कौन हैं Taslima Nasreen जो 19 साल बाद कोलकाता लौटीं, 1994 में बांग्लादेश फिर 2007 में क्यों छोड़ना पड़ा था Kolkata?

बांग्लादेश की मशहूर लेखिका और पूर्व डॉक्टर 19 साल के बाद के कोलकाता लौंटी है. जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है. साल 2007 में उनको कोलकाता छोड़कर जाना पड़ा था. उसके बाद से उनको अब वापस आने का मौका मिला है.

Taslima Nasrin Return Kolkata

(Image Source:  X/ @SmritiSharma_ )
Edited By :  विशाल पुंडीर
Updated On : 31 July 2026 2:47 PM IST

मशहूर लेखिका तसलीमा नसरीन ने एकबार फिर से कोलकाता की धरती पर कदम रखा है. करीब 19 साल के बाद तसलीमा को कोलकाता आने का मौका मिला है. साल 2007 में पश्चिम बंगाल की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें राज्य से बाहर जाने की सलाह दी थी.

इसके बाद साल 2011 में राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन इसके बावजूद तसलीमा नसरीन की कोलकाता वापसी संभव नहीं हो सकी. महिलाओं के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ बेबाक लेखन के कारण तसलीमा लंबे समय से चर्चा और विवाद दोनों का केंद्र रही हैं.

कौन हैं तसलीमा नसरीन?

तसलीमा नसरीन का जन्म 25 अगस्त 1962 को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के मैमनसिंह शहर में हुआ था. वे बांग्लादेश की प्रसिद्ध लेखिका, स्त्रीवादी चिंतक, मानवाधिकार समर्थक और पूर्व डॉक्टर हैं. अपने धर्मनिरपेक्ष विचारों, महिला अधिकारों के समर्थन और धार्मिक कट्टरपंथ की खुली आलोचना के कारण उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर अलग पहचान बनाई. साहित्य और सामाजिक मुद्दों पर उनकी बेबाक लेखनी ने उन्हें दुनिया भर में प्रसिद्धि दिलाई, लेकिन इसी कारण उन्हें लगातार विरोध और जान से मारने की धमकियों का भी सामना करना पड़ा.

तसलीमा नसरीन ने साल 1978 में मुमिनुन्निसा कॉलेज से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की शिक्षा प्राप्त की और साल 1984 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की. डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सरकारी डॉक्टर के रूप में काम किया था. इस दौरान उन्होंने मैमनसिंह फैमिली प्लानिंग क्लिनिक, मिटफोर्ड अस्पताल के स्त्री रोग विभाग और ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग में अपनी सेवाएं दीं.

क्यों छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश?

साल 1992 में भारत में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा और हमलों की पृष्ठभूमि पर तसलीमा नसरीन ने 'लज्जा' (Lajja) नामक चर्चित उपन्यास लिखा. इस पुस्तक के प्रकाशित होने के बाद बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों ने इसका तीखा विरोध किया. उन पर इस्लाम और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लगाए गए. उनके खिलाफ कई फतवे जारी किए गए और हत्या की धमकियां भी दी गईं. लगातार बढ़ते खतरे के बीच साल 1994 में उन्हें सुरक्षा कारणों से गुप्त रूप से बांग्लादेश छोड़ना पड़ा और वे यूरोप चली गईं.

क्यों छोड़ा था कोलकाता?

बांग्लादेश से साल 1994 में निकाले जाने के बाद नसरीन करीब एक दशक यूरोप और अमेरिका के बीच आते-जाते हुए बिताया. इसके अलावा उन्होंने स्वीडन की नागरिकता भी हासिल की. इसके बाद नसरिन साल 2004 में कोलकाता आ गईं थीं. इसके बाद साल 2007 में उनकी किताब 'द्विखंडितो' (Dwikhandito) को लेकर कोलकाता में हिंसक कट्टरपंथी दंगे भड़क उठे, जिसके कारण स्थानीय सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें दूसरी जगह भेजना पड़ा. उन्होंने लगभग दो दशक तक नई दिल्ली में कड़े सुरक्षा घेरे के बीच भारतीय रेज़िडेंस परमिट पर निवास किया. करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटने से तसलीमा नसरीन एक बार फिर सुर्खियों में हैं.

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