10 Minute Delivery पर ब्रेक! Quick Commerce पर सरकार की कैंची, गिग वर्कर्स की सुरक्षा सबसे पहले

ऑनलाइन शॉपिंग और क्विक-कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर सरकार ने 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर सख्त रुख अपनाया है. केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato ने अपने ब्रांडिंग से 10 मिनट डिलीवरी का दावा हटाने का आश्वासन दिया है. सरकार ने साफ कहा है कि तेज डिलीवरी के दबाव में डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए.;

( Image Source:  Sora AI )
Edited By :  नवनीत कुमार
Updated On : 13 Jan 2026 3:23 PM IST

ऑनलाइन शॉपिंग की दुनिया में ‘10 मिनट डिलीवरी’ अब इतिहास बनने जा रही है. देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल और बढ़ते सड़क हादसों के बाद सरकार ने इस मॉडल पर सीधा हस्तक्षेप किया है. तेज़ डिलीवरी के दबाव में डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा खतरे में पड़ने लगी थी, जिसे अब सरकार ने गंभीरता से लिया. सरकार का साफ संदेश है कि सुविधा के नाम पर किसी की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती. इसी सोच के तहत 10 मिनट डिलीवरी के दावे हटाने का फैसला लिया गया है.

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे पर सीधे दखल दिया. उन्होंने Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा, सड़क दुर्घटनाओं और समय-सीमा के दबाव पर खुलकर चर्चा हुई. सरकार ने कंपनियों से स्पष्ट कहा कि पहले सुरक्षा, बाद में स्पीड.

‘डिलीवरी बॉय की जान पहले’ का संदेश

सरकार ने कंपनियों को दो-टूक शब्दों में कहा कि तेज डिलीवरी के चक्कर में डिलीवरी पार्टनर्स की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए. 10 मिनट की डेडलाइन के कारण कई बार राइडर्स तेज़ रफ्तार में गाड़ी चलाने को मजबूर हो रहे थे. इससे हादसों की संख्या बढ़ने की आशंका भी लगातार सामने आ रही थी. सरकार का मानना है कि उपभोक्ता सुविधा और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन ज़रूरी है.

Blinkit ने बदली टैगलाइन, बाकी कंपनियां भी तैयार

सरकारी निर्देश के बाद Blinkit ने सबसे पहले अपने ब्रांड से ‘10 मिनट डिलीवरी’ का दावा हटा दिया है. कंपनी ने अपनी टैगलाइन भी बदली है और अब जोर प्रोडक्ट्स की संख्या और सुविधा पर दिया जा रहा है, न कि समय की आक्रामक सीमा पर. अन्य प्लेटफॉर्म्स ने भी भरोसा दिलाया है कि वे अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया से इस तरह की समय-सीमा हटाएंगे. आने वाले दिनों में पूरे क्विक-कॉमर्स सेक्टर में यह बदलाव साफ दिखेगा.

गिग वर्कर्स की हड़ताल ने बदली तस्वीर

दरअसल 25 और 31 दिसंबर को देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल ने इस मुद्दे को केंद्र में ला दिया था. वर्कर्स का कहना था कि कम समय में डिलीवरी का दबाव सीधे उनकी सुरक्षा और सेहत पर असर डाल रहा है. कई मामलों में जल्दबाज़ी के कारण सड़क हादसे भी सामने आए. हड़ताल के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा और आखिरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाया गया.

स्पीड नहीं, सेफ्टी होगी प्राथमिकता

सरकार के इस फैसले का मकसद साफ है.डिलीवरी सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और मानवीय बनाना. अब कंपनियों को डिलीवरी टाइमलाइन के बजाय वर्किंग कंडीशंस, इंश्योरेंस और सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना होगा. ग्राहकों को भले ही थोड़ा इंतजार करना पड़े, लेकिन इसके बदले डिलीवरी पार्टनर्स की जान सुरक्षित रहेगी. यह फैसला साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में टेक और सुविधा से पहले इंसान को प्राथमिकता दी जाएगी.

Similar News