S*# एजुकेटर सीमा आनंद ने खोला kamsutra का सबसे बोल्ड सच, The Arts of Seduction को क्यों कहा बेस्ट गाइड?
Ecstasy (चरम सुख) एजुकेटर सीमा आनंद का कहना है कि 'द आर्ट्स ऑफ सेडक्शन' के जरिए वह लवबर्ड को यह समझाना चाहती हैं कि उनके लिए 'कामसूत्र' सबसे बेहतर चीज है. यह आज के दौर में भी पति-पत्नी, या लिव इन पार्टनर या या चरम सुख पाने के इच्छुक शख्स के लिए सबसे बेहतर चीज है. अगर कोई अपने लाइप पार्टनर के साथ परम सुख हासिल करना चाहता है, तो उसके लिए इससे बेहतर चीज और कुछ नहीं हो सकता.;
महिला और पुरुष दोनों के लिहाज से चरम सुख हमेशा खुशी जीवन का अहम हिस्सा रहा है. इस बारे में Ecstasy (चरम सुख) एजुकेटर सीमा आनंद का कहना है कि 'द आर्ट्स ऑफ सेडक्शन' 21 वीं सदी में बेहतर ऑर्गेज्म करने के लिए सबसे बेस्ट गाइड है. इसका मकसद उस सोच को बदलना है जिसे अधिकांश लोग सेक्सुअलिटी (संभोग) को सेल्फ सटिस्फैक्शन तक सीमित कर देते हैं. जबकि इसका मकसद आर्गेज्म को कामुक (आनंद की अनंत) अनुभव में बदलना है.
अपोजिट पार्टनर के बीच चरम सुख क्या?
चरम सुख या ऑर्गैज्म, वह स्थिति है जब शारीरिक और मानसिक उत्तेजना अपने सबसे उच्च स्तर पर पहुंच जाती है और शरीर को गहरी संतुष्टि, सुकून और परम आनंद का अनुभव होता है. सरल भाषा में कहें तो यह वह पल है जब शरीर में लाइफ पार्टनर के प्रति तनाव चरम पर जाकर अचानक रिलीज होता है. दिमाग में खुशी के हार्मोन (डोपामिन, ऑक्सिटोसिन) सक्रिय होते हैं. व्यक्ति को सब कुछ अच्छा महसूस होता है.
सीमा आनंद की उनका कहना है कि 'द आर्ट्स ऑफ सेडक्शन' किताब को लिखने की मेरी प्रेरणा को डॉ. एलेक्स कम्फर्ट के न्यू स्टेट्समैन में एक पाठक को दिए गए जवाब से सबसे अच्छे से समझा जा सकता है. दरअसल, मिस्टर साइमन रेवेन ने यौन सुख को एक "ओवररेटेड एहसास मानते हैं जो मुश्किल से 10 सेकंड तक सुखद अहसास कराता है"
सिर्फ 10 सेकेंड का होता है चरम सुख!
अगर ऐसा ही है तो कोई मध्यकालीन भारत की कामुक किताब 'कामसूत्र' का अनुवाद करने की जहमत क्यों उठाएगा. पर ऐसा करने के पीछे सबसे अच्छा कारण यह है कि हमारी संस्कृति में अभी भी ऐसे लोग हैं जो यौन सुख को ही चरम सुख मानते हैं, जो मुश्किल से दस सेकंड तक रहता है.
यहां पर इस बात का जिक्र कर दें कि ऐसा सोचने वालों में 'मिस्टर साइमन रेवेन' अकेले नहीं थे. हाल ही में किसी ने मुझसे कहा, 'यह सब सेडक्शन बकवास है. ऑर्गेज्म हॉट और तेज होता है. जब शेर काम क्रिया करता है तो मादा यानी शेरनी को पता चल जाता है.'
फ*क और ऑर्गेज्म में फर्क होता है
अगर हम हम जानवर नहीं हैं तो यह मुमकिन है कि आप अपने पार्टनर के ऊपर कूदें और कुछ ही सेकंड में इजैक्युलेशन तक पहुंच जाएं. इसके उलट राइटर यास्मीन अली भाई ब्राउन कहती हैं, 'फ*क और ऑर्गेज्म के असली अनुभव में फर्क होता है.
एजुकेटर ने कामसूत्र का क्यों लिया सहारा?
सीमा आनंद ने इसी वजह से चरम सुख को लोगों में बेहतर समझ पैदा करने के लिए कामसूत्र का सहारा लिया, जो लिखे जाने के हजारों साल बाद भी एक जबरदस्त रचना बनी हुई है. कामसूत्र, जिसे तीसरी सदी में वात्स्यायन ने संकलित किया था.
कामसूत्र - लव और फोरप्ले का कॉम्बिनेशन
कामसूत्र प्राचीन भारत के कामुक प्रेम पर ग्रंथों के समूह में सबसे पुराना और सबसे बेहतर रचना है. जिसे आम तौर पर 'कामशास्त्र' के नाम से जाना जाता है. कामसूत्र प्रेम करने की कला में गहराई तक उतरता है, और दिखाता है कि यह कैसे बेहतर और परम सुख का जरिया बन सकता है और फोरप्ले और लवमेकिंग के हर काम के हर कॉम्बिनेशन का प्रतीक है.
शादी स्वर्ग का रास्ता, संभोग पहुंचने का जरिया
सच यह है कि इंसान ही धरती पर एकमात्र ऐसी प्रजाति हैं जो जानबूझकर आपसी आनंद पैदा करने और उसका आनंद लेने में सक्षम हैं. यह सिर्फ क्षणिक शारीरिक आनंद नहीं था. प्राचीन पूर्वी संस्कृतियों का मानना था कि एक स्थिर समाज, एक स्थिर शादी पर निर्भर करता है. एक स्थिर शादी का रहस्य बहुत अच्छा यौन क्रिया या लव करना था. शादी स्वर्ग का रास्ता था और संभोग वहां तक पहुंचने का जरिया था.
यही वजह है कि 'कामसूत्र' को दूसरे मिलते-जुलते ग्रंथों से इस मामले में अलग है. वह यह है कि किताब लिखते समय वात्स्यायन ने वह किया जो पहले किसी ने नहीं किया था. उन्होंने लिंग भेद के सबसे बड़े मिथक को तोड़ा. सदियों से धार्मिक मान्यता यह थी कि एक औरत के पास खुशी का कोई अपना जरिया नहीं होता, कि उसकी खुशी आदमी की खुशी पर निर्भर करती है.
यानी औरत का ऑर्गेज्म आदमी के ऑर्गेज्म का नतीजा होता है. कामसूत्र ने कहा कि न सिर्फ औरतों के पास खुशी का अपना जरिया होता है, बल्कि इस प्रक्रिया के लिए आदमी की जरूरत भी नहीं होती. यह मान्यता उस समय इतनी विवादित थी कि उसने दुनिया भर में हलचल मचा दी थी.