ऐसे में सरकार PNG को बढ़ावा देकर सप्लाई को स्थिर और सुरक्षित बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

PNG आखिर है क्या और LPG से कैसे अलग है?

PNG (Piped Natural Gas) पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचने वाली गैस है, ठीक पानी की तरह. वहीं LPG सिलेंडर में स्टोर गैस होती है, जिसे बार-बार रिफिल कराना पड़ता है.

PNG के फायदे-

  • लगातार सप्लाई, रिफिल की जरूरत नहीं
  • ज्यादा सुरक्षित
  • लंबे समय में किफायती

PNG की सप्लाई स्थिर क्यों है?

भारत अपनी करीब 50% प्राकृतिक गैस खुद उत्पादन करता है. इसके अलावा आयात भी कई देशों से होता है, जैसे United States, Russia और Australia. इस वजह से किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर सप्लाई पूरी तरह प्रभावित नहीं होती.

LPG पर इतना दबाव क्यों है?

भारत अपनी करीब 62% LPG जरूरत आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई Strait of Hormuz से होकर गुजरती है. मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण इस रूट पर खतरा बढ़ गया है, जिससे LPG सप्लाई पर दबाव आ गया है.

सरकार कैसे कर रही है सप्लाई मैनेज?

सरकार ने गैस सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांटा है-

घरेलू PNG उपभोक्ता

CNG (वाहन ईंधन)

कमर्शियल गैस सप्लाई में लगभग 30% कटौती. इससे साफ है कि घरेलू जरूरतों को सबसे ऊपर रखा गया है.

पाइपलाइन नेटवर्क को क्यों किया जा रहा है फास्ट-ट्रैक?

सरकार ने PNG विस्तार को तेज करने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं-

तय समय में अनुमति देना अनिवार्य

देरी होने पर ऑटो-अप्रूवल

3 दिन में सोसायटी एक्सेस

48 घंटे में PNG कनेक्शन

क्या PNG पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है?

PNG अपेक्षाकृत स्थिर है, लेकिन पूरी तरह जोखिम मुक्त नहीं. भारत अभी भी करीब 50% गैस आयात करता है. अगर वैश्विक संकट और बढ़ता है, तो सप्लाई पर असर पड़ सकता है.

क्या यह भारत के लिए बड़ा सबक है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा संकट भारत के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा अवसर है. 'यह स्थिति इस बात की याद दिलाती है कि पूरे देश में PNG कनेक्टिविटी का विस्तार करने से LPG आपूर्ति पर दबाव कम किया जा सकता है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है.'

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