Explainer: सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, फिर भी नहीं थम रहा छात्रों का प्रदर्शन; क्या CJP आंदोलन ने बदल दी सियासत की दिशा?

सोनम वांगचुक ने सरकार के आश्वासन के बाद 26 दिन का अनशन खत्म कर दिया, लेकिन CJP ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है. सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब परीक्षा सुधार और युवाओं की जवाबदेही की राष्ट्रीय बहस बन चुका है.

CJP आंदोलन के प्रमुख चेहरे(Image Source:  ANI )
Edited By :  अच्‍युत कुमार द्विवेदी
Updated On : 24 July 2026 10:41 PM IST

देशभर में NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद अपना 26 दिन लंबा भूख हड़ताल समाप्त कर दिया. हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी(CJP) ने साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा.

सरकार ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया है कि पेपर लीक के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, परीक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वांगचुक के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए छात्रों से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई और तेज न्याय का भरोसा दिया. इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय में बड़े प्रशासनिक बदलाव भी किए गए हैं. स्कूल और उच्च शिक्षा विभाग के लिए नए सचिव नियुक्त किए गए हैं, जिसे सरकार सुधार की दिशा में कदम के तौर पर पेश कर रही है.

आखिर CJP आंदोलन अलग क्यों माना जा रहा है?

  • CJP आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक राज्य, जाति, धर्म या राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं है.
  • पहले के आंदोलनों की तरह इसकी पहचान किसी खास सामाजिक समूह से नहीं जुड़ी है.
  • NEET, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दे देशभर के करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों से सीधे जुड़े हैं.
  • यही वजह है कि यह आंदोलन तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया.
  • दूसरी बड़ी बात यह है कि यह आंदोलन पारंपरिक रैलियों से ज्यादा सोशल मीडिया पर मजबूत हुआ.
  • Instagram Reels, छोटे वीडियो, मीम्स और वायरल पोस्ट के जरिए हजारों युवा इससे जुड़ गए.
  • आंदोलन में शामिल होने के लिए किसी संगठन का सदस्य बनना जरूरी नहीं था.
  • मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ही इसका सबसे बड़ा मंच बन गया.

सरकार ने भी बदली अपनी रणनीति

सरकार ने सिर्फ घोषणाएं ही नहीं कीं, बल्कि संवाद का तरीका भी बदला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधी रात को सेल्फी-स्टाइल वीडियो जारी कर सीधे छात्रों से बात की. इसमें उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और परीक्षा प्रणाली में सुधार का भरोसा दिया. इसे सोशल मीडिया की नई पीढ़ी तक सीधे पहुंचने की कोशिश माना जा रहा है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने भी स्पष्ट किया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. साथ ही, संसद में परीक्षा सुधारों पर चर्चा और NEET पेपर लीक से प्रभावित परिवारों के लिए राहत पर भी सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया गया है.

 

विपक्ष के सामने भी चुनौती

कांग्रेस, AAP और अन्य विपक्षी दल इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आंदोलन की स्वतंत्र पहचान उनके लिए भी चुनौती बन गई है. यदि विपक्ष पूरी तरह आंदोलन के साथ खड़ा होता है तो उस पर इसे राजनीतिक रंग देने का आरोप लग सकता है, जबकि दूरी बनाने पर वह छात्रों की नाराजगी से कट सकता है.

 

इसी बीच सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को 'अपर्याप्त' बताते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को छात्रों के साथ जंतर-मंतर पर बैठना चाहिए था. उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए.

 

यह आंदोलन क्यों महत्वपूर्ण है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ NEET पेपर लीक का आंदोलन नहीं रह गया है. यह उन युवाओं की आवाज बन गया है, जो पारदर्शी भर्ती, निष्पक्ष परीक्षाओं और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. आने वाले समय में आंदोलन किस दिशा में जाएगा, यह अलग बात है, लेकिन इसने सरकार और विपक्ष, दोनों को युवाओं की नई डिजिटल ताकत का एहसास जरूर करा दिया है.

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