देवांगना घाटी के नाम से वायरल हो रहे वीडियो को लेकर चित्रकूट पुलिस ने बताया सच, VIDEO शेयर करने पर हो सकती है जेल

देवांगना घाटी गैंगरेप से जोड़कर वायरल हो रहे वीडियो को चित्रकूट पुलिस ने फर्जी बताया है. जानें वीडियो की सच्चाई और शेयर करने पर क्या होगी कानूनी कार्रवाई.

( Image Source:  @chitrakootpol-X )
By :  सागर द्विवेदी
Updated On : 30 July 2026 4:56 PM IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों चित्रकूट के देवांगना घाटी में हुई गैंगरेप की घटना से जोड़कर एक वीडियो तेजी से वायरल किया जा रहा है. वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें देवांगना घाटी में 20 वर्षीय युवती के साथ हुई दरिंदगी को दिखाया गया है. लेकिन अब चित्रकूट पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है.

वहीं अगर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की बात करे कि उस वीडियो की असली सच्चाई क्या है तो सोशल में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं हालांकि जानकारी के मुताबिक उस वीडियो को 6 साल पुराना बताया जा रहा है और कोई बिहार का तो इसे ओडिशा का बता रहा है. हालांकि स्टेट मिरर हिंदी किसी दावे की पुष्टि नहीं करता है. 

चित्रकूट पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वायरल किया जा रहा वीडियो देवांगना घाटी में हुई गैंगरेप की घटना का नहीं है. पुलिस ने इसे असत्य एवं भ्रामक बताते हुए लोगों से ऐसे वीडियो को शेयर नहीं करने की अपील की है. पुलिस के मुताबिक, भ्रामक और असत्य जानकारी का प्रसारण कानूनन दंडनीय है.

क्या है देवांगना घाटी गैंगरेप का पूरा मामला?

देवांगना घाटी में 22 जुलाई 2026 को एक 20 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था. पुलिस के मुताबिक, युवती अपने 17 वर्षीय दोस्त के साथ इलाके में गई थी. इसी दौरान बाइक सवार तीन युवक वहां पहुंचे और खुद को वन विभाग का कर्मचारी बताकर दोनों को रोक लिया. आरोप है कि बदमाशों ने पहले युवती के दोस्त के साथ मारपीट की और उसके हाथ-पैर बांध दिए. इसके बाद युवती को पास की झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया. शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी.

48 घंटे में तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

मामले में पुलिस ने CCTV फुटेज, मुखबिर तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से आरोपियों की पहचान की. मुख्य आरोपी जितेंद्र उर्फ भोला को 25 जुलाई को मड़था के जंगल में पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी, जबकि एक सिपाही भी घायल हुआ. इसके बाद फरार चल रहे दो अन्य आरोपियों विवेक कुमार पटेल और प्रवीण पटेल को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था.

वायरल वीडियो को लेकर क्या है सच्चाई?

यही इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है. देवांगना घाटी में गैंगरेप की घटना की पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी वास्तविक है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को इस घटना का वीडियो बताना गलत है. चित्रकूट पुलिस ने खुद वायरल वीडियो को असत्य और भ्रामक बताया है. इसलिए सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर यह मान लेना कि उसमें देवांगना घाटी की पीड़िता या उसी घटना को दिखाया गया है, सही नहीं है. मीडिया रिपोर्ट्स में भी पुलिस के हवाले से वायरल वीडियो को देवांगना घाटी की घटना से अलग बताया गया है. ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना पुष्टि किसी वीडियो को पीड़िता या घटना से जोड़कर शेयर करना न सिर्फ गलत सूचना फैला सकता है, बल्कि पीड़िता की निजता और गरिमा को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

Fact Check Verdict: वायरल दावा भ्रामक

दावा: वायरल वीडियो में चित्रकूट के देवांगना घाटी गैंगरेप की घटना दिखाई गई है.

सच्चाई: गलत. चित्रकूट पुलिस ने वीडियो को देवांगना घाटी की घटना से असंबंधित बताते हुए इसे असत्य और भ्रामक कहा है.

घटना: देवांगना घाटी में 22 जुलाई को गैंगरेप का मामला सामने आया था और पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

सोशल मीडिया पर गलत या आपत्तिजनक वीडियो शेयर करने पर क्या है सजा?

भारत में सोशल मीडिया पर किसी गलत, आपत्तिजनक, अश्लील या भ्रामक वीडियो को वायरल करना या उसका प्रचार-प्रसार करना परिस्थितियों के आधार पर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है. हालांकि, सजा इस बात पर निर्भर करती है कि वीडियो में किस तरह की सामग्री है, उसे किस तरीके से साझा किया गया और कौन-सा कानून लागू होता है.

अश्लील कंटेंट शेयर करने पर सजा

आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करना अपराध हो सकता है. पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. दोबारा अपराध होने पर सजा 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने तक बढ़ सकती है.

यौन रूप से स्पष्ट कंटेंट और डीपफेक

आईटी एक्ट की धारा 67A इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यौन रूप से स्पष्ट कृत्यों या आचरण वाली सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित है. पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. दोबारा अपराध होने पर 7 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

निजी फोटो या वीडियो वायरल करना

किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीर या वीडियो को रिकॉर्ड करना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना भी गंभीर कानूनी मामला बन सकता है. आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर को उसकी सहमति के बिना कैप्चर, पब्लिश या ट्रांसमिट करने पर 3 साल तक की जेल, 2 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

इसके अलावा, किसी महिला से संबंधित अश्लील या आपत्तिजनक सामग्री को साझा करने की स्थिति में मामले के तथ्यों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य धाराएं भी लागू हो सकती हैं. इसलिए किसी वायरल वीडियो को बिना सत्यापन के शेयर करना कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर परेशानी खड़ी कर सकता है.

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